गुरुवार, 16 जुलाई 2026

विपक्ष के सियासी सुर ‘बेसुरे’

धामी की तारीफ कर कांग्रेस विधायक बुटोला ने अपनी ही पार्टी को किया क्लीन बोल्ड कांग्रेस की घेराबंदी के बीच सीएम धामी के मुरीद हुए विधायक लखपत बुटोला भाजपा को मिला मुफ्त का सर्टिफिकेट,विधायक के बयान ने भाजपा का मनोबल बढ़ाया उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी संदेशों की नई जंग हो गई शुरू देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में बयान कई बार विपक्ष से ज्यादा सत्ता पक्ष के काम आ जाते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ गोपेश्वर में, जहां बदरीनाथ क्षेत्र से कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की खुले मंच से जमकर तारीफ कर राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी। जिस वक्त कांग्रेस पूरे प्रदेश में धामी सरकार को बेरोजगारी, महंगाई, पलायन और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर घेरने की रणनीति बना रही है, उसी समय पार्टी के एक विधायक का मुख्यमंत्री की कार्यशैली की सराहना करना कई सवाल खड़े कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस के भीतर सरकार को लेकर एक जैसी सोच नहीं है, या फिर यह चुनावी मौसम में बदलते राजनीतिक समीकरणों का संकेत है? राजनीति में विरोधी दल के नेता की तारीफ साधारण घटना नहीं होती। खासकर तब, जब विधानसभा चुनाव में डेढ़ साल से भी कम समय बचा हो। विधायक लखपत बुटोला के बयान को भाजपा निश्चित रूप से यह कहकर भुनाने की कोशिश करेगी कि जब कांग्रेस के विधायक ही मुख्यमंत्री धामी के काम की तारीफ कर रहे हैं, तो विपक्ष के आरोपों का क्या आधार बचता है? यानी भाजपा को बिना मांगे एक ऐसा राजनीतिक प्रमाणपत्र मिल गया, जिसे वह आने वाले दिनों में जनता के बीच बार-बार दोहरा सकती है। कांग्रेस का पूरा राजनीतिक नैरेटिव इस समय धामी सरकार की नीतियों की आलोचना पर आधारित है। पार्टी लगातार सरकार को हर मोर्चे पर घेरने की कोशिश कर रही है। ऐसे में यदि उसी पार्टी का विधायक मुख्यमंत्री की प्रशंसा करता है, तो कार्यकर्ताओं में भी भ्रम की स्थिति पैदा होना स्वाभाविक है। विपक्ष की सबसे बड़ी ताकत उसका एकजुट संदेश होता है। लेकिन यदि अलग-अलग नेता अलग-अलग संदेश देंगे, तो राजनीतिक हमला स्वतः कमजोर पड़ जाता है। संभव है कि विधायक ने किसी विशेष विकास कार्य या मुख्यमंत्री के किसी निर्णय की सराहना की हो। लोकतंत्र में अच्छे काम की प्रशंसा करना असामान्य नहीं है। लेकिन राजनीति में समय, मंच और शब्दकृतीनों का अपना महत्व होता है। चुनावी माहौल में दिया गया हर बयान केवल शिष्टाचार नहीं माना जाता, बल्कि उसके राजनीतिक अर्थ भी निकाले जाते हैं। यही वजह है कि बुटोला के बयान को लेकर कांग्रेस के भीतर भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पिछले कुछ समय से लगातार जनसंपर्क, विकास परियोजनाओं और राजनीतिक अभियानों के जरिए अपनी छवि मजबूत करने में जुटे हैं। यदि विपक्ष के नेता भी सार्वजनिक मंच से उनकी प्रशंसा करने लगें, तो भाजपा इसे धामी की बढ़ती स्वीकार्यता के रूप में पेश करेगी। यह भाजपा की चुनावी रणनीति के लिए एक मजबूत प्रचार सामग्री बन सकती है। कांग्रेस नेतृत्व के सामने अब चुनौती केवल भाजपा से लड़ने की नहीं, बल्कि अपने नेताओं के बयानों में एकरूपता बनाए रखने की भी है। यदि ऐसे बयान लगातार आते रहे, तो भाजपा विपक्ष पर यह तंज कसने से नहीं चूकेगी कि जो सरकार को असफल बताते हैं, उनके अपने विधायक ही सरकार की तारीफ कर रहे हैं। उत्तराखंड की राजनीति में कई बार एक बयान महीनों तक चुनावी मुद्दा बना रहता है। विधायक लखपत बुटोला की टिप्पणी भी अब सामान्य राजनीतिक बयान नहीं रही। यह भाजपा के लिए हथियार और कांग्रेस के लिए असहज सवाल बन चुकी है। वैसे भी राजनीति में विरोधी की तारीफ करना गलत नहीं, लेकिन चुनावी मौसम में की गई तारीफ कई बार अपने ही तर्कों की नींव हिला देती है। अब देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इसे व्यक्तिगत राय बताकर आगे बढ़ती है या भाजपा इसे 2027 तक अपने चुनावी भाषणों का हिस्सा बना लेती है।

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