बुधवार, 27 मई 2026

हाईवे ‘चमक’ रहे और गांव हैं ‘बदहाल’

उत्तराखंड में विस चुनाव 2027 के संभावित मुद्दे -भाग-14 -सड़क पर सियासत की रफ्तार 2027 में गड्ढों से लेकर हाईवे तक हो सकता हैं चुनावी संग्राम ---चारधाम की रहें हुई सुगम, गांवों में हिचकोले खा रही है जिंदगीं ---सड़कों की गुणवत्ता, लैंडस्लाइड व ग्रामीण कनेक्टिविटी का दर्द ---अधूरी सड़कों और घटिया निर्माण को लेकर लोगों में है असंतोष देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 के लिए जैसे-जैसे राजनीतिक दल अपनी जमीन मजबूत कर रहे हैं, वैसे-वैसे यह साफ होता जा रहा है कि इस बार सड़क सूबे का सबसे ज्वलंत चुनावी मुद्दा बनने जा रही है। एक तरफ जहां सत्ताधारी भाजपा सरकार अपनी डबल इंजन रफ्तार और चारधाम कनेक्टिविटी के दम पर दोबारा सत्ता के सिंहासन तक पहुंचने की रणनीति बना रही है, वहीं कांग्रेस ने सड़कों की गुणवत्ता, लैंडस्लाइड और ग्रामीण कनेक्टिविटी को लेकर सरकार को घेरने का पूरा मन बना लिया है। राज्य के पर्वतीय इलाकों में हालात यह हैं कि कई गांव आज भी बरसात में मुख्य सड़कों से कट जाते हैं। जगह-जगह भूस्खलन और दरकती सड़कों ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऐसे में विपक्ष सरकार पर हाईवे की चमक और गांवों की बदहाली का आरोप लगाकर जनता के बीच मुद्दा बनाने की तैयारी कर रहा है। वहीं सरकार दावा कर रही है कि उत्तराखंड में अब तक का सबसे बड़ा रोड इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, जिसमें देहरादून-हरिद्वार कारिडोर, )षिकेश बाईपास और चारधाम परियोजनाएं शामिल हैं। 2027 से पहले सड़कों पर राजनीति इसलिए भी तेज होती दिख रही है क्योंकि पहाड़ में विकास का सबसे सीधा पैमाना आज भी सड़क पहुंची या नहीं माना जाता है। गांवों में सड़क बनने का मतलब अस्पताल, स्कूल, बाजार और रोजगार से जुड़ाव है। लेकिन कई इलाकों में अधूरी सड़कों और घटिया निर्माण को लेकर लोगों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है। सोशल मीडिया पर भी खराब सड़कों और सरकारी लापरवाही को लेकर लोगों की नाराजगी खुलकर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा इस चुनाव में बुनियादी ढांचे, विशेषकर सड़कों के कायाकल्प को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। सरकार के रणनीतिकारों का मानना है कि )षिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के साथ-साथ )षिकेश-बद्रीनाथ-केदारनाथ आल वेदर रोड ने राज्य में पर्यटन और तीर्थयात्रा की तस्वीर बदली है। चीन सीमा से सटे पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी जैसे सीमांत जिलों तक सड़कों के सुदृढ़ीकरण को राष्ट्रवाद और सुरक्षा से जोड़कर पेश किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि सुगम सड़कों के कारण चारधाम यात्रा में रिकार्ड श्र(ालु पहुंच रहे हैं, जिससे स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिला है। दूसरी ओर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस नैरेटिव को काटने के लिए जमीनी मुद्दों को उठाना शुरू कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार केवल मुख्य राजमार्गों की चमक दिखा रही है, जबकि राज्य के अंदरूनी हिस्सों की स्थिति जस की तस है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि 2027 में भाजपा विकास और बड़े रोड प्रोजेक्ट्स को चुनावी चेहरा बनाएगी, जबकि कांग्रेस और क्षेत्रीय दल गांवों की जमीनी समस्याओं, पलायन और खराब सड़क व्यवस्था को मुद्दा बनाकर सरकार को घेरेंगे। खासकर पर्वतीय सीटों पर सड़क, स्वास्थ्य और पलायन एक-दूसरे से जुड़े बड़े चुनावी प्रश्न बन सकते हैं।

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