बुधवार, 19 अगस्त 2026
कांग्रेस ने की भाजपा की ‘घेराबंदी’
अंकिता भंडारी को साढ़े तीन साल बाद भी न्याय नहीं
राहुल गांधी से मुलाकात के बाद भाजपा में है घबराहट
युवा आयोग के गठन को कांग्रेस ने बताया डैमेज कंट्रोल
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अंकिता भंडारी हत्याकांड, बेरोजगारी और युवाओं के मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आते दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अंकिता भंडारी को साढ़े तीन साल बाद भी न्याय नहीं मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी से उत्तराखंड के युवाओं की मुलाकात के बाद भाजपा सरकार में बेचौनी दिखाई देने लगी है और अब युवा आयोग का गठन इसी घबराहट में किया गया कदम है। गोदियाल ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में युवाओं की समस्याओं को लेकर गंभीर है तो उसे पहले उन युवाओं से माफी मांगनी चाहिए, जिन पर आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज हुआ और मुकदमे दर्ज किए गए। कांग्रेस नेता ने युवा आयोग के गठन को युवाओं के आक्रोश को शांत करने की कोशिश बताते हुए कहा कि केवल आयोग बना देने से युवाओं के सवाल खत्म नहीं होंगे।
कांग्रेस के लिए उत्तराखंड में युवाओं के मुद्दे को राजनीतिक रूप से धार देने का एक बड़ा अवसर राहुल गांधी के साथ बेरोजगार युवाओं की मुलाकात को माना जा रहा है। कांग्रेस का दावा है कि युवाओं ने रोजगार, भर्ती परीक्षाओं और प्रदेश में रोजगार के अवसरों से जुड़े सवाल सीधे राहुल गांधी के सामने रखे। इसके बाद भाजपा सरकार की ओर से युवाओं को लेकर उठाए गए कदमों को कांग्रेस राजनीतिक दबाव का परिणाम बता रही है। गोदियाल के आरोपों का राजनीतिक अर्थ यही है कि कांग्रेस 2027 के चुनाव में युवा मतदाताओं को एक बड़े चुनावी समूह के रूप में देख रही है। भाजपा लगातार अपने संगठन और सरकार की उपलब्धियों के सहारे चुनावी तैयारी में जुटी है, वहीं कांग्रेस बेरोजगारी और भर्ती परीक्षाओं के मुद्दे को सत्ता विरोधी भावना से जोड़ने की कोशिश कर रही है।
उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड भावनात्मक और राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मुद्दा रहा है। कांग्रेस लगातार इस मामले में न्याय की मांग उठाती रही है। गोदियाल ने कहा कि जिस बेटी के मामले ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर दिया, उसके परिवार को न्याय मिलने में देरी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। कांग्रेस इसे केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा सवाल बनाकर उठाती रही है। 2027 के चुनाव में इस मुद्दे का प्रभाव कितना होगा, यह आने वाला समय बताएगा, लेकिन कांग्रेस इसे भाजपा सरकार के खिलाफ अपने राजनीतिक नैरेटिव का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की कोशिश कर रही है।
भाजपा सरकार द्वारा युवा आयोग के गठन की कवायद को कांग्रेस ने सकारात्मक पहल मानने के बजाय सवालों के घेरे में रखा है। कांग्रेस का कहना है कि युवाओं को आयोग नहीं, रोजगार और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था चाहिए। पार्टी की दलील है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता हो, परीक्षाएं समय पर हों, रिक्त पदों पर नियुक्तियां हों और युवाओं की आवाज सरकार तक पहुंचे तो अलग से राजनीतिक डैमेज कंट्रोल की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। कांग्रेस का हमला सीधे सरकार की नीयत और नीति दोनों पर है।
गोदियाल का सबसे तीखा राजनीतिक संदेश उन युवाओं को लेकर है जो विभिन्न आंदोलनों में सड़कों पर उतरे थे। उनका कहना है कि सरकार को पहले यह स्वीकार करना चाहिए कि युवाओं के आंदोलनों से निपटने में कठोर रवैया अपनाया गया।लाठीचार्ज और मुकदमों का मुद्दा कांग्रेस पहले भी उठाती रही है। अब पार्टी इसे युवा आयोग के मुद्दे के साथ जोड़कर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस का सवाल हैकृजिस युवा को अपने हक की आवाज उठाने पर मुकदमा झेलना पड़ा, क्या आयोग बनने के बाद उसका मुकदमा खत्म हो जाएगा? जिस युवा पर लाठी चली, क्या सरकार उससे माफी मांगेगी?
उत्तराखंड की राजनीति में युवा मतदाता हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं। लेकिन बेरोजगारी और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने इस वर्ग की राजनीतिक चेतना को और मुखर किया है। भाजपा के सामने चुनौती यह है कि वह अपने विकास और रोजगार के दावों को युवाओं के अनुभव से कैसे जोड़ती है। कांग्रेस की चुनौती भी कम नहीं है। केवल सरकार पर आरोप लगाकर युवा मतदाताओं का भरोसा हासिल करना आसान नहीं होगा। युवाओं को ठोस रोजगार नीति, पारदर्शी भर्ती व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर अवसर चाहिए। चुनावी घोषणाओं से ज्यादा उनकी नजर इस बात पर होगी कि कौन-सा दल इन समस्याओं का व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करता है।
अंकिता भंडारी से लेकर बेरोजगारी तक कांग्रेस जिस तरह मुद्दों को जोड़ रही है, उससे साफ है कि 2027 की चुनावी लड़ाई केवल सत्ता परिवर्तन बनाम सत्ता वापसी तक सीमित नहीं रहने वाली। भाजपा जहां संगठन की ताकत और सरकार की उपलब्धियों के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है, वहीं कांग्रेस कोशिश कर रही है कि युवाओं, महिलाओं और सरकार से नाराज वर्गों को एक साझा राजनीतिक मंच दिया जाए। गोदियाल का बयान इसी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है। अब भाजपा के सामने सवाल है कि वह कांग्रेस के इन हमलों का जवाब राजनीतिक बयानबाजी से देती है या युवाओं के सवालों पर ठोस कार्रवाई करके। क्योंकि 2027 में युवा केवल भाषण नहीं सुनेंगेकृवह अपने अनुभव का हिसाब भी मांगेंगे।
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