सोमवार, 29 जून 2026

भाजपा का नया ‘हैट्रिक’ का प्लान

केवल उपलब्धियों के भरोसे नहीं भाजपा, सत्ता में तीसरी बार वापसी के लिए बदला चुनावी फार्मूला उत्तराखंड भाजपा ने बदली रणनीति, घर-घर दस्तक के साथ संगठन को किया री-बूट भाजपा का रणनीति बदलाव, अब सिर्फ काम नहीं, बूथ और समीकरण जिताएंगे चुनाव देहरादून। लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का इतिहास रचने के लक्ष्य के साथ भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी अब केवल सरकार की उपलब्धियों के सहारे चुनावी मैदान में उतरने के बजाय संगठन, बूथ प्रबंधन, जनसंपर्क और नए सामाजिक समीकरणों पर विशेष फोकस कर रही है। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि लगातार दो चुनावों में मिली सफलता के बाद तीसरी जीत सबसे कठिन चुनौती होगी। यही कारण है कि पार्टी ने अभी से चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं और संगठन को गांव-गांव तथा घर-घर तक सक्रिय करने की रणनीति बनाई है। भाजपा इस बार अपनी पूरी ताकत बूथ स्तर पर झोंकने जा रही है। पार्टी का मानना है कि मजबूत बूथ प्रबंधन ही चुनावी जीत की सबसे बड़ी कुंजी है। इसके लिए पन्ना प्रमुखों, शक्ति केंद्रों और बूथ समितियों को फिर से सक्रिय किया जा रहा है। पार्टी पदाधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि प्रत्येक गांव और प्रत्येक मतदान केंद्र तक पहुंच बनानी होगी। सरकार की योजनाओं का लाभ लेने वाले लोगों से सीधे संपर्क स्थापित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट लगातार कार्यकर्ताओं से संवाद कर रहे हैं। पार्टी का मानना है कि जमीनी कार्यकर्ता ही भाजपा की सबसे बड़ी ताकत हैं और उन्हीं के दम पर तीसरी बार सत्ता की राह आसान होगी। इसी के तहत कार्यकर्ताओं को गांव-गांव और घर-घर दस्तक देकर सरकार की उपलब्धियां और संगठन की नीतियां जनता तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है। भाजपा इस बार युवाओं, महिलाओं और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं पर विशेष ध्यान दे रही है। पार्टी की रणनीति में इन वर्गों तक सीधे पहुंचने और उन्हें संगठन से जोड़ने की योजना शामिल है। इसके साथ ही उन क्षेत्रों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है, जहां पिछले चुनाव में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। इन सीटों के लिए अलग चुनावी रणनीति तैयार की जा रही है। भाजपा नेतृत्व इस बार सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दे रहा है। मंत्रियों, विधायकों और संगठन पदाधिकारियों को जनता के बीच लगातार सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। पार्टी का मानना है कि केवल चुनाव के समय जनता के बीच पहुंचने के बजाय पूरे कार्यकाल में सक्रिय रहना ही तीसरी बार सत्ता में वापसी का मजबूत आधार बनेगा। भाजपा की रणनीति केवल अपनी उपलब्धियों को गिनाने तक सीमित नहीं है। पार्टी विपक्ष की कथित विफलताओं और अंतर्विरोधों को भी चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है। इसके लिए अलग-अलग स्तर पर अभियान चलाने की योजना बनाई जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव-2027 को लेकर पारंपरिक चुनावी रणनीति से आगे बढ़ते हुए एक नया माडल तैयार किया है, जिसमें बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ता आधारित जनसंपर्क, सामाजिक समीकरण और निरंतर राजनीतिक सक्रियता को केंद्र में रखा गया है। स्पष्ट है कि भाजपा तीसरी बार सत्ता में वापसी को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। पार्टी ने अभी से चुनावी शंखनाद कर दिया है और उसकी नई रणनीति यह संकेत दे रही है कि 2027 का चुनाव केवल सरकार की उपलब्धियों पर नहीं, बल्कि मजबूत संगठनात्मक ढांचे और जमीनी सक्रियता के दम पर लड़ा जाएगा।

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