रविवार, 10 मई 2026
पिटकुल मामले में ‘जन प्रहार’
हाईकोर्ट के आदेश के बाद पिटकुल और शासन-प्रशासन में मची है खलबली
दून में आयोजित पत्रकार वार्ता में जन प्रहार ने मामले में की पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग
जन प्रहार ने प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर खडे़ किए कई सवाल
देहरादून। पिटकुल को लेकर जन प्रहार ने सरकार पर निशाना साधते हुए एक बड़ी अनियमितता की आशंका जताई है। प्रदेश में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के बहुत दावे हो रहे है, लेकिन शासन-प्रशासन प्रकरण में क्या कर रहा है। यह स्पष्ट नहीं है। दून में आयोजित पत्रकार वार्ता में जन प्रहार के प्रदेश सयोजक सुजाता पाल और सह सयोजक पंकज क्षेत्री ने प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खडे़ किए हैं।
बता दें कि उत्तराखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पिटकुल के एमडी प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति को 2021 के चयन नियमों का उल्लंघन माना, जिसके अनुसार एमडी के पास इंजीनियरिंग की डिग्री होनी चाहिए। कोर्ट ने सरकार को बार-बार निर्देश देने के बावजूद, 3 साल से तैनात अधिकारी को न हटाने पर सख्त रुख अपनाया और प्रमुख सचिव ऊर्जा आर. मीनाक्षी सुंदरम को 19 मार्च तक पेश होने को कहा है। यहां सबसे खास बात यह है कि पिटकुल एक तकनीकी संस्था है, लेकिन पीसी ध्यानी के पास अपेक्षित योग्यता नहीं थी। इसका संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने आदेश जारी किए।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद पिटकुल में खलबली मच गई और उस दिन से लेकर आज दिन में पिटकुल में अपनों को फायदा दिलाने के लिए अलग ही घटनाक्रम चल रहा है। इन घटनाक्रमों के बीच यह भी सामने आ रहा है कि सरकार द्वारा पिटकुल के प्रबंध निदेशक पद से संबंधित नियमों में नए सिरे से बदलाव करने के पश्चात नई नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जा रही है। पूरे प्रशासनिक घटनाक्रम की पारदर्शिता पर प्रश्न खड़े होते हैं। यदि वास्तव में नियमों में बदलाव किसी एक व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है, तो यह प्रशासनिक सि(ांतों और न्यायिक व्यवस्था की भावना के विपरीत है।
पत्रकार वार्ता में हाईकोर्ट में मामले के केस में पक्षकार दीप्ति पोखरियाल, सुजाता पाल, पंकज सिंह क्षेत्री, प्रदेश प्रवक्ता रविंद्र सिंह गुंसाई आदि थे।
पूरे मामले का यह है घटनाक्रम
18 फरवरी -उच्च न्यायालय उत्तराखंड ने पिटकुल के प्रबंध निदेशक प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति को अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया।
22 फरवरी-मामले में जन प्रहार द्वारा मीडिया के माध्यम से सरकार से स्पष्टीकरण मांगा गया और न्यायालय के आदेश के अनुपालन को लेकर प्रश्न उठाए गए।
23 फरवरी-प्रकरण की जानकारी महालेखा परीक्षक को भी प्रेषित की गई ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।
24 फरवरी-मुख्य सचिव से मुलाकात कर उन्हें पूरे मामले से अवगत कराया गया और न्यायालय के आदेश के अनुपालन को लेकर स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया गया।
26 फरवरी-कैबिनेट बैठक के सभी निर्णय सार्वजनिक किए, लेकिन राज्य के तीनों निगमों के प्रबंध निदेशक और निदेशक पदों के नियम के बदलाव सार्वजनिक नहीं किया गया।
27 फरवरी प्रमुख सचिव ऊर्जा को समन जारी कर 19 मार्च को न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया।
जन प्रहार ने पिटकुल मुख्यालय के बाहर ऊर्जा मंत्री का प्रतीकात्मक पुतला दहन कर विरोध दर्ज किया
3 मार्च - पिटकुल और यूपीसीएल के निदेशक पदों पर नियुक्ति की चल रही प्रक्रिया के अंतर्गत चयन साक्षात्कार स्थगित।
जन प्रहार ने की मांग
-पिटकुल के एमडी पद से जुड़े सभी आदेश और निर्णय सार्वजनिक किए जाएं।
-नियमों में हालिया बदलाव की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए।
-न्यायालय के आदेश के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट की जाए।
-यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए।
-आवेदन करते समय अभ्यर्थियों की उम्र 45 से 58 वर्ष से 45 से 60 वर्ष क्यों कर दी गईई?
-टेक्निकल पद पर टेक्निकल क्वालिफिकेशन की अर्हता क्यों समाप्त की गई?
मुख्य सचिव से भी मिल चुका है मामले में जन प्रहार का प्रतिनिधिमंडल
बता दें कि इससे पूर्व भी जन प्रहार उत्तराखंड के प्रतिनिधिमंडल ने मामले में मुख्य सचिव से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और पिटकुल एमडी प्रकाश चंद्र ध्यानी को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की है। आदेश में पिटकुल के प्रबंध निदेशक प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति को अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया गया है। जन प्रहार के सह संयोजक पंकज सिंह क्षेत्री ने कहा कि यह मामला पिटकुल के एमडी प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति का ही नहीं, बल्कि उनके पद पर लगातार कार्यरत रहकर सामान्य रूप से कार्य करने से शासन की पारदर्शिता, नियमों के पालन और सार्वजनिक धन की सुरक्षा से जुड़े सवालों को खड़ा करता है।
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