रविवार, 23 अगस्त 2026
एसआईआर पर ‘सियासी’ टकराव
बीएलओ और बीएलए-2 को धमकाने का आरोप
चुनाव आयोग से मिला भाजपा का प्रतिनिधिमंडल
प्रक्रिया बाधित करने वालों पर कार्रवाई की मांग
देहरादून। उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सियासी टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। भाजपा ने कांग्रेस पर एसआईआर प्रक्रिया को प्रभावित करने और बूथ स्तर पर काम कर रहे बीएलओ तथा पार्टी के बीएलए-2 को कथित रूप से धमकाने का आरोप लगाया है। भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर मामले में हस्तक्षेप की मांग करते हुए एसआईआर की प्रक्रिया बाधित करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। भाजपा का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से बूथ स्तर पर भ्रम और दबाव का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। पार्टी का कहना है कि निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रतिनिधियों को स्वतंत्र रूप से अपना काम करने दिया जाना चाहिए।
भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग के समक्ष अपनी शिकायत रखते हुए कहा कि एसआईआरजैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में किसी भी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। पार्टी ने आयोग से मांग की कि बीएलओ और बीएलए-2 के काम में बाधा डालने, उन्हें धमकाने अथवा दबाव बनाने की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। भाजपा नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची का शुद्ध और पारदर्शी होना चुनाव की विश्वसनीयता के लिए बेहद जरूरी है। यदि बूथ स्तर पर ही प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास होगा तो इसका असर पूरी चुनावी प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
दूसरी ओर कांग्रेस एसआईआर को लेकर पहले से ही निर्वाचन आयोग और भाजपा पर सवाल उठाती रही है। कांग्रेस का आरोप है कि पुनरीक्षण की प्रक्रिया में यदि वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित होते हैं तो इसका सीधा असर मताधिकार पर पड़ेगा। पार्टी ने बूथ स्तर पर निगरानी और अपने प्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका की बात कही है। यही वजह है कि एसआईआर अब महज प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रह गई है। मतदाता सूची को लेकर दोनों प्रमुख राजनीतिक दल आमने-सामने हैं और हर पक्ष दूसरे पर चुनावी लाभ के लिए प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगा रहा है।
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 में प्रस्तावित हैं। ऐसे में मतदाता सूची का पुनरीक्षण राजनीतिक दलों के लिए बेहद संवेदनशील मुद्दा बन गया है। चुनाव से पहले मतदाता सूची में नाम जुड़ने, हटने या संशोधन की प्रक्रिया पर राजनीतिक दलों की नजर स्वाभाविक रूप से बनी हुई है। भाजपा का कहना है कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और विश्वसनीय बनाना है। पार्टी ने आयोग से आग्रह किया कि प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा को गंभीरता से लिया जाए और कानून के तहत कार्रवाई हो। वहीं कांग्रेस की ओर से लगातार यह सवाल उठाया जा रहा है कि कहीं पुनरीक्षण की प्रक्रिया के नाम पर वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित न हों। ऐसे में आने वाले दिनों में एसआईआर को लेकर दोनों दलों की सियासी बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।
एसआईआर को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच बढ़ते आरोप-प्रत्यारोप ने निर्वाचन आयोग के सामने भी चुनौती बढ़ा दी है। आयोग के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि पूरी प्रक्रिया राजनीतिक विवाद से अलग, पारदर्शी और नियमों के मुताबिक पूरी हो। मतदाता सूची में एक भी वास्तविक मतदाता का नाम गलत तरीके से हटना गंभीर विषय है, वहीं अपात्र नामों की मौजूदगी भी चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकती है। इसलिए राजनीतिक आरोपों के बीच असली कसौटी प्रक्रिया की पारदर्शिता और शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण की होगी।
फिलहाल एसआईआर उत्तराखंड में चुनावी राजनीति का नया मोर्चा बन चुका है। भाजपा आयोग के दरवाजे पर पहुंचकर कांग्रेस पर प्रक्रिया बाधित करने का आरोप लगा रही है, जबकि कांग्रेस पहले से ही एसआईआर को लेकर सवाल उठा रही है। 2027 के चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर छिड़ी यह सियासी जंग आने वाले दिनों में और धार पकड़ सकती है।
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