शनिवार, 8 अगस्त 2026
सैन्यभूमि के युवाओं को ‘सहारा’
उत्तराखंड में अग्निवीरों के लिए पुनर्राेजगार सेल गठित, सेवा के बाद मिलेगा रोजगार
देश के पहले अग्निवीर पुनर्राेजगार सेल से हर सैनिक को रोजगार से जोड़ने की तैयारी
सेवा के बाद भविष्य सुरक्षित करने पर जोर, रोजगार के लिए बन रहा है मजबूत तंत्र
देहरादून। उत्तराखंड को सैनिकों की भूमि के रूप में पहचान दिलाने वाले राज्य में अग्निवीरों के भविष्य को लेकर सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में स्थापित अग्निवीर पुनर्राेजगार सेल का उद्देश्य सेना में सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों को उनके कौशल और योग्यता के अनुरूप रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। सरकार की इस पहल का फोकस सिर्फ अग्निवीरों को रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि सेना में मिले अनुशासन, प्रशिक्षण और तकनीकी दक्षता को नागरिक क्षेत्र में उपयोगी रोजगार से जोड़ना भी है। उत्तराखंड जैसे सैन्य बहुल राज्य के लिए यह पहल खास महत्व रखती है। राज्य के हजारों परिवारों की पीढ़ियां सेना से जुड़ी रही हैं। ऐसे में अग्निवीर योजना के तहत सेवा में जाने वाले युवाओं के लिए सेवा अवधि के बाद रोजगार और भविष्य की सुरक्षा बड़ा विषय रहा है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने पुनर्राेजगार की व्यवस्था को संस्थागत रूप देने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
अग्निवीरों को सेना में सीमित अवधि की सेवा के दौरान सैन्य प्रशिक्षण के साथ अनुशासन, नेतृत्व, तकनीकी दक्षता और टीमवर्क का अनुभव मिलता है। सरकार का प्रयास है कि सेवा समाप्त होने के बाद इन कौशलों को रोजगार के अवसरों से जोड़ा जाए। इसके लिए पुनर्राेजगार सेल विभिन्न विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, निजी क्षेत्र और अन्य रोजगार प्रदाताओं के साथ समन्वय की भूमिका निभा सकता है। अग्निवीरों की योग्यता और कौशल के आधार पर उन्हें उपयुक्त अवसरों की जानकारी उपलब्ध कराने, रोजगार मेलों से जोड़ने और आवश्यक मार्गदर्शन देने पर जोर रहेगा। उत्तराखंड में सेना सिर्फ रोजगार का माध्यम नहीं रही है। यहां सेना के प्रति भावनात्मक जुड़ाव भी गहरा है। पर्वतीय क्षेत्रों के अनेक परिवारों में आज भी सेना की वर्दी गौरव का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में अग्निवीरों के भविष्य को लेकर राज्य सरकार की पहल का सामाजिक महत्व भी है। सरकार का संदेश है कि जो युवा देश की सुरक्षा के लिए अपनी सेवाएं देंगे, उनके भविष्य को लेकर राज्य भी अपनी जिम्मेदारी निभाएगा। यही वजह है कि पुनर्राेजगार सेल को केवल सरकारी योजना के रूप में नहीं, बल्कि पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए रोजगार का पुल बनाने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
सरकारी क्षेत्र में रोजगार की सीमित संभावनाओं को देखते हुए निजी क्षेत्र की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। अग्निवीरों के सैन्य प्रशिक्षण और कौशल का इस्तेमाल सुरक्षा सेवाओं, आपदा प्रबंधन, लाजिस्टिक्स, तकनीकी कार्यों, प्रशासनिक जिम्मेदारियों और अन्य क्षेत्रों में किया जा सकता है। राज्य सरकार की कोशिश होगी कि निजी कंपनियां भी प्रशिक्षित अग्निवीरों को रोजगार के लिए प्राथमिकता दें और उनके कौशल का उपयोग करें। अगर यह माडल प्रभावी ढंग से लागू होता है तो उत्तराखंड देश के अन्य राज्यों के सामने एक उदाहरण भी प्रस्तुत कर सकता है। उत्तराखंड की सबसे बड़ी चुनौतियों में पलायन शामिल है। रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में युवा मैदानी शहरों और दूसरे राज्यों की ओर जाते हैं। सेना में सेवा के बाद यदि युवाओं को राज्य में ही रोजगार के बेहतर अवसर मिलते हैं तो इसका सीधा असर पलायन पर भी पड़ सकता है। खासकर पहाड़ी जिलों के युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार करना जरूरी है। अग्निवीरों के पास अनुशासन और प्रशिक्षण के साथ कार्य करने का अनुभव होगा। ऐसे युवाओं को राज्य के रोजगार तंत्र से जोड़ना स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।
हालांकि किसी भी सरकारी पहल की सफलता इस बात से तय होगी कि वह जमीन पर कितना प्रभाव डालती है। सिर्फ सेल बन जाना पर्याप्त नहीं होगा। जरूरी यह होगा कि अग्निवीरों को वास्तविक रोजगार के अवसर मिलें। निजी क्षेत्र के साथ ठोस समझौते हों। रोजगार की जानकारी समय पर मिले और युवाओं को आवेदन से लेकर चयन तक उचित मार्गदर्शन उपलब्ध हो। सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि अग्निवीरों की योग्यता के अनुरूप सम्मानजनक और स्थायी रोजगार के अवसर तैयार किए जाएं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में शुरू की गई यह पहल उत्तराखंड की सैन्य पृष्ठभूमि और युवाओं की आकांक्षाओं से सीधे जुड़ी है। सरकार के सामने अब चुनौती इस पहल को एक प्रभावी रोजगार मॉडल में बदलने की है। अगर हर सेवा पूर्ण करने वाले अग्निवीर को उसकी योग्यता के अनुसार रोजगार का अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस व्यवस्था बनती है तो यह राज्य के युवाओं के लिए बड़ा भरोसा बन सकती है।
क्योंकि सैनिक बनना सिर्फ वर्दी पहनना नहीं है। इसके पीछे एक परिवार की उम्मीद होती है। एक गांव का सपना होता है और देश की सेवा का संकल्प होता है। ऐसे में सेवा पूरी होने के बाद उस युवा से यह कहना पर्याप्त नहीं होगा कि अब आप नौकरी तलाशिए। जरूरत ऐसी व्यवस्था की है जो उससे कहेकृ देश की सेवा आपने की है, अब आपके कौशल को रोजगार से जोड़ना हमारी जिम्मेदारी है। यही अग्निवीर पुनर्राेजगार सेल की सबसे बड़ी कसौटी होगी।
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