सोमवार, 8 जून 2026
दिल्ली में गिरफ्तारी, उत्तराखंड में सियासी घमासान
---धामी ने की हस्तक्षेप की पहल तो कांग्रेस ने खोला मोर्चा
---मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली की सीएम से की बात
---कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने उठाए जांच की निष्पक्षता पर सवाल
देहरादून। दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड में उत्तराखंड मूल के युवक केशव नेगी की गिरफ्तारी को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। एक ओर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले में सक्रियता दिखाते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से बातचीत कर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का आग्रह किया है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है।
मुख्यमंत्री धामी ने दिल्ली की मुख्यमंत्री से फोन पर बातचीत कर यह स्पष्ट किया कि हादसे में दोषी चाहे कोई भी हो, उसे सजा मिलनी चाहिए, लेकिन किसी निर्दाेष को बिना पर्याप्त तथ्यों के कार्रवाई का सामना न करना पड़े। धामी की इस पहल को उत्तराखंड के लोगों के हितों की रक्षा के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
बता दें कि दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में हुए भीषण अग्निकांड की जांच अब राजनीतिक रंग लेने लगी है। इस हादसे में 22 लोगों की मौत के बाद दिल्ली पुलिस ने होटल के शेफ के रूप में कार्यरत उत्तराखंड मूल के केशव नेगी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद उत्तराखंड में राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है कि आखिर एक कर्मचारी को मुख्य आरोपी बनाना कितना उचित है, जबकि होटल में सुरक्षा मानकों के उल्लंघन और प्रबंधन की जिम्मेदारी जैसे कई बड़े सवाल अभी भी जांच के दायरे में हैं। दिल्ली पुलिस का दावा है कि प्रारंभिक जांच में शेफ की कथित लापरवाही की भूमिका सामने आई है। वहीं होटल मालिक और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है तथा जांच जारी है।
मामले पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर होटल के मालिकों और सुरक्षा मानकों की जिम्मेदारी तय किए बिना एक कर्मचारी को मुख्य आरोपी के रूप में प्रस्तुत करना कितना उचित है। कांग्रेस का आरोप है कि जांच की दिशा को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उत्तराखंड के एक युवक को जल्दबाजी में आरोपी बनाकर पूरे मामले की जिम्मेदारी उस पर डालने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। पार्टी ने जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता और राजनीतिक स्तर पर भी मामला उठाने के संकेत दिए हैं।
केशव नेगी की गिरफ्तारी के बाद उनके पैतृक क्षेत्र में भी चिंता और नाराजगी का माहौल देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और वास्तविक जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। कई सामाजिक संगठनों ने भी मांग की है कि जांच केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित न रहे, बल्कि होटल प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारियों की भी गहन पड़ताल की जाए।
दिल्ली अग्निकांड में हुई जनहानि ने पूरे देश को झकझोर दिया है। ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि हादसे के लिए वास्तविक जिम्मेदार कौन है। मुख्यमंत्री धामी की सक्रियता और कांग्रेस के आक्रामक रुख ने इस मामले को राजनीतिक विमर्श का विषय जरूर बना दिया है, लेकिन आम लोगों की प्राथमिक चिंता न्याय और सच्चाई सामने आने की है। फिलहाल उत्तराखंड की निगाहें जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच पारदर्शी और तथ्य आधारित रही तो विवाद शांत हो सकता है, लेकिन यदि किसी भी स्तर पर पक्षपात या जल्दबाजी की आशंका बनी रही तो यह मामला उत्तराखंड की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
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