शुक्रवार, 8 मई 2026
विधानसभा चुनाव का अनौपचारिक ‘शंखनाद’
2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए दल तैयारियों में जुटे
भाजपा ने अपने बडे़े नेताओं की तीन जनसभाएं कर दिखाई ताकत
कांग्रेस सहित अन्य दल जनसभाओं में जनसैलाब से दिख रहे परेशान
संतोष बेंजवाल
देहरादून। चुनावी साल में चुनाव से पूर्व बड़ी जनसभाओं का सफल आयोजन किसी भी दल के लिए संजीवनी का काम करता है। पीएम मोदी के दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे के उदघाटन पर उमड़ी भीड़ से भाजपाई गदगद हैं और इसे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अपनी जीत का मंत्र मान रहे हैं। यह कहा जाए कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव 2027 का अनौपचारिक ‘शंखनाद’ कर दिया है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
बता दें कि उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों में 2027 में विधानसभा के चुनाव होने है और इसके लिए सभी दल अभी से अपनी तैयारियों में जुट गए है। अकेले उत्तराखंड की बात करें तो यहां सत्ता में भाजपा है और भाजपा किसी भी सूरत में सत्ता पर काबिज रहना चाहती है। इसके लिए पार्टी रणनीति के साथ कार्य कर रही है। भाजपा ने चुनाव की घोषणा से पहले तीन बड़ी जनसभाओं का आयोजन कर कांग्रेस को सकते में डाल दिया है।
भाजपा के तीन बडे़ नेताओं की जनसभाओं में जिस तरह से जनसैलाब उमड़ा उससे जहां भाजपा गदगद है। वही दूसरी ओर कांग्रेस सहित अन्य दलों के लिए यह किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है। राजनैतिक विशेषज्ञों की माने तो पीएम मोदी की जनसभा में उमड़ा जनसैलाब भाजपा के लिए अच्छे संकेत है। वहीं दूसरी ओर पीएम मोदी भी भीड़ को देखकर प्रदेश में मतदाताओं के मूड़ को समझ चुके है। यही कारण है कि उन्होंने प्रदेश के भाजपा नेताओं की जहां तारीफ की वही सभी से बडे़ प्यार से मिले। राजनैतिक विशेषज्ञों की माने तो यह भाजपा के लिए शुभ संकेत है।
राजनैतिक विशेषज्ञों की माने तो 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा ने अपने चुनाव अभियान की शुरुआत कर दी है। राज्य में तीन जनसभाएं कर भाजपा अब गांव-गांव दस्तक देने की तैयारी में है। सूत्र बताते हैं कि भाजपा ने अपने नेताओं को जिम्मेदारियां भी दे दी है और सभी वोटरों को लुभाने के लिए लावा-लस्कर के साथ दस्तक दे रहे हैं। वैसे भी सरकार ने चुनावी साल में जहां कैबिनेट का कोरम पूरा किया वही कई नेताओं को पदभार देकर अपनी पकड़ को मजबूत करने का काम किया है। चुनावी साल में यह सब करना भी चुनावी रणनीति का ही एक हिस्सा है।
दूसरी ओर भाजपा की जनसभाओं में उमडे़ जनसैलाब के बाद कांग्रेस सहित अन्य दल भी सकते में है। खासकर पीएम मोदी की रैली में जिस प्रकार से आमजन उमड़े थे उससे कांग्रेस को मिर्च लगी ही अन्य दल भी अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर हुए है। कांग्रेस की बात करें तो पहले ही कांग्रेस अंतरकलह से जूझ रही है और इसके साथ ही लंबे समय से सत्ता से दूरी के कारण नेताओं में एकजुटता नहीं दिख रही है। आगामी विधानसभा चुनाव भी कांग्रेस के लिए किसी महाभारत से कम नहीं होगा।
विधानसभा चुनाव की अभी औपचारिक घोषणा होना बाकी है, लेकिन भाजपा ने तो चुनाव की अनौपचारिक घोषणा कर दी है। कांग्रेस सहित अन्य दल अभी तक अपनी रणनीति बनाने में लगे हैं, जबकि राज्य में चुनाव के लिए एक साल से भी कम का समय है। राज्य में भाजपा सत्ता में है तो उसके पास संसाधन सभी हैं, लेकिन अन्य दलों के पास संसाधनों को जुटाने में समय लगेगा। इसके बाद भी कांग्रेस सहित अन्य दलों में आपसी खींचतान जारी है जो आने वाले विधानसभा चुनाव में भारी पड़ सकता है।
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