सोमवार, 16 फ़रवरी 2015

अप्रैल में खुलेंगे आस्था और श्रद्वा के द्वार

                               अप्रैल में खुलेंगे आस्था और श्रद्वा के द्वार


24 अप्रैल को खुलेंगे केदारबाबा के कपाट
26 अप्रैल को खुलेंगे बदरीनाथ धम के कपाट, 9 अप्रैल को निकाला जाएगा तिलों का तेल, 21 अप्रैल को खुलेंगे गंगोत्राी-यमुनोत्राी के कपाट


19 अप्रैल को उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर प्रांगण में होगी भैरव पूजा, 20 अप्रैल को केदारबाबा की डोली जाएगी गुप्तकाशी, 21 अप्रैल को पफाटा, 22 अप्रैल को गौरीकुंड, 23 को रात्रि विश्राम के लिए केदारनाथ और 24 अप्रैल को सुबह 8 बजकर 50 मिनट पर खुलेंगे केदार बाबा के कपाट 

प्राचीन मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार इस साल उत्तराखंड के चारधामों के कपाट अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह में श्र(ालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। भारत के चारधमों में से सर्वश्रेष्ठ धाम श्री बदरीनाथ के कपाट 26 अप्रैल, श्री केदारनाथ के 24 अप्रैल और गंगोत्राी-यमुनोत्राी के कपाट अक्षय तृतीया को 21 अप्रैल को श्र(ालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। उत्तराखंड के चार धामों के कपाट खुलने की तिथि घोषित होने के साथ ही यहां भक्ति की बयार अभी से बहने लग गई है। चारधम यात्रा की तैयारियों के लिए शासन-प्रशासन जहां तैयारियों में जुट गया है वहीं स्थानीय लोग भी तैयारियों में लग गये हैं। वर्ष 2013 में आयी हिमालयी सुनामी के बाद उत्तराखंड के चारधमों में तीर्थयात्रियों की आमद कम होने से स्थानीय व्यापार पर भारी असर पड़ा था। लेकिन इस साल यात्रा को लेकर उम्मीद जताई जा रही है कि यात्रा अपने उत्कर्ष पर रहेगी।
आज महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर प्राचीन मान्यताओं और परंपराओं का निर्वहन करते हुए पंच केदार के गद्दीस्थल उफखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में केदारबाबा के कपाट खुलने की तिथि घोषित की गयी। तिथि के अनुसार इस साल केदारबाबा के कपाट 24 अप्रैल को प्रातः 8 बजकर 50 मिनट पर श्र(ालुओं के लिए खोले दिये जाएंगे। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के कार्याध्किारी सुनील तिवाडी ने बताया कि ओंकारेश्वर मंदिर में आज महाशिवरात्रि के पर्व प्राचीन परंपराओं का निर्वहन करते हुए विध्-िविधन के साथ केदानाथ के रावल भीमाशंकर लिंग श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याध्किारी अनिल शर्मा, वेद पाठियों, तीर्थपुरोहितों की उपस्थिति में केदारनाथ के कपाट खुलने की तिथि तय की गई। इसके साथ की केदारबाबा की डोली प्रस्थान के लिए भी तिथि तय की गई। केदारबाबा की डोली प्रस्थान से पूर्व 19 अप्रैल को उफखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर प्रांगण में भैरव पूजा के साथ कपाट खुलने की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी। 20 अप्रैल को केदारबाबा की डोली ओंकारेश्वर मंदिर उफखीमठ से प्रस्थान कर गुप्तकाशी के विश्वनाथ मंदिर में रात्रि विश्राम करेगी। 21 अप्रैल को गुप्तकाशी से चलकर पफाटा में और 22 अप्रैल को गौरीकुंड में रात्रि विश्राम के बाद 23 को रात्रि विश्राम के लिए केदारबाब की डोली केदारनाथ पहुंचेगी। 24 अप्रैल को सुबह 8 बजकर 50 मिनट पर केदार बाबा के कपाट श्र(ालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
महाशिवरात्रि पर्व पर उफखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में आयोजित धर्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्राचीन परंपराओं का निर्वहन करते हुए केदारनाथ के कपाट खुलने की तिथि तय की गई। इस अवर पर केदारनाथ मंदिर के रावल श्री भीमाशंकर लिंग, केदारनाथ मंदिर के पुजारी राजशेखर लिंग, शंकर लिंग, श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याध्किारी अनिल शर्मा, कार्याधिकारी सुनील तिवाडी, वेदपाठी स्वयंबर प्रसाद, विधयक केदारनाथ शैला रानी रावत, पूर्व विधयक आशा नौटियाल,  मंदिर समिति के आर.सी. तिवाड़ी, मंदिर समिति के अभियंता गिरीश देवली,श्री गौड़ सहित कई लोग उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि भारत के चारधामों में से सर्वश्रेष्ठ धम श्री बदरीनाथ के कपाट इस साल 26 अप्रैल को ब्रहममुहुर्त में खोले जाएंगे। बसंतोत्सव के मौके पर टिहरी राजदरबार में भगवान बदरीविशाल के कपाट खुलने की तिथि घोषित की गई। भगवान बदरीविशाल के कपाट खुलने की तिथि घोषित करने के साथ ही तिलों का तेल निकालने की तिथि भी निकाली गई। तिलों का तेल 9 अप्रैल को टिहरी राज दरबार में निकाला जाएगा। आज टिहरी नरेश महाराजा मनुजेंद्र शाह ने कपाट खुलने की तिथि की घोषणा की।
टिहरी राज दरबार में बसंतोत्सव पर भगवान बदरीविशाल का तेल कलश ‘गाडू घड़ा’  डिमरी धर्मिक पंचायत के प्रतिनिध्यिों द्वारा पहुंचाया गया। भगवान बदरी विशाल की पूजा के लिए प्रयुक्त होने वाले तिलो के तेल को पिरोने की भी तिथि 9 अप्रैल को निश्चित की गई।  निश्चित तिथि पर टिहरी की राजरानी व क्षेत्रा की अन्य सुहागिन महिलाओं के द्वारा तिलों को पिरोकर तेल निकाला जाएगा। यही तेल ‘गाडू घड़ा’ में भरकर बदरीनाथ के लिए प्रस्थान करेगा।
महत्वपूर्ण बात यह है कि इसी ‘गाडू घड़ा’ में भरे हुए तिल के तेल से छह माह यात्रा काल के दौरान भगवान बदरी विशाल की महाभिषेक पूजा संपन्न की जाएगी। दूसरी ओर, कपाट खुलने की तिथि साथ ही अन्य परंपराएं भी प्राचीन काल से जुड़ी हुई हैं। जहाॅ एक   ओर टिहरी नरेश के दरबार में बदरीनाथ के कपाट खुलने की तिथि घोषित   की गयी।
वहीं दूसरी ओर, उत्तराखंड के चारधमों में गंगोत्राी-यमुनोत्राी के कपाट अक्षय तृतीया पर 21 अप्रैल को खोले जाएंगे। इन दोनों धमों के कपाट प्रत्येक वर्ष अक्षय तृतीया को खोले जाते हैं।

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