बुधवार, 19 अगस्त 2026

यूकेडी की 70 सीटों पर ‘अकेले’ हुंकार

उत्तराखंड बचाओ यात्रा से अपनी चुनावी जमीन नापेगा यूकेडी यूकेडी के टिकट दावेदार दिखाएंगे अपने समर्थकों संग ताकत विधानसभा चुनाव से पहले यूकेडी ने तेज की सियासी सक्रियता यात्रा के जरिए संगठन व टिकट दावेदारों की ताकत को परखेगी देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव का माहौल धीरे-धीरे जमीन पर उतरने लगा है। भाजपा और कांग्रेस के साथ अब राज्य आंदोलन की राजनीतिक विरासत का दावा करने वाला उत्तराखंड क्रांति दल यानी यूकेडी भी अपनी चुनावी जमीन मजबूत करने में जुट गया है। पार्टी ने सभी 70 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। ऐसे में प्रस्तावित उत्तराखंड बचाओ यात्रा को केवल जनसंपर्क अभियान नहीं, बल्कि आगामी चुनाव के लिए संगठन और संभावित प्रत्याशियों की ताकत परखने की कवायद के तौर पर भी देखा जा रहा है। यात्रा के दौरान यूकेडी के टिकट दावेदार अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों से समर्थकों को जुटाकर संगठन के सामने अपनी राजनीतिक पकड़ का प्रदर्शन कर सकते हैं। यानी यह यात्रा एक तरह से कौन कितना मजबूत का अनौपचारिक इम्तिहान भी बन सकती है। जिन दावेदारों के पीछे कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भीड़ दिखाई देगी, वह पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी दावेदारी को मजबूती से रखने की कोशिश करेंगे। यूकेडी के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि हर विधानसभा क्षेत्र में ऐसा संगठन खड़ा करना है जो मतदान तक सक्रिय रह सके। पार्टी यदि सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ने की रणनीति पर आगे बढ़ती है तो उसे बड़ी संख्या में मजबूत स्थानीय चेहरों की जरूरत होगी। यही वजह है कि संभावित प्रत्याशियों के लिए अब केवल पार्टी का टिकट मांगना पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें यह भी साबित करना होगा कि उनके पास क्षेत्र में कार्यकर्ताओं का नेटवर्क, स्थानीय मुद्दों की पकड़ और चुनाव लड़ने की क्षमता है। यात्रा इसी शक्ति परीक्षण का मंच बन सकती है। किस विधानसभा क्षेत्र से कितने लोग यात्रा में पहुंचते हैं, कौन-सा दावेदार अपने साथ संगठन के कितने कार्यकर्ताओं को जोड़ पाता है और स्थानीय स्तर पर किस चेहरे को ज्यादा समर्थन मिलता हैकृइन सब पर पार्टी के भीतर स्वाभाविक रूप से नजर रहेगी। यूकेडी ने हाल के महीनों में अपने पुराने क्षेत्रीय मुद्दों को फिर से राजनीतिक केंद्र में लाने की कोशिश की है। मूल निवास, भू-कानून, जल-जंगल-जमीन, पलायन और उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान जैसे सवाल पार्टी के एजेंडे में प्रमुख हैं। जून में पार्टी की बैठकों में भी मूल निवास और जल-जंगल-जमीन पर उत्तराखंडवासियों के अधिकार को प्रमुख मुद्दा बनाने पर जोर दिया गया था। अगस्त में यूकेडी ने संकल्प, नए उत्तराखंड का नाम से अपना नीतिगत एजेंडा जारी करते हुए अनुच्छेद 371 के तहत विशेष संवैधानिक प्रावधान, मूल निवास को कानूनी मान्यता, व्यापक भू-कानून, रोजगार और पलायन रोकने जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी। यानी उत्तराखंड बचाओ यात्रा के जरिए पार्टी कोशिश कर सकती है कि चुनावी बहस को केवल भाजपा बनाम कांग्रेस के द्वंद्व तक सीमित न रहने दिया जाए। यूकेडी के संभावित प्रत्याशियों के लिए यह यात्रा दोहरी परीक्षा होगी। एक तरफ उन्हें पार्टी के मुद्दों को जनता तक पहुंचाना होगा, दूसरी तरफ अपने क्षेत्र में अपनी व्यक्तिगत स्वीकार्यता भी दिखानी होगी। खासकर उन सीटों पर जहां कई नेता टिकट की दौड़ में हैं, वहां समर्थकों की मौजूदगी राजनीतिक संदेश देने का काम कर सकती है। लेकिन भीड़ को वोट में बदलना अलग चुनौती होगी। उत्तराखंड की राजनीति में कई बार बड़े जनसमूह और चुनावी परिणाम के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है। इसलिए पार्टी के सामने सवाल केवल भीड़ जुटाने का नहीं, बल्कि भीड़ को बूथ तक पहुंचाने वाले संगठन का है। 2027 का चुनाव यूकेडी के लिए राजनीतिक अस्तित्व और पुनर्स्थापना का बड़ा अवसर माना जा सकता है। राज्य गठन के आंदोलन से निकली पार्टी लंबे समय से विधानसभा में अपनी पुरानी राजनीतिक जमीन तलाश रही है। इस बार पार्टी जिस तरह 70 सीटों पर अकेले उतरने की बात कर रही है, उससे उसके सामने संभावनाओं के साथ जोखिम भी बढ़ गया है। दूसरी ओर, भाजपा सत्ता में वापसी की रणनीति पर काम कर रही है और कांग्रेस भी सत्ता परिवर्तन की तैयारी में है। ऐसे में यूकेडी को दोनों बड़े दलों के बीच अपनी अलग राजनीतिक जगह बनानी होगी। उत्तराखंड बचाओ यात्रा इसलिए सिर्फ एक राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि यूकेडी के लिए अपनी ताकत, संगठन और संभावित प्रत्याशियों की परीक्षा भी बन सकती है। अब देखना यह होगा कि यात्रा खत्म होने के बाद पार्टी के पास सिर्फ तस्वीरों में दिखाई देने वाली भीड़ होगी या फिर विधानसभा क्षेत्रों में खड़ा होने वाला ऐसा संगठन भी, जो 2027 के चुनावी मैदान में मुकाबला कर सके। क्योंकि चुनाव में नारा भीड़ जुटाता है, लेकिन बूथ ही वोट जुटाता है।

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