रविवार, 2 अगस्त 2026

नैरेटिव का ‘जहर’ और वोट की ‘जंग’

हैट्रिक की जिद बनाम बदलाव की जंग भाजपा का नैरेटिव सेट करने पर जोर कांग्रेस को दिख रही वापसी की राह राजनीतिक मोहरों से बिगड़ेगा समीकरण देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 अभी दूर है, लेकिन राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने चुनावी शतरंज बिछानी शुरू कर दी है। पिछले चुनावों में जहां मुकाबला विकास बनाम वादों तक सीमित था, वहीं इस बार लड़ाई केवल सीटों की नहीं, बल्कि जनता के मन में नैरेटिव स्थापित करने की है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि 2027 का चुनाव उत्तराखंड की राजनीति का सबसे अलग और सबसे आक्रामक चुनाव साबित हो सकता है। भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का इतिहास रचने की तैयारी में है, जबकि कांग्रेस इसे सत्ता परिवर्तन का सबसे बड़ा अवसर मान रही है। दूसरी ओर क्षेत्रीय दल और नए राजनीतिक समूह भी युवाओं और स्थानीय मुद्दों के सहारे अपनी जगह बनाने की कोशिश में हैं। भाजपा का पूरा चुनावी अभियान अब तक के विकास कार्यों, सड़क, रेल, चारधाम आल वेदर रोड, रोपवे, निवेश, पर्यटन, समान नागरिक संहिता और डबल इंजन सरकार की अवधारणा के इर्द-गिर्द रहने की संभावना है। पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि उत्तराखंड को राजनीतिक स्थिरता और तेज विकास केवल भाजपा ही दे सकती है। हालांकि भाजपा के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी, बेरोजगारी, पलायन, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं पर उठे सवाल, महंगाई और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याएं विपक्ष को लगातार मुद्दे दे रही हैं। ऐसे में पार्टी संगठन और सरकार दोनों को एंटी-इनकंबेंसी की धार को कुंद करना होगा। कांग्रेस बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और किसानों के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी का प्रयास है कि सत्ता विरोधी भावना को संगठित जनसमर्थन में बदला जाए। लेकिन कांग्रेस की सबसे बड़ी परीक्षा उसके अपने संगठन की मजबूती होगी। यदि गुटबाजी और नेतृत्व के सवाल हावी रहे, तो जनता के मुद्दे भी चुनावी लाभ में नहीं बदल पाएंगे। चुनाव से पहले संगठनात्मक एकजुटता कांग्रेस की सबसे बड़ी राजनीतिक आवश्यकता होगी। उत्तराखंड में बड़ी संख्या में युवा मतदाता पहली बार मतदान करेंगे। रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, स्टार्टअप, स्वरोजगार, डिजिटल अवसर और शिक्षा उनके प्रमुख मुद्दे हैं। पिछले कुछ वर्षों में भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक जैसे मामलों ने युवाओं के बीच व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए। अब सभी दल युवाओं को अपने पक्ष में करने के लिए अलग-अलग रणनीति बना रहे हैं। सोशल मीडिया इस बार चुनाव प्रचार का सबसे प्रभावी हथियार बन सकता है। महिला सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वरोजगार, स्वयं सहायता समूह, गैस, पानी और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दे चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों महिलाओं के बीच अपनी पैठ मजबूत करने की तैयारी में हैं। उत्तराखंड की राजनीति में क्षेत्रीय संतुलन हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। पलायन, खाली होते गांव, सड़क, स्वास्थ्य सुविधाएं और शिक्षा जैसे मुद्दे पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार चर्चा का विषय हैं, जबकि मैदानी क्षेत्रों में शहरीकरण, रोजगार, उद्योग और बुनियादी सुविधाएं प्रमुख चुनावी मुद्दे हैं। जो दल इन दोनों क्षेत्रों की अपेक्षाओं में संतुलन स्थापित करेगा, उसे चुनावी लाभ मिल सकता है। 2027 का चुनाव केवल जनसभाओं का नहीं होगा। फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हाट्सऐप पर नैरेटिव बनाने की प्रतिस्पर्धा पहले ही शुरू हो चुकी है। वीडियो, फैक्ट-चेक, आरोप-प्रत्यारोप और त्वरित राजनीतिक प्रतिक्रियाएं चुनाव प्रचार की दिशा तय करेंगी। डिजिटल अभियान अब किसी भी दल की चुनावी रणनीति का केंद्रीय हिस्सा बन चुका है। क्षेत्रीय दल, निर्दलीय उम्मीदवार और नए राजनीतिक मंच भले सत्ता की सीधी दौड़ में न दिखें, लेकिन कई सीटों पर वे परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबले का लाभ किसे मिलेगा, यह स्थानीय समीकरण तय करेंगे। 2027 का चुनाव केवल सरकार बदलने या बचाने का चुनाव नहीं होगा। यह तय करेगा कि उत्तराखंड का राजनीतिक विमर्श विकास, रोजगार, पलायन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहता है या फिर पहचान, भावनात्मक मुद्दों और चुनावी नैरेटिव के इर्द-गिर्द घूमता है। उत्तराखंड की चुनावी बिसात बिछ चुकी है। भाजपा अपने शासन और विकास माडल पर भरोसा जता रही है, जबकि कांग्रेस जनसरोकारों और सत्ता विरोधी माहौल को राजनीतिक ऊर्जा में बदलने की कोशिश कर रही है। लेकिन अंतिम फैसला जनता करेगीकृऔर वह केवल नारों से नहीं, बल्कि यह देखकर कि किस दल के पास आने वाले पांच वर्षों के लिए सबसे विश्वसनीय दृष्टि, मजबूत संगठन और व्यवहारिक रोडमैप है।

कोई टिप्पणी नहीं: