शुक्रवार, 29 मई 2026
काफिले की ‘रफ्तार’ पर सियासी ‘रार’
---जौलीग्रांट एयरपोर्ट से पार्टी मुख्यालय तक वाहनों की लंबी कतार से कई जगह जाम जैसे हालात
---विपक्ष ने पीएम मोदी की ऊर्जा बचत अपील का हवाला देकर भाजपा को घेरा
---भाजपा बोली कार्यकर्ताओं का उत्साह लोकतंत्र की ताकत, विपक्ष कर रहा अनावश्यक राजनीति
---सोशल मीडिया पर भी रोड शो और वाहनों के काफिले को लेकर छिड़ी बहस
देहरादून। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के उत्तराखंड दौरे के दौरान जौलीग्रांट एयरपोर्ट से देहरादून स्थित पार्टी मुख्यालय तक निकले वाहनों के लंबे काफिले ने राजनीतिक बहस छेड़ दी है। एक ओर भाजपा इसे कार्यकर्ताओं के उत्साह और संगठन की ताकत बता रही है, वहीं विपक्ष ने इसे फिजूल शक्ति प्रदर्शन बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण की अपील से जोड़कर सवाल उठाए हैं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्वागत के लिए एयरपोर्ट से लेकर शहर तक बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता वाहनों के साथ पहुंचे। कई किलोमीटर तक चले काफिले के कारण रास्ते में ट्रैफिक की रफ्तार धीमी पड़ गई। आम लोगों को जगह-जगह जाम और असुविधा का सामना करना पड़ा। दफ्तर जाने वाले लोग, स्कूली वाहन और रोजमर्रा के काम से निकलने वाले नागरिक लंबे समय तक यातायात में फंसे रहे।
प्रदेश कांग्रेस नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा की दिखावटी राजनीति करार दिया। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार ऊर्जा बचत, ईंधन बचाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने की अपील करते हैं, लेकिन उनकी ही पार्टी के नेता सैकड़ों गाड़ियों के काफिले निकालकर विपरीत संदेश दे रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जिस राज्य में आम आदमी महंगे पेट्रोल-डीजल से परेशान है, वहां राजनीतिक रोड शो के नाम पर ईंधन की बर्बादी जनता को खटक रही है। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि सत्ता का प्रभाव दिखाने के लिए आम जनता की सुविधा को नजरअंदाज किया गया।
भाजपा नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया है। पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का उत्तराखंड आगमन कार्यकर्ताओं के लिए उत्साह का विषय था और बड़ी संख्या में लोगों का स्वागत के लिए पहुंचना स्वाभाविक है। भाजपा नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों के कार्यक्रम और स्वागत यात्राएं नई बात नहीं हैं। पार्टी ने यह भी कहा कि यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने आवश्यक इंतजाम किए थे और विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है।
काफिले को लेकर आम नागरिकों में भी मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे बड़े नेताओं के स्वागत की परंपरा बताया, जबकि कई लोगों ने सोशल मीडिया पर ट्रैफिक अव्यवस्था और ईंधन की बर्बादी को लेकर नाराजगी जाहिर की। देहरादून निवासी एक व्यापारी ने कहा कि अगर ऊर्जा बचाने और प्रदूषण कम करने की बात होती है तो नेताओं को भी उदाहरण पेश करना चाहिए। वहीं एक भाजपा समर्थक ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत करना कार्यकर्ताओं का उत्साह है, इसे गलत तरीके से नहीं देखना चाहिए।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि विधानसभा चुनाव 2027 से पहले ऐसे आयोजन शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बनेंगे। भाजपा जहां बड़े जनसमर्थन को अपनी ताकत के रूप में पेश करेगी, वहीं विपक्ष इन्हें जनता की समस्याओं और वीआईपी संस्कृति से जोड़कर घेरने की कोशिश करेगा। फिलहाल देहरादून का यह रोड शो केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि इसने ऊर्जा बचत बनाम राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन की बहस को भी तेज कर दिया है।
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