बुधवार, 17 जून 2026
गांवों से लेकर सोशल मीडिया तक ‘सियासी जंग’
चुनाव में अभी समय, लेकिन मैदान में उतर चुके हैं दोनों दलों के कार्यकर्ता
भाजपा सरकार की उपलब्धियों के सहारे, कांग्रेस जनमुद्दों के सहारे बना रही रणनीति
बेरोजगारी, पलायन, महंगाई और विकास के मुद्दों पर तेज होगी 2027 की जंग
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 में अभी डेढ़ वर्ष से अधिक का समय शेष है, लेकिन सियासी दलों ने चुनावी रण की तैयारियां अभी से शुरू कर दी हैं। सत्ता में बैठी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस दोनों ही गांव की चौपालों, कस्बों की बैठकों, सोशल मीडिया अभियानों और संगठनात्मक गतिविधियों के जरिए अपनी-अपनी जमीन मजबूत करने में जुट गई हैं। प्रदेश की राजनीति में अब हर कार्यक्रम, हर दौरा और हर बयान को चुनावी नजरिए से देखा जाने लगा है।
भाजपा जहां लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का इतिहास रचने की तैयारी कर रही है, वहीं कांग्रेस दस साल के सत्ता वनवास को समाप्त करने के लिए पूरी ताकत झोंकने की रणनीति पर काम कर रही है। यही वजह है कि दोनों दलों के नेता गांव-गांव पहुंच रहे हैं और संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने में लगे हैं।
सत्तारूढ़ भाजपा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में विकास कार्यों, निवेश, सड़क, रेल, हवाई कनेक्टिविटी, समान नागरिक संहिता और धार्मिक पर्यटन जैसे मुद्दों को जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है। प्रदेश संगठन भी बूथ सशक्तिकरण अभियान पर जोर दे रहा है। पार्टी का लक्ष्य है कि प्रत्येक बूथ पर कार्यकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क तैयार किया जाए। भाजपा नेताओं का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली सफलता का लाभ 2027 में भी मिल सकता है, यदि संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत किया जाए। इसी रणनीति के तहत केंद्रीय नेताओं, प्रदेश प्रभारी और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों के लगातार उत्तराखंड दौरे हो रहे हैं। जिलों और मंडलों में बैठकों का सिलसिला तेज हो गया है। पार्टी विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान दे रही है, जहां पिछले चुनावों में जीत का अंतर कम रहा था।
दूसरी ओर कांग्रेस बेरोजगारी, महंगाई, पेपर लीक, पलायन, स्वास्थ्य सुविधाओं और स्थानीय युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि प्रदेश में एंटी-इंकम्बेंसी का लाभ उसे मिल सकता है। इसी कारण पार्टी नेताओं को जनता के बीच जाने और जनसंवाद बढ़ाने के निर्देश दिए जा रहे हैं। प्रदेश प्रभारी से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक लगातार जिलों का दौरा कर संगठन को सक्रिय करने में जुटे हैं। कांग्रेस की चुनौती केवल भाजपा से मुकाबला करना नहीं है, बल्कि अपने भीतर की गुटबाजी को नियंत्रित रखना भी है। पार्टी नेतृत्व जानता है कि यदि संगठन एकजुट रहा तो मुकाबला अधिक प्रभावी हो सकता है।
उत्तराखंड के चुनावों में हमेशा गांव और ग्रामीण मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। यही कारण है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों का फोकस गांवों की चौपालों पर है। नेता अब शहरों से निकलकर दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों की पगडंडियां नाप रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बैठकों, जनसंपर्क अभियानों और स्थानीय मुद्दों को उठाने का सिलसिला तेज हो गया है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और पलायन जैसे मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में दिखाई देने लगे हैं। विधानसभा चुनाव 2027 में सोशल मीडिया की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण रहने वाली है। भाजपा और कांग्रेस दोनों डिजिटल प्लेटफार्म पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने में लगी हैं।
व्हाट्सएप ग्रुप, फेसबुक पेज, यूट्यूब चैनल और इंस्टाग्राम के जरिए मतदाताओं तक पहुंचने की रणनीति बनाई जा रही है। राजनीतिक दल अब केवल रैलियों और सभाओं पर निर्भर नहीं रहना चाहते, बल्कि मोबाइल स्क्रीन तक अपनी पहुंच सुनिश्चित करना चाहते हैं। दोनों दलों के सामने एक बड़ी चुनौती अपने नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ रखने की भी है। भाजपा और कांग्रेस दोनों में ऐसे नेता हैं जो टिकट और संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लेकर असंतुष्ट रहे हैं। चुनाव नजदीक आते ही डैमेज कंट्रोल की राजनीति भी तेज हो गई है। वरिष्ठ नेता लगातार संवाद स्थापित कर संगठन को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 का चुनाव विकास बनाम जनमुद्दों की लड़ाई के रूप में सामने आ सकता है। भाजपा जहां अपनी उपलब्धियों और केंद्र-राज्य सरकार की योजनाओं को मुद्दा बनाएगी, वहीं कांग्रेस जनता से जुड़े सवालों को लेकर चुनावी मैदान में उतरेगी। हालांकि चुनाव में अभी समय है, लेकिन उत्तराखंड की राजनीति में चुनावी बिगुल बज चुका है। गांव की चौपाल से लेकर सोशल मीडिया तक दोनों दलों ने अपनी-अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। आने वाले महीनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होंगी और प्रदेश की जनता के बीच वादों, दावों और आरोप-प्रत्यारोपों का दौर भी बढ़ेगा।
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