मंगलवार, 28 जुलाई 2026
राष्ट्रवाद की ‘नई पिच’ पर भाजपा
भाजपा का स्वतंत्रता दिवस से पहले गांव-गांव पहुंचेगा अभियान
देशभक्ति के संदेश के साथ भाजपा की संगठन विस्तार की रणनीति
भाजपा बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की है तैयारी में
देहरादून। स्वतंत्रता दिवस से पहले भाजपा उत्तराखंड में एक बार फिर हर घर तिरंगा अभियान को व्यापक जनअभियान का स्वरूप देने जा रही है। पार्टी का दावा है कि इस अभियान का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक में राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करना और आजादी के अमृतकाल के संकल्पों को जन-जन तक पहुंचाना है। वहीं, राजनीतिक जानकार इसे केवल राष्ट्रीय अभियान नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने की भाजपा की रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, राज्य के सभी जिलों, मंडलों और बूथों पर कार्यकर्ताओं को अभियान की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। घर-घर तिरंगा पहुंचाने के साथ-साथ तिरंगे के सम्मान, स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों और भारत की उपलब्धियों पर जनसंपर्क कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी वार्डों तक प्रभात फेरियां, तिरंगा यात्राएं और युवा सम्मेलन आयोजित करने की भी तैयारी है। भाजपा नेताओं का कहना है कि तिरंगा किसी दल का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की पहचान है। इसलिए अभियान को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि प्रत्येक नागरिक को अपने घर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रेरित करना ही इसका मूल उद्देश्य है।
हालांकि विपक्ष इस अभियान को अलग नजरिये से देख रहा है। कांग्रेस सहित विपक्षी दलों का आरोप है कि भाजपा राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रवाद को चुनावी राजनीति से जोड़ने का प्रयास करती रही है। उनका कहना है कि देशभक्ति किसी अभियान की मोहताज नहीं होती, बल्कि सरकार को महंगाई, बेरोजगारी और पलायन जैसे मुद्दों पर भी समान गंभीरता से काम करना चाहिए। उत्तराखंड जैसे सैन्य परंपरा वाले राज्य में हर घर तिरंगा अभियान का विशेष महत्व माना जा रहा है। राज्य के हजारों परिवारों का सेना से सीधा जुड़ाव रहा है और सीमाओं की रक्षा में उत्तराखंड के सैनिकों का योगदान देशभर में सम्मान के साथ याद किया जाता है। ऐसे में भाजपा इस अभियान के माध्यम से पूर्व सैनिकों, युवाओं और छात्रों को भी जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा लंबे समय से सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय गौरव के मुद्दों को अपनी राजनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा बनाती रही है। अयोध्या में राम मंदिर, अनुच्छेद 370, समान नागरिक संहिता और राष्ट्रीय पर्वों से जुड़े अभियानों के बाद अब हर घर तिरंगा भी उसी व्यापक राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है। उत्तराखंड में जहां अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं, वहां इस तरह के जनसंपर्क अभियान संगठन को कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय बनाए रखने में भी मदद करेंगे।
भाजपा के लिए यह अभियान केवल ध्वजारोहण तक सीमित नहीं है। इसके जरिए पार्टी बूथ स्तर पर अपनी सक्रियता बढ़ाने, नए स्वयंसेवकों को जोड़ने और राष्ट्रीय मुद्दों के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंच बनाने का प्रयास करेगी। दूसरी ओर विपक्ष की चुनौती यह होगी कि वह इस अभियान का विरोध किए बिना अपनी राजनीतिक बात जनता तक कैसे पहुंचाए। स्पष्ट है कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शुरू होने वाला हर घर तिरंगा अभियान इस बार केवल राष्ट्रीय उत्सव नहीं रहेगा, बल्कि उत्तराखंड की राजनीति में भी इसकी गूंज सुनाई देगी। जहां भाजपा इसे राष्ट्रभक्ति का महाअभियान बता रही है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा मान रहा है। अंतिम फैसला हमेशा की तरह जनता को ही करना है कि वह इसे राष्ट्रीय भावना का उत्सव मानती है या चुनावी माहौल में राजनीतिक संदेश का विस्तार।
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