शुक्रवार, 26 जून 2026
बैरिकेड फेल, संवाद पास
दो घंटे तक दून पुलिस को छकाते रहे निहंग
रेसकोर्स गुरुद्वारे में खत्म हुआ हाईवोल्टेज ड्रामा
बैरियर तोड़कर किया देहरादून जिले में प्रवेश
गुरुद्वारे में वार्ता के बाद पांवटा साहिब लौटे जत्थे
देहरादून। सवाल केवल यह नहीं कि निहंग शहर में कैसे पहुंचे, सवाल यह भी है कि यदि उनका इरादा टकराव का होता तो क्या पुलिस उन्हें समय रहते रोक पाती? राहत की बात यह रही कि संवाद ने वह काम कर दिया, जो सायरन और बैरिकेड नहीं कर सके। बता दें कि देहरादून उस समय हाई अलर्ट पर आ गया, जब निहंग सिखों का एक जत्था पुलिस की निगरानी को धता बताते हुए शहर की सीमा में प्रवेश कर गया। पुलिस और प्रशासन की कई टीमें करीब दो घंटे तक उनकी तलाश में शहरभर में दौड़ती रहीं। आखिरकार यह जत्था रेसकोर्स स्थित गुरुद्वारे में मिला, जहां प्रशासन और सिख समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ लंबी वार्ता के बाद मामला शांत हुआ और निहंग पांवटा साहिब लौटने पर सहमत हो गए।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब नगरासू क्षेत्र में पहले से ही तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। ऐसे में देहरादून में निहंगों के प्रवेश ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी थी। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पुलिस ने शहर के प्रमुख मार्गों, धार्मिक स्थलों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया।
सूत्रों के अनुसार पुलिस को पहले से सूचना थी कि निहंगों का जत्था देहरादून की ओर बढ़ रहा है। उन्हें सीमा पर रोकने की तैयारी भी की गई थी, लेकिन जत्था वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करते हुए शहर में प्रवेश करने में सफल रहा। इसके बाद पुलिस को लगातार उनकी लोकेशन बदलने की सूचनाएं मिलती रहीं, जिससे पूरा पुलिस तंत्र सक्रिय हो गया। करीब दो घंटे तक पुलिस और खुफिया एजेंसियां उनकी तलाश में जुटी रहीं। इस दौरान शहर में कई स्थानों पर चेकिंग अभियान भी चलाया गया।
आखिरकार सूचना मिली कि निहंग रेसकोर्स स्थित गुरुद्वारे में मौजूद हैं। इसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और सिख समाज के प्रमुख लोग मौके पर पहुंचे। गुरुद्वारे के भीतर वार्ता का दौर शुरू हुआ। सूत्र बताते हैं कि प्रशासन ने कानून-व्यवस्था की स्थिति और संभावित तनाव को देखते हुए निहंगों से शांति बनाए रखने की अपील की। सिख समाज के प्रतिनिधियों ने भी संयम बरतने और प्रशासन का सहयोग करने की सलाह दी।
करीब एक घंटे चली बातचीत के बाद निहंग पांवटा साहिब लौटने पर सहमत हो गए। इसके बाद पुलिस की निगरानी में उनका जत्था देहरादून से रवाना हुआ। प्रशासन ने राहत की सांस ली क्योंकि पूरे घटनाक्रम के दौरान कहीं भी हिंसा या टकराव की स्थिति नहीं बनी।
बता दें कि पिछले कुछ दिनों से नगरासू क्षेत्र की घटनाओं के चलते प्रदेश में संवेदनशील माहौल बना हुआ है। इसी वजह से प्रशासन किसी भी नए घटनाक्रम को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि धार्मिक और सामाजिक मामलों में छोटी सी चूक भी बड़े तनाव का कारण बन सकती है। इसलिए इस पूरे घटनाक्रम को अत्यंत संयम के साथ संभाला गया।
हालांकि मामला शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो गया, लेकिन इस घटनाक्रम ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। यदि पुलिस को पहले से जत्थे के आने की सूचना थी, तो वह शहर में प्रवेश कैसे कर गए? करीब दो घंटे तक पुलिस उनकी सही लोकेशन क्यों नहीं तलाश पाई? क्या खुफिया तंत्र और फील्ड पुलिस के बीच समन्वय में कमी रही? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी चर्चा का विषय बन सकते हैं।
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राजनीतिक मुद्दा बना
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले कानून-व्यवस्था से जुड़ा हर घटनाक्रम सरकार और विपक्ष दोनों के लिए राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। विपक्ष इसे सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरी के रूप में उठाने का प्रयास कर सकता है, जबकि सरकार शांतिपूर्ण समाधान और प्रशासनिक संयम को अपनी उपलब्धि के रूप में पेश कर सकती है।
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