सोमवार, 20 जुलाई 2026
बाहर जेन जेड और सदन के भीतर विपक्ष ने सरकार को घेरा
संसद के बाहर युवाओं हल्ला, भीतर सरकार पर विपक्ष का वार
रोजगार, पेपर लीक, शिक्षा के मुद्दे पर दिल्ली में गरमाया माहौल
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सड़क व सदन में महासंग्राम
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही देश की राजनीति में सड़क और सदन दोनों का तापमान बढ़ गया। एक ओर लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष ने केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की, तो दूसरी ओर जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में जुटे नई पीढ़ी के युवाओं ने इन्हीं सवालों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की। इससे यह संदेश गया कि जिन मुद्दों पर संसद के भीतर बहस हो रही है, वही मुद्दे संसद के बाहर भी युवाओं के आक्रोश का कारण बने हुए हैं। जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि डिग्री हासिल करने के बाद भी रोजगार के अवसर सीमित हैं, सरकारी भर्तियां समय पर पूरी नहीं हो रहीं और पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को अनिश्चित बना दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनकी लड़ाई किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि अपने भविष्य और अधिकारों के लिए है।
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा और राज्यसभा में विपक्षी दलों ने युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की कोशिश की। विपक्ष का कहना था कि देश का सबसे बड़ा वर्ग रोजगार, शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर चिंतित है और सरकार को इन सवालों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। सत्ता पक्ष ने अपनी योजनाओं, कौशल विकास, स्टार्टअप, डिजिटल इंडिया और रोजगार सृजन की पहलों का हवाला देते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। जंतर-मंतर पर सबसे ज्यादा गूंजा सवाल थाकृडिग्री है... नौकरी कहां है? युवाओं का कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार विवाद, भर्तियों में देरी और रिक्त पदों को समय पर न भरने से लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उनका आरोप था कि सरकार घोषणाएं तो करती है, लेकिन युवाओं को समय पर अवसर नहीं मिल रहे।
इस प्रदर्शन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें बड़ी संख्या में ऐसे युवा शामिल दिखे जो पहली बार किसी बड़े जन आंदोलन का हिस्सा बने। सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाली यह पीढ़ी अब केवल आनलाइन विरोध तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि नीतिगत फैसलों में अपनी भागीदारी और जवाबदेही भी चाहती है।
संसद के भीतर विपक्ष की आक्रामकता और संसद के बाहर युवाओं का प्रदर्शन आने वाले समय की राजनीति का संकेत माना जा सकता है। देश में करोड़ों युवा मतदाता हैं और उनकी प्राथमिकताएं अब रोजगार, शिक्षा, पारदर्शी भर्ती और बेहतर अवसरों पर अधिक केंद्रित होती दिखाई दे रही हैं। ऐसे में यह वर्ग 2027 के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। जंतर-मंतर का प्रदर्शन और संसद में चली बहस, दोनों ने यह स्पष्ट कर दिया कि युवाओं के मुद्दे अब केवल चुनावी भाषणों तक सीमित नहीं रह गए हैं। चुनौती यह है कि इन सवालों का समाधान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर नीतिगत फैसलों और समयबद्ध कार्रवाई के रूप में सामने आए।
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