रविवार, 10 मई 2026

यूकेडी में युवाओं की फौज, भाजपा-कांग्रेस ‘टेंशन’ में

क्रासर--विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी में जुटा यूकेडी --प्रदेश की 70 सीटों पर चुनाव लड़ने का किया दावा --एक बूथ, दस युवा नारे के दी जा रही चुनाव को धार देहरादून। उत्तराखंड का एकमात्र क्षेत्रीय राजनीतिक दल यूकेडी में युवाओं की फौज से भाजपा-कांग्रेस की ‘टेंशन’ बढ़ गई है। यूकेडीईआने वाले विधानसभा चुनाव में प्रदेश की 70 सीटों पर युवाओं की टीम के साथ मैदान में उतरेगा। यह दावा यूकेडी के यूथ ब्रिगेड का है। यूकेडी की घोषणा से भाजपा-कांग्रेस की राह आसान नहीं होगी। बता दें कि यूकेडी राज्य बनने के बाद साल 2002 के विधानसभा चुनाव में चार, 2007 में तीन, 2022 के विधानसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। लेकिन आने वाले विधानसभा चुनाव में यूकेडी के 70 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा से भाजपा-कांग्रेस ‘चिंतित’ है। प्रदेश में लंबे समय से युवा विभिन्न समस्याओं से लेकर कई अन्य मुद्दों को लेकर सड़क से लेकर सदन तक अपना गुस्सा जाहिर कर चुका है। इससे सरकार और भाजपा सहित कांग्रेस चिंतित है। आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल ने सक्रियता तेज कर दी है। यूकेडी के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती ने बड़ा ऐलान किया कि पार्टी राज्य की सभी 70 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी। उन्होंने कहा कि यूकेडी उत्तराखंड के मूल मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी और मजबूत विकल्प के रूप में उभरेगी। यूकेडी के इस दावे के बाद राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले विधानसभा चुनाव में अगर युवाओं ने एकजुटता दिखाई तो भाजपा-कांग्रेस की राह आसान नहीं होगी। उल्लेखनीय है कि यूकेडी की यूथ ब्रिगेड़ लंबे समय से बीजेपी और कांग्रेस पर तीखे हमले बोल रही है। यहीं नहीं दोनों दलों पर प्रदेश का अहित करने का आरोप व राजधानी के मुद्दे पर सरकार और भाजपा-कांग्रेस पर तीखा पहार करने के साथ ही इन्हें उत्तराखंड के हितों के खिलाफ बता रही हैं। यूकेडी नेताओं का आरोप है कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण जिन सपनों और उद्देश्यों के साथ हुआ था बीजेपी और कांग्रेस ने बारी-बारी से सत्ता में आकर उन सपनों को तोड़ने का काम किया है। आगामी विधानसभा चुनाव में 70 सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बना चुकी यूकेडी आमजन के बीच जा रही है। पहाड़ के युवा और महिलाएं पार्टी को नई दिशा देने का काम कर रही हैं। पार्टी सूत्रों की माने तो यूकेडी ’एक बूथ, दस युवा’ के नारे के साथ संगठन को मजबूत कर रही है। युवाओं और महिलाओं को संगठन से जोड़ने का अभियान तेज किया गया है। आने वाले विधानसभा चुनाव में यूकेडी के अभी के प्रदर्शन को लेकर भाजपा-कांग्रेस अभी से ‘टेंशन’ में आ गई है। इसके लिए दोनों दल अपनी-अपनी रणनीति तय करने में लगी है ताकी चुनाव में इसका फायदा मिल सके। इन मुद्दों को लेकर घेर रहे भाजपा-कांग्रेस को यूकेडी के युवा नेताओं की माने तो भाजपा-कांग्रेस ने प्रदेश के जल, जंगल और जमीन को माफियाओं के हवाले कर दिया गया है, जबकि, आम जनता आज भी मूल निवास, सशक्त भू-कानून और गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए जाने जैसे मुद्दों पर न्याय की प्रतीक्षा कर रही है। राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पलायन जैसे मूलभूत मुद्दों पर सरकारें पूरी तरह विफल साबित हुई हैं। पहाड़ से लगातार हो रहे पलायन ने गांवों को खाली कर दिया है, लेकिन सरकार के पास इसे रोकने के लिए कोई ठोस नीति नहीं है।

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