रविवार, 10 मई 2026
आस्था और परंपरा के नाम पर ‘नई बहस’
क्रासर--चारधाम से जुड़ी समितियों ने शुरू की बहस
--बीकेटीसी के बाद गंगोत्री में राजनीति गर्मा दी
--राजनीति और समाज दोनों आये आमने-सामने
--कांग्रेस ने बताया राजनीतिक एजेंडा, भाजपा संतुलित
देहरादून। चारधाम में आस्था और परंपरा के नाम पर लिए गए फैसलों ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। गंगोत्री धाम और बदरी केदार मंदिर समिति से जुड़े फैसलों के बाद राज्य की राजनीति और समाज आमने-सामने आ गए हैं और चारधाम में गैर हिंदूओं के प्रवेश पर रोक के बाद सियासत तेज हो गई है।
बता दें कि कुछ समय पहले बदरी केदार मंदिर समिति ने बदरीनाथ धाम और केदारनाथ धाम में गैर सनातनियों के प्रवेश को लेकर सख्त रुख अपनाया था। इसके बाद अब गंगोत्री धाम से भी इसी तरह का निर्णय सामने आया है, जिसने इस पूरे मुद्दे को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। गंगोत्री मंदिर समिति ने गैर सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाने के साथ-साथ कुछ विशेष शर्तें भी तय की हैं।
समिति के फैसले के अनुसार यदि कोई गैर सनातनी गंगोत्री धाम में प्रवेश करना चाहता है, तो उसे पंचगव्य का पान करना होगा। पंचगव्य, जो कि सनातन परंपरा में बेहद पवित्र माना जाता है, पांच तत्वों गोमूत्र, गोबर, दूध, दही और घी से मिलकर तैयार होता है। सनातन धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है, इसलिए इन तत्वों का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक माना जाता है। समिति का तर्क है कि पंचगव्य का सेवन व्यक्ति की आस्था को स्पष्ट करता है और उसे शु( बनाता है, जिससे वह धाम में प्रवेश के योग्य हो जाता है।
मामले में कांग्रेस इसे चुनाव से पहले का राजनीतिक एजेंडा बता रही है, जिसका मकसद सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर चुनावी लाभ लेना है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मुस्लिम समाज मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखता, इसलिए वह पहले से ही ऐसे मंदिरों में दर्शन के लिए नहीं जाता। ऐसे में इस तरह के फैसले अनावश्यक हैं और केवल समाज में विभाजन पैदा करने के लिए लिए गए हैं।
दूसरी ओर सत्ताधारी दल भाजपा इस मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाती नजर आ रही है। पार्टी के विधायक विनोद चमोली ने कहा कि इस तरह के कठोर फैसलों की शायद जरूरत नहीं थी, क्योंकि मुस्लिम समाज खुद ही मूर्ति पूजा नहीं करता और ऐसे धामों में नहीं आता। सोशल मीडिया के लिए रील बनाने या मनोरंजन के उद्देश्य से पहुंचते हैं, जिससे धामों की गरिमा प्रभावित होती है। ऐसे लोगों को रोकने के लिए ही समिति ने यह कदम उठाया हो सकता है।
गौरतलब है कि उत्तराखंड के चारधाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के श्र(ालुओं के लिए आस्था का केंद्र हैं। ऐसे में इन धामों से जुड़े किसी भी फैसले का असर व्यापक स्तर पर पड़ता है।
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