शनिवार, 27 जून 2026

देवभूमि में ‘धर्मयुद्ध’ की आहट

कर्णप्रयाग से पांवटा साहिब तक सुलग रही निहंग विवाद की चिंगारी निहंगों के अल्टीमेटम, बैकफुट पर सरकार, सौहार्द पर मंडराया संकट उत्तराखंड में निहंग विवाद बन सकता है प्रदेश सरकार के गले की फांस दो सूत्रीय मांगों पर सरकार को दिया अल्टीमेटम, देवभूमि में बढ़ी सतर्कता, प्रदेश सरकार के सामने कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द की चुनौती देहरादून। कर्णप्रयाग से शुरू हुआ निहंगों का विवाद अब रुद्रप्रयाग होते हुए देहरादून के निकट पांवटा साहिब तक पहुंच गया है। निहंगों के एक समूह द्वारा उत्तराखंड सरकार को दो सूत्रीय मांगों को लेकर दिए गए अल्टीमेटम ने सरकार, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। देवभूमि में धार्मिक आस्था, कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती अब पहले से कहीं अधिक गंभीर हो गई है। सूत्रों के अनुसार निहंगों ने सरकार के समक्ष दो प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें कथित रूप से गिरफ्तार लोगों की रिहाई और उनके धार्मिक अधिकारों और संबंधित विवादों पर सरकार की ओर से स्पष्ट कार्रवाई की मांग शामिल है। निहंगों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। बता दें कि कुछ दिन पहले कर्णप्रयाग और नगरासू क्षेत्र में निहंगों की गतिविधियों को लेकर स्थानीय स्तर पर तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई थी। इसके बाद प्रशासन को अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा और कई दौर की वार्ताओं के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया। हालांकि प्रशासन ने दावा किया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन इसके बाद निहंगों का फिर पांवटा साहिब के आसपास सक्रिय होना यह संकेत दे रहा है कि मामला अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। देहरादून से सटे पांवटा साहिब क्षेत्र में निहंगों की मौजूदगी और सरकार को दिए गए अल्टीमेटम ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है। सुरक्षा एजेंसियां इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि कहीं यह विवाद किसी बड़े आंदोलन का रूप न ले ले। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार सीमावर्ती क्षेत्रों में पुलिस को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं और खुफिया एजेंसियां भी पूरे मामले पर नजर रख रही हैं। उत्तराखंड सरकार के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि प्रदेश में शांति और सामाजिक सद्भाव से किसी को खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। सरकार का रुख साफ है कि धार्मिक आस्था का सम्मान किया जाएगा, लेकिन कानून को हाथ में लेने या दबाव की राजनीति की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी। नगरासू, कर्णप्रयाग और रुद्रप्रयाग क्षेत्र के स्थानीय लोगों में इस घटनाक्रम को लेकर चिंता का माहौल है। लोगों का कहना है कि देवभूमि की पहचान शांति और भाईचारे से है और किसी भी प्रकार के तनावपूर्ण माहौल का असर सामाजिक सद्भाव और पर्यटन पर पड़ सकता है। स्थानीय व्यापारियों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से मामले का जल्द और शांतिपूर्ण समाधान निकालने की मांग की है। विपक्षी दलों ने भी इस मामले को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते स्थिति को प्रभावी ढंग से संभाला गया होता तो मामला एक जिले से दूसरे जिले तक नहीं पहुंचता। हालांकि विपक्ष ने भी प्रदेश में शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार के टकराव से बचने की अपील की है। निहंगों के अल्टीमेटम के बाद अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। क्या सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालेगी या कानून के दायरे में सख्त कदम उठाएगी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। लेकिन इतना तय है कि कर्णप्रयाग से शुरू हुआ यह विवाद अब केवल एक स्थानीय मसला नहीं रह गया है। यह उत्तराखंड सरकार के लिए कानून-व्यवस्था, सामाजिक सौहार्द और राजनीतिक प्रबंधन की एक बड़ी परीक्षा बन चुका है। निहंगों द्वारा उत्तराखंड सरकार को दिए गए अल्टीमेटम के बीच पुलिस-प्रशासन और सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रशासन का कहना है कि संवाद के जरिए मामले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा लिया गया है और प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है। निहंगों के अल्टीमेटम के बीच राज्य सरकार की सबसे बड़ी चुनौती कानून व्यवस्था बनाए रखने और धार्मिक सौहार्द को कायम रखने की है। प्रशासन और पुलिस का दावा है कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट पर हैं। कानून से ऊपर कोई नहीं: सीएम धामी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रदेश में शांति, कानून व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव से किसी को भी खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और यहां की शांति और भाईचारा सर्वाेपरि है। सरकार सभी धर्मों और आस्थाओं का सम्मान करती है, लेकिन कानून से ऊपर कोई नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को संवेदनशीलता और सतर्कता के साथ स्थिति संभालने तथा किसी भी प्रकार की अफवाहों पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

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