मंगलवार, 30 जून 2026

अधूरी ‘आस’ पर चुनावी ‘बिसात’

कांग्रेस पार्टी का बड़ा दावा राज्य गठन के मूल उद्देश्य आज भी अधूरे, जनता की अदालत में जाएगी कांग्रेस उत्तराखंड की पहचान और जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा को लेकर विपक्ष ने तैयार किया आक्रामक ब्लूप्रिंट रोजगार और हकों की लड़ाई बनेगी चुनावी एजेंडा, युवाओं को साधने की कोशिश में जुटी मुख्य विपक्षी पार्टी देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही प्रदेश की राजनीति में मुद्दों की बिसात बिछनी शुरू हो गई है। विपक्षी कांग्रेस ने इस बार चुनावी मैदान में स्थानीय अस्मिता, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा और युवाओं के हक की लड़ाई को अपना प्रमुख चुनावी एजेंडा बनाने का फैसला किया है। पार्टी का मानना है कि राज्य गठन के मूल उद्देश्य आज भी अधूरे हैं और इन्हीं अधूरे सपनों को लेकर वह जनता के बीच जाएगी। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उत्तराखंड आंदोलन केवल एक अलग राज्य की मांग नहीं था, बल्कि यह पहाड़ की पहचान, संसाधनों पर स्थानीय लोगों के अधिकार और युवाओं के बेहतर भविष्य का सपना भी था। लेकिन दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पलायन, बेरोजगारी और संसाधनों पर बाहरी हस्तक्षेप जैसे मुद्दे आज भी जस के तस बने हुए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि राज्य की संस्कृति, भाषा, लोक परंपराओं और स्थानीय पहचान को पर्याप्त संरक्षण नहीं मिल पा रहा है। पार्टी का कहना है कि उत्तराखंड की मूल पहचान को बचाने के लिए ठोस नीतियों की जरूरत है। कांग्रेस स्थानीय लोगों के लिए रोजगार, भूमि और संसाधनों पर प्राथमिक अधिकार की बात को प्रमुखता से उठाएगी। कांग्रेस का दावा है कि प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों का लाभ स्थानीय लोगों को अपेक्षित रूप से नहीं मिल पाया है। वन क्षेत्रों से जुड़े गांवों की समस्याएं, भूमि कानूनों को लेकर उठ रहे सवाल और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को पार्टी चुनावी मुद्दा बनाएगी। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जल, जंगल और जमीन पर पहला हक उत्तराखंड के लोगों का होना चाहिए और इसके लिए नई नीतियां बनाई जानी चाहिए। प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों और पलायन को लेकर कांग्रेस सरकार को घेरने की तैयारी में है। पार्टी का मानना है कि रोजगार की कमी के कारण बड़ी संख्या में युवा राज्य छोड़ने को मजबूर हैं। कांग्रेस युवाओं के लिए रोजगार, स्वरोजगार और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को अपने प्रमुख चुनावी वादों में शामिल कर सकती है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन जिन सपनों और उम्मीदों के साथ लड़ा गया था, उन्हें पूरा करने का समय आ गया है। पार्टी आगामी चुनाव में राज्य आंदोलन की भावना को फिर से जीवित करने की कोशिश करेगी और जनता को यह संदेश देगी कि यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अस्मिता और भविष्य को बचाने का चुनाव है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस स्थानीय मुद्दों को प्रभावी ढंग से जनता के बीच ले जाने में सफल रही तो यह सत्तारूढ़ भाजपा के लिए चुनौती बन सकता है। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में पलायन, रोजगार और संसाधनों पर अधिकार जैसे मुद्दे चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। अब देखना यह होगा कि स्थानीय अस्मिता, जल-जंगल-जमीन और युवाओं के हक की लड़ाई को कांग्रेस किस तरह जन आंदोलन का रूप देती है और क्या ये मुद्दे आगामी विधानसभा चुनाव में सत्ता की दिशा तय करने में निर्णायक साबित होंगे।

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