शुक्रवार, 8 मई 2026

विस चुनाव, अर्धकुंभ और जनगणना

2027 में उत्तराखंड की सरकारी मशीनरी की ‘अग्निपरीक्षा’ --सियासी गलियारों में विधानसभा चुनाव की चर्चाएं पर बढ़ रही हैं परेशानियां --अर्धकुंभ और जनगणना की तैयारियों को लेकर अफसरों के छूटने लगे पसीने संतोष बेंजवाल देहरादूनः उत्तराखंड के लिए 2027 में विधानसभा चुनाव, हरिद्वार अर्धकुंभ और राष्ट्रीय जनगणना का आयोजन राज्य की सरकारी मशीनरी की अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। एक और जहां सियासी गलियारों में समय से पहले चुनाव की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। दूसरी ओर अर्धकुंभ और जनगणना की तैयारियों को लेकर अफसरों के अभी से पसीने छूटने लगे है, जबकि इनमें अभी लंबा समय है। बता दें कि राज्य की 70 विधानसभा सीटों पर चुनाव मूल रूप से फरवरी-मार्च 2027 में प्रस्तावित हैं। ठीक उसी दौरान हरिद्वार में अर्धकुंभ का भव्य आयोजन होना है, जो 14 जनवरी 2027 से शुरू होकर 20 अप्रैल 2027 तक चलेगा। इसमें 10 प्रमुख स्नान तिथियां हैं, जिनमें फरवरी-मार्च के चार अमृत स्नान ;6 फरवरी मौनी अमावस्या, 11 फरवरी बसंत पंचमी, 20 फरवरी माघ पूर्णिमा और मार्च-अप्रैल के अमृत स्नानद्ध शामिल हैं। लाखों-करोड़ों श्र(ालुओं की भीड़, शाही स्नान और अखाड़ों की व्यवस्था को देखते हुए सुरक्षा, ट्रैफिक, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन की चुनौती पहले से ही भारी है। इसके अलावा जनगणना की प्रक्रिया भी फरवरी-मार्च 2027 के आसपास शुरू होने वाली है, जिसमें हजारों सरकारी कर्मचारियों को घर-घर सर्वे के लिए लगाना पड़ेगा। इसके साथ ही सियासी गलियारों और सोशल मीडिया में इन दिनों यह चर्चा गरम है कि क्या सरकार चुनाव नवंबर-दिसंबर 2026 में करा सकती है? कारण साफ है, अर्धकुंभ जैसा बड़ा और धार्मिक आयोजन, जनवरी से अप्रैल तक होगा। अगर चुनाव फरवरी-मार्च में हुए तो कुंभ की सुरक्षा और चुनावी ड्यूटी में टकराव होना साफ है। ऐसे में सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अगर भाजपा को अपनी वापसी पर भरोसा है तो वह 2026 के अंत में चुनाव करा सकती है, ताकि कुंभ के दौरान शांतिपूर्ण माहौल बना रहे।

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