मंगलवार, 16 जून 2026

दिल्ली से देहरादून तक मंथन

संगठन को धार देने में जुटे भाजपा और कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता बूथ से सत्ता तक का गणित, भाजपा-कांग्रेस की बैठकें हुई तेज देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 भले अभी दूर हो, लेकिन राजनीतिक दलों ने चुनावी तैयारी का बिगुल बजा दिया है। सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस दोनों ही संगठन को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। देहरादून से लेकर दिल्ली तक बैठकों का दौर जारी है, जिसमें बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ताओं की सक्रियता, क्षेत्रीय समीकरण और चुनावी रणनीति पर मंथन किया जा रहा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों यह समझ चुकी हैं कि उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में चुनावी जीत का आधार मजबूत संगठन ही होता है। यही वजह है कि दोनों दल चुनावी मैदान में उतरने से पहले अपनी संगठनात्मक कमजोरियों को दूर करने में जुटे हैं। भाजपा ने मिशन 2027 के तहत बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत बनाने की रणनीति तैयार की है। प्रदेश नेतृत्व लगातार राष्ट्रीय पदाधिकारियों और केंद्रीय नेताओं के साथ बैठकें कर रहा है। पार्टी का जोर उन बूथों और विधानसभा क्षेत्रों पर है जहां पिछले चुनावों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं हो पाया था। भाजपा नेतृत्व कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने में जुटा है कि विधानसभा चुनाव में जीत की नींव बूथों पर ही रखी जाएगी। इसके लिए बूथ समितियों का पुनर्गठन, पन्ना प्रमुखों की सक्रियता और सरकार की योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों को भी अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपे जाने की चर्चा है। संगठन का लक्ष्य चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरना और किसी भी प्रकार की गुटबाजी को समाप्त करना है। कांग्रेस भी आगामी चुनाव को सत्ता में वापसी के अवसर के रूप में देख रही है। पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व की मौजूदगी में लगातार संगठनात्मक बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। प्रदेश संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और जिला स्तर पर समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि यदि संगठन मजबूत रहा तो सरकार के खिलाफ जनता के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया जा सकेगा। इसी कारण पार्टी बूथ स्तर तक अपनी इकाइयों को सक्रिय करने और निष्क्रिय कार्यकर्ताओं को फिर से जोड़ने की कोशिश कर रही है। राष्ट्रीय नेताओं के साथ बैठकों में प्रदेश के राजनीतिक हालात, स्थानीय मुद्दों और संभावित चुनावी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हो रही है। पार्टी विशेष रूप से युवा, महिला और सोशल मीडिया नेटवर्क को मजबूत करने पर भी फोकस कर रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों के केंद्रीय नेतृत्व की सक्रियता बढ़ना इस बात का संकेत है कि चुनाव को गंभीरता से लिया जा रहा है। दोनों दलों के लिए उत्तराखंड प्रतिष्ठा का चुनाव बनने जा रहा है। भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने का रिकार्ड बनाना चाहती है, जबकि कांग्रेस एक दशक बाद सत्ता में वापसी का सपना देख रही है। ऐसे में संगठनात्मक मजबूती ही दोनों दलों की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है। आने वाले महीनों में दोनों दलों के राष्ट्रीय नेताओं के उत्तराखंड दौरे बढ़ सकते हैं। कार्यकर्ता सम्मेलन, प्रशिक्षण शिविर, जनसंवाद कार्यक्रम और संगठनात्मक बैठकें चुनावी माहौल को और तेज करेंगी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि चुनावी जंग भले 2027 में होनी है, लेकिन उसकी बुनियाद अभी से रखी जा रही है। उत्तराखंड की राजनीति में फिलहाल मुद्दों से ज्यादा संगठन की मजबूती पर जोर दिखाई दे रहा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों यह मानकर चल रही हैं कि मजबूत संगठन ही 2027 की सत्ता की चाबी साबित होगा।

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