रविवार, 21 जून 2026
युवाओं का ‘गुस्सा’ बनाम सरकार की ‘साख’
बेरोजगारों के मुद्दे पर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में
भाजपा के लिए चुनाव से पहले युवाओं के भरोसे की ‘जंग’
कांग्रेस ने खोला मोर्चा, आप और यूकेडी भी हुई आक्रामक
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राज्य में एक बार फिर पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस ने इसे सरकार की सबसे बड़ी प्रशासनिक विफलता बताते हुए प्रदेशभर में आंदोलन की रणनीति तैयार कर ली है। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी और उत्तराखंड क्रांति दल भी बेरोजगार युवाओं के साथ खड़े होकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। माना जा रहा है कि आगामी चुनाव में रोजगार और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकती है।
उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों के दौरान विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों ने लाखों युवाओं के भविष्य पर सवाल खड़े किए। स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा, सचिवालय सुरक्षा, वन दरोगा सहित कई परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोपों ने प्रदेश की राजनीति को झकझोर दिया था। हजारों अभ्यर्थियों ने सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया और सरकार को कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं।
इसी मुद्दे को कांग्रेस अब चुनावी हथियार बना रही है। प्रदेश कांग्रेस का कहना है कि सरकार युवाओं को रोजगार देने में असफल रही और जो भर्तियां निकाली गईं, उनमें भी भ्रष्टाचार और पेपर लीक ने युवाओं का विश्वास तोड़ दिया। कांग्रेस प्रदेशभर में युवा न्याय अभियान चलाने की तैयारी कर रही है, जिसमें बेरोजगार युवाओं के साथ संवाद और जनसभाएं आयोजित की जाएंगी।
आम आदमी पार्टी भी इस मुद्दे पर लगातार सरकार को घेर रही है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा सरकार ने युवाओं को रोजगार के नाम पर केवल आश्वासन दिए। आप का कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और जवाबदेह होती तो पेपर लीक जैसे मामले सामने नहीं आते। पार्टी युवाओं के बीच रोजगार गारंटी और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था को प्रमुख चुनावी वादा बनाने की तैयारी में है।
उत्तराखंड क्रांति दल ने भी इस मुद्दे को राज्य के युवाओं के सम्मान से जोड़ दिया है। यूकेडी का कहना है कि प्रदेश बनने का उद्देश्य स्थानीय युवाओं को रोजगार देना था, लेकिन आज वही युवा भर्ती घोटालों और बेरोजगारी से सबसे अधिक प्रभावित हैं। पार्टी इसे राज्य की अस्मिता और युवाओं के भविष्य का सवाल बताकर गांव-गांव तक ले जाने की रणनीति बना रही है।
भाजपा सरकार का कहना है कि पेपर लीक मामलों में पहली बार सख्त कार्रवाई की गई। आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, परीक्षाएं निरस्त की गईं और दोषियों के खिलाफ कठोर कानून लागू किया गया। सरकार यह भी दावा कर रही है कि नई भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाई गई है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तकनीकी निगरानी मजबूत की गई है। भाजपा चुनावी मंचों पर यह संदेश देने की तैयारी में है कि पिछली घटनाओं पर कार्रवाई करके सरकार ने युवाओं का भरोसा बहाल करने का प्रयास किया है।
उत्तराखंड में लगभग 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं की संख्या चुनावी समीकरणों में निर्णायक मानी जाती है। बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाएं और सरकारी नौकरियां हमेशा से इस वर्ग के प्रमुख मुद्दे रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विपक्ष इस मुद्दे को लगातार जीवित रखता है तो यह चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस, आप और यूकेडी तीनों अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के बावजूद पेपर लीक और बेरोजगारी के मुद्दे पर लगभग एक ही सुर में सरकार को घेर रहे हैं। हालांकि तीनों दलों की चुनावी रणनीति अलग है, लेकिन लक्ष्य एक ही हैकृयुवा मतदाताओं का विश्वास जीतना।
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