रविवार, 10 मई 2026

पूरब से पश्चिम तक दिख रही बदलते भारत की नई सियासी तस्वीर

धर्म, राष्ट्रवाद और विकास के संगम ने बदल दी राजनीति की दिशा भारत की बदलती सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का भी है संकेत गुवाहाटी के कामाख्या मंदिर की पहाड़ियों पर सूर्य की पहली किरण से लेकर गुजरात के कच्छ के रण में डूबते सूरज की लालिमा तक देश की धमनियों में आज भगवा रंग एक नए उत्साह के साथ बह रहा है। कभी केवल वैराग्य और संन्यास का प्रतीक माना जाने वाला भगवा रंग आज आधुनिक भारत की पहचान और आत्मविश्वास का पर्याय बन चुका है। भगवा रंग को देश की राजनीति से जोड़कर भाजपा ने इसे आज अपना हथियार बनाकर देश के 70 प्रतिशत हिस्से पर अपनी पकड़ को मजबूत किया है। प्राचीन काल में भगवा रंग धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक माना जाने वाला अब राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ चुका है और जनमानस की सोच में भी गहराई तक उतर चुका है। देश में पूरब से लेकर पश्चिम तक, उत्तर से दक्षिण तक भगवा लहर केवल एक राजनीतिक ट्रेंड नहीं, बल्कि भारत की बदलती सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का संकेत भी है। पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा जैसे राज्यों में पहले जहां क्षेत्रीय दलों का वर्चस्व था, वहीं अब भगवा विचारधारा ने मजबूत चुनौती पेश की है। खासकर पश्चिम बंगाल में हाल के वर्षों में राजनीतिक संघर्ष का केंद्र यही विचारधारा बन गई है। यहां जय श्रीराम जैसे नारों ने चुनावी माहौल को पूरी तरह बदल दिया। इसी प्रकार गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भगवा पहले से ही सियासत का अहम हिस्सा रहा है। यहां यह केवल राजनीतिक रणनीति नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और गौरव का प्रतीक बन चुका है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में भगवा राजनीति अपने चरम पर है। यहां धार्मिक स्थलों के विकास, मंदिर निर्माण और सांस्कृतिक आयोजनों ने इस विचारधारा को और मजबूत किया है। दक्षिण भारत जहां परंपरागत रूप से क्षेत्रीय दलों और अलग राजनीतिक विचारधाराओं का प्रभाव रहा है, वहां भी भगवा धीरे-धीरे अपनी जगह बना रहा है। तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में अब यह केवल सीमित प्रभाव तक नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक चर्चा का अहम हिस्सा बन चुका है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इसके पीछे कई कारण हैंकृराष्ट्रवाद की भावना, धार्मिक पहचान का पुनर्जागरण,मजबूत नेतृत्व और सोशल मीडिया के जरिए विचारधारा का तेज प्रसार के साथ ही विकास के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव का संदेश भी लोगों को आकर्षित कर रहा है। राजनैतिक दलों की बात करें तो वर्तमान में देश की राजनीति में भी भगवा रंग का प्रभुत्व देखने को मिल रहा है। राजनैतिक विशेषज्ञों की माने तो देश के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से पर भगवा रंग चढ़ाने में भाजपा का हाथ है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के रणनीतिकारों की राजनैतिक चाल सफल होती दिख रही है। शायद यही कारण है कि भगवा का रंग देश पर चढ़ रहा है।

कोई टिप्पणी नहीं: