शुक्रवार, 8 मई 2026

गैरसैंण है उत्तराखंड की ‘आत्मा’

‘वेडिंग डेस्टिनेशन’ वाला पर्यटन मंत्री का बयान पर्वतीय क्षेत्र के लोगों के दिल पर दे गया ‘जख्म’ भराड़ीसैंण स्थित विधानमंडल भवन पर पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के एक ‘बयान’ हास्यास्पद भराड़ीसैंण राज्य का प्रशासनिक और राजनीतिक केंद्र ही नहीं, पर्वतीय क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक आत्मा देहरादून। गैरसैंण उत्तराखंड की ‘आत्मा’ है। यह राज्य की मांग को लेकर लंबे समय तक आंदोलन करने वाले पर्वतीय क्षेत्र के उन लोगों की है, जिन्होंने लंबा आंदोलन किया। आंदोलन के दौरान भूख, प्यास, प्राणों की आहुति और संघर्ष आज भी उन आंदोलनकारियों को याद है जो आज उस इतिहास के गवाह हैं। गैरसैंण में राज्य का प्रशासनिक और राजनीतिक केंद्र ही नहीं है, बल्कि राज्य की भौगोलिक और सामाजिक आत्मा यहां बसती है। ऐसे में ‘वेडिंग डेस्टिनेशन’ वाला बयान पर्वतीय क्षेत्र के लोगों के दिल पर ‘जख्म’ दे गया है। गैरसैंण में विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राज्य के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के एक ‘बयान’ ने सभी के आंखों में आसु ला दिए, जिन्होंने राज्य आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका निभायी। पहले तो राज्य बने इतने लंबे समय बाद गैरसैंण राजधानी तो नहीं बनी, लेकिन सरकार इसे ग्रीष्मकालीन राजधानी के तौर पर प्रचारित कर रही है। वर्तमान में यहां सत्र का आयोजन हो रहा है, तो पहाड़वासियों को लगा था कि आने वाले समय में यह राजधानी बन ही जाएगी। राज्य के पर्यटन मंत्री ने गैरसैंण को ‘टैंट हाउस’ बनाने का बयान देकर घी में आग देने का काम करने के साथ ही पहाड़वासियों की आत्मा पर चोट मार दी है। बता दें कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण पहाड़ के लोगों की भावनाओं के अनुरूप बनना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यह कहना है पहाड़ के लोगों का। राज्य निर्माण आंदोलन के दौरान जिस मांग को लेकर पहाड़ के आमजन सड़क पर उतरकर ‘कोदा, झंगोरा’ खाएंगे उत्तराखंड बनाएंगे का नारा दिया गया था वह पर्वतीय क्षेत्र की आत्मा की आवाज थी, लेकिन सत्ता में बैठे लोगों को यह आवाज नहीं सुनाई दी। राज्य का निर्माण तो हुआ पर राज्यवासियों के अनुरूप नहीं। आंदोलनकारियों की दिल की तमन्ना थी कि राज्य की राजधानी वहां होनी चाहिए, जहां राज्य की आत्मा का वास हो, लेकिन सत्ताधीशों को यह मंजूर नहीं था। पर्यटन मंत्री का एक ‘शब्द’ जिसने पर्वतीय क्षेत्र के लोगों की भावना को आहत कर दिया है। क्योकि गैरसैंण एक स्थान ही नहीं, बल्कि एक बडे़ आंदोलन की स्मृति का केंद्र है, जिसमें पहाड़ के हजारों युवाओं ने अपने सपने और अपने जीवन दांव पर लगाए थे। गैरसैंण को लेकर पर्यटन मंत्री का बयान राजनीतिक विवाद ही नहीं, पहाड़ के लोगों के दिल में एक गहरी टीस पैदा करता है। उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज का वह बयान भराड़ीसैंण स्थित विधानमंडल भवन को भविष्य में वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की संभावना का जिक्र किया। इसके बाद प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया है। भाजपा के नेता जहां पर्यटन मंत्री को बचाने में लगी है वहीं अन्य दलों ने इसे सड़क से लेकर सदन तक मुद्दा बना दिया है और आने वाले समय में यह आग की तरह प्रदेश में फैल सकता है।

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