शनिवार, 11 जुलाई 2026
कांग्रेस के ‘दौरों’ पर भाजपा की ‘घेराबंदी’
उत्तराखंड में अब हर दौरा बनेगा राजनीतिक रणक्षेत्र
कांग्रेस के उत्तराखंड दौरों पर भाजपा का पलटवार तेज
बड़े नेताओं की आवाजाही पर सत्ता पक्ष कर रहा हमला
देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 की आहट तेज होते ही राजनीतिक तापमान भी चढ़ने लगा है। कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं के लगातार उत्तराखंड दौरे अब भाजपा के निशाने पर हैं। मुख्यमंत्री, मंत्रियों और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस के अभियान को लेकर आक्रामक रुख अपनाते हुए सवालों की बौछार शुरू कर दी है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस के शीर्ष नेता उत्तराखंड में राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए लगातार दौरे कर रहे हैं, लेकिन पार्टी पहले अपने भीतर के मतभेद और नेतृत्व के सवालों का समाधान करे। सत्ता पक्ष का दावा है कि राज्य की जनता केवल भाषण सुनने नहीं, बल्कि काम का हिसाब देखने के मूड में है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि चुनावी मौसम नजदीक आते ही कांग्रेस को उत्तराखंड की याद आना राजनीतिक अवसरवाद को दर्शाता है। उनका तर्क है कि राज्य के विकास, निवेश, सड़क, पर्यटन और बुनियादी ढांचे के मुद्दों पर कांग्रेस के पास कोई ठोस वैकल्पिक रोडमैप नहीं है। भाजपा के कई नेताओं ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय नेताओं की रैलियां भी तभी प्रभावी होती हैं, जब प्रदेश संगठन मजबूत हो। उनके अनुसार, कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती भाजपा नहीं, बल्कि उसकी अपनी अंदरूनी खींचतान है। राज्य सरकार के मंत्रियों ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल बड़े नेताओं की सभाओं से चुनाव नहीं जीते जाते। जनता यह देखती है कि किस दल के पास स्पष्ट नेतृत्व, नीति और विकास की दृष्टि है।
भाजपा का दावा है कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं ने गांवों से लेकर शहरों तक विकास की नई तस्वीर बनाई है। ऐसे में कांग्रेस के आरोपों और दौरों से जनता प्रभावित होने वाली नहीं है। भाजपा नेताओं का मानना है कि कांग्रेस उत्तराखंड में सत्ता विरोधी माहौल बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन उसे यह भी बताना होगा कि यदि उसे मौका मिला तो वह राज्य के लिए क्या अलग करेगी। सत्ता पक्ष लगातार यह सवाल उठा रहा है कि कांग्रेस केवल सरकार की आलोचना कर रही है या उसके पास कोई स्पष्ट विकास एजेंडा भी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में कांग्रेस के हर बड़े नेता का उत्तराखंड दौरा भाजपा के जवाबी अभियान का केंद्र बनेगा। एक ओर कांग्रेस जनता के मुद्दोंकृमहंगाई, बेरोजगारी, पलायन और स्थानीय समस्याओंकृको लेकर सरकार को घेरने का प्रयास करेगी, तो दूसरी ओर भाजपा विकास कार्यों, संगठनात्मक मजबूती और नेतृत्व के सवाल पर कांग्रेस को लगातार कठघरे में खड़ा करेगी। उत्तराखंड की राजनीति अब स्पष्ट रूप से चुनावी मोड में प्रवेश कर चुकी है। कांग्रेस अपने राष्ट्रीय नेतृत्व के सहारे कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा इस अभियान को बाहरी राजनीतिक प्रदर्शन बताते हुए जनता के बीच अपनी सरकार के कामकाज को मुख्य मुद्दा बनाने में जुटी है।
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