शुक्रवार, 31 जुलाई 2026
‘साइलेंट’ मोड में चुनावी ‘बिसात’
कांग्रेस का बूथ मंथन से बदलेगा उत्तराखंड राज्य का सियासी समीकरण
वोटर लिस्ट में मतदाताओं को जोड़ने की होड़ में कौन मारेगा बाजी
चेहरों का जमावड़ा नहीं, बूथ की घेराबंदी तय करेगी सत्ता की चाबी
कांग्रेस के बूथ लेवल एजेंट, विधानसभा प्रभारी और वरिष्ठ नेता सक्रिय
देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव भले अभी कुछ समय दूर हों, लेकिन कांग्रेस ने चुनावी तैयारियों का पहिया तेजी से घुमाना शुरू कर दिया है। पार्टी ने अपने बूथ लेवल एजेंटों, विधानसभा प्रभारियों, जिला एवं ब्लाक स्तर के पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं को विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में पूरी ताकत के साथ झोंक दिया है। कांग्रेस का दावा है कि यह केवल मतदाता सूची का पुनरीक्षण नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव की बुनियादी तैयारी है। पार्टी के भीतर यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि चुनाव केवल बड़े नेताओं की सभाओं से नहीं, बल्कि बूथ स्तर की मजबूती से जीते जाते हैं। इसी सोच के तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में बूथवार समीक्षा, मतदाता सूची के सत्यापन, नए मतदाताओं को जोड़ने और छूटे हुए नामों को शामिल कराने का अभियान चलाया जा रहा है।
कांग्रेस संगठन का मानना है कि पिछले चुनावों में बूथ प्रबंधन की कमजोरियों का खामियाजा पार्टी को उठाना पड़ा था। इस बार पार्टी किसी भी स्तर पर ढिलाई के मूड में नहीं है। विधानसभा प्रभारियों को प्रत्येक बूथ की नियमित निगरानी, स्थानीय कार्यकर्ताओं से संवाद और मतदाता सूची में होने वाले बदलावों पर नजर रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सूत्रों के अनुसार प्रदेश नेतृत्व ने सभी जिलाध्यक्षों और विधानसभा प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को केवल औपचारिक प्रक्रिया न समझा जाए। इसे संगठन विस्तार और जनसंपर्क अभियान के रूप में चलाया जाए। बूथ एजेंटों से घर-घर संपर्क, नए मतदाताओं का पंजीकरण और मतदाता सूची में त्रुटियों को दूर कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का यह अभियान सीधे तौर पर चुनावी गणित से जुड़ा हुआ है। मतदाता सूची में छोटी-सी चूक भी चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि पार्टी इस बार बूथ स्तर पर मजबूत नेटवर्क खड़ा करने में जुटी है। दूसरी ओर भाजपा पहले से ही अपने बूथ सशक्तिकरण अभियान को आगे बढ़ा रही है। ऐसे में कांग्रेस भी संगठनात्मक स्तर पर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। प्रदेश की राजनीति अब केवल जनसभाओं और बड़े नारों तक सीमित नहीं रह गई है। असली मुकाबला बूथ प्रबंधन, मतदाता संपर्क और संगठन की सक्रियता पर टिकता दिखाई दे रहा है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। यदि पात्र मतदाता का नाम सूची में नहीं होगा तो लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित होंगे। इसलिए कार्यकर्ताओं से कहा गया है कि वह प्रत्येक बूथ पर सक्रिय रहकर लोगों की सहायता करें और निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में सहयोग दें। कांग्रेस इस अभियान के जरिए दोहरे लक्ष्य पर काम कर रही है। पहला, संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय बनाना और दूसरा, कार्यकर्ताओं में चुनावी ऊर्जा का संचार करना। लंबे समय बाद पार्टी ने बूथ स्तर पर इतनी व्यापक सक्रियता दिखाई है, जिसे आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।
अब निगाहें इस बात पर होंगी कि कांग्रेस की यह संगठनात्मक कवायद जमीन पर कितना असर छोड़ती है। उत्तराखंड की राजनीति में जहां भाजपा पहले से मजबूत बूथ नेटवर्क का दावा करती रही है, वहीं कांग्रेस की यह नई सक्रियता आने वाले महीनों में राजनीतिक मुकाबले को और दिलचस्प बना सकती है। चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपने-अपने मोर्चे संभालने शुरू कर दिए हैं। ऐसे में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान अब केवल निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया नहीं, बल्कि उत्तराखंड की चुनावी राजनीति का नया रणक्षेत्र बनता नजर आ रहा है।
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