रविवार, 7 जून 2026
उत्तराखंड में समय से पहले ‘महासंग्राम’
विधानसभा चुनाव अभी दूर, लेकिन दिल्ली के दिग्गजों ने पहाड़ में डाला डेरा
---बीजेपी के चक्रव्यूह को भेदने मैदान में उतरे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी
---पहाड़ की ढलान और मैदान की बिसात पर सीधी नजर, भाजपा सकते में दिखी
---भगवा खेमे की ताबड़तोड़ सक्रियता के बीच राहुल गांधी की एंट्री होगी दिलचस्प
---भाजपा के मजबूत चुनावी अभियान के बीच कांग्रेस का उत्तराखंड में चुनावी बिगुल
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में इस समय भाजपा और कांग्रेस दोनों चुनावी मोड में दिखाई दे रही हैं। हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने भी राज्य में लगातार दौरे कर संगठन को सक्रिय किया है। ऐसे में राहुल गांधी का दौरा स्पष्ट संकेत देता है कि 2027 का चुनावी संग्राम समय से पहले शुरू हो चुका है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाधी का दो दिवसीय उत्तराखंड दौरा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विधानसभा चुनाव 2027 के लिए कांग्रेस के चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के लगातार तीसरे कार्यकाल की तैयारी के बीच कांग्रेस के लिए यह चुनाव अस्तित्व की लड़ाई जैसा है। 2017 और 2022 में हार का सामना कर चुकी कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एकजुट करना और जनता के बीच भरोसा वापस हासिल करना है। इसी कारण राहुल गांधी का यह दौरा जनसभा से अधिक संगठनात्मक मजबूती पर केंद्रित दिखाई दे रहा है।
कांग्रेस ने राहुल गांधी के कार्यक्रमों को रणनीतिक रूप से तैयार किया है। अल्मोड़ा में जनसभा के माध्यम से कुमाऊं क्षेत्र को साधने की कोशिश है, जबकि पौड़ी में पूर्व सैनिकों से संवाद के जरिए सेना और अग्निपथ योजना से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक विमर्श में लाने का प्रयास किया जा रहा है। अगले दिन देहरादून में पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने का संदेश दिया जाएगा।
कांग्रेस इस दौरे के माध्यम से महंगाई, बेरोजगारी, पलायन, भ्रष्टाचार, महिलाओं की सुरक्षा और चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं जैसे मुद्दों को केंद्र में लाना चाहती है। वहीं भाजपा इसे राहुल गांधी की पारंपरिक राजनीतिक यात्रा बताते हुए ज्यादा महत्व नहीं दे रही है। लेकिन राजनीतिक जानकार मानते हैं कि राहुल गांधी की मौजूदगी से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार होना तय है।
वास्तव में यह दौरा केवल दो दिनों का कार्यक्रम नहीं, बल्कि उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की दिशा तय करने वाला राजनीतिक संदेश है। कांग्रेस पहाड़ की नाराजगी, युवाओं की बेचौनी और संगठन की नई संरचना के सहारे सत्ता वापसी का सपना देख रही है, जबकि भाजपा अपने विकास और स्थिरता के एजेंडे पर जनता का समर्थन बनाए रखने की कोशिश में जुटी है। ऐसे में राहुल गांधी का उत्तराखंड आगमन चुनावी शतरंज की नई चाल के रूप में देखा जा रहा है।
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