गुरुवार, 10 सितंबर 2026
भाजपा ने ‘महामंथन’ में परखी मिशन-2027 की ‘बिसात’
कोर कमेटी में संगठन से लेकर चुनावी रणनीति तक मंथन, सियासी जमीन मजबूत करने पर जोर
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी में प्रदेश नेतृत्व ने खंगाली चुनावी तैयारी
बूथ से लेकर विधानसभा स्तर तक संगठन की सक्रियता पर नजर, भाजपा का शक्ति प्रदर्शन भी अहम
देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव-2027 की उलटी गिनती के बीच हल्द्वानी भाजपा के महामंथन का केंद्र बन गया है। प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बाद पार्टी की प्रदेश कोर कमेटी में संगठन की ताकत, चुनावी तैयारियों और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर मंथन ने साफ संकेत दिया है कि भाजपा अब चुनावी मोड में तेजी से आगे बढ़ रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी ने बैठक की अहमियत और बढ़ा दी है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और संगठन के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में हुई बैठकों में पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती सरकार के कामकाज को चुनावी मुद्दे में बदलना और संगठन की जमीन को बूथ तक मजबूत रखना है। प्रदेश कार्यसमिति में मुख्यमंत्री, प्रदेश पदाधिकारी, जिलाध्यक्ष और विभिन्न मोर्चों-प्रकोष्ठों के पदाधिकारी शामिल हुए।
हल्द्वानी को बैठक के लिए चुनना अपने आप में राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। कुमाऊं की राजनीति में भाजपा की पकड़ मजबूत रही है, लेकिन कांग्रेस लगातार क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है। ऐसे में भाजपा नेतृत्व का हल्द्वानी में बैठकर चुनावी तैयारियों की समीक्षा करना संगठन के लिए महत्वपूर्ण है। पार्टी पहले ही सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में कोर कमेटियों के गठन और स्थानीय मुद्दों, बूथ प्रबंधन तथा सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने की रणनीति पर काम शुरू कर चुकी है। यानी अब चुनाव की तैयारी केवल प्रदेश मुख्यालय तक सीमित नहीं रहने वाली। हर विधानसभा, हर मंडल और हर बूथ को चुनावी रणनीति का हिस्सा बनाने की कवायद तेज होगी।
हल्द्वानी में यह बैठक ऐसे समय हुई है जब रामलीला मैदान के शुद्धिकरण को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज है। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर विभाजनकारी राजनीति का आरोप लगा रही है, जबकि भाजपा की ओर से कांग्रेस पर राजनीतिक और धार्मिक भावनाओं को मुद्दा बनाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। ऐसे माहौल में राष्ट्रीय अध्यक्ष का हल्द्वानी पहुंचना केवल संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं माना जा रहा। भाजपा के लिए यह कुमाऊं की राजनीतिक जमीन पर अपने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट दिशा देने का अवसर भी है। दूसरी तरफ कांग्रेस के लिए चुनौती यह है कि वह इस विवाद को व्यापक जनमुद्दे में बदल पाती है या नहीं।
भाजपा के सामने 2027 में सबसे बड़ा सवाल सत्ता विरोधी माहौल को रोकने का होगा। सरकार विकास, रोजगार, निवेश, चारधाम, बुनियादी ढांचे और जनकल्याणकारी योजनाओं को अपनी उपलब्धियों के रूप में सामने रखेगी। विपक्ष बेरोजगारी, पलायन, महंगाई, कानून-व्यवस्था और स्थानीय मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। इसलिए कोर कमेटी की बैठक में केवल संगठन की समीक्षा पर्याप्त नहीं होगी। सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने और विपक्ष के आरोपों का राजनीतिक जवाब देने की रणनीति भी चुनावी सफलता का आधार बनेगी।
भाजपा की चुनावी रणनीति में बूथ प्रबंधन हमेशा से अहम रहा है। इस बार भी पार्टी का जोर बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने पर है। विधानसभा क्षेत्रवार कोर कमेटियों का गठन इसी रणनीति का हिस्सा है। अब सवाल यह है कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक कितना पहुंचा और संगठन उस लाभार्थी तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच पाता है। भाजपा के लिए 2027 का चुनाव केवल चेहरों का चुनाव नहीं होगा। यह संगठन बनाम संगठन, बूथ बनाम बूथ और नैरेटिव बनाम नैरेटिव की लड़ाई भी होगी। 10 सितंबर को नितिन नवीन की मौजूदगी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर प्रस्तावित सेवा संकल्प अभियान को लेकर भी बैठक होनी है। इसके बाद हल्द्वानी में पूर्व सैनिक सम्मेलन और रुद्रपुर में पंजाबी गौरव सम्मेलन का कार्यक्रम है। इससे भाजपा की रणनीति का एक और पहलू सामने आता हैकृकि संगठनात्मक गतिविधियों को सामाजिक संपर्क अभियानों से जोड़ना। यानी पार्टी चुनाव की औपचारिक घोषणा से पहले ही अपने संपर्क अभियान को व्यापक सामाजिक आधार देने की कोशिश में है।
हल्द्वानी की बैठक ने भाजपा के मिशन-2027 का संकेत जरूर दिया है, लेकिन असली परीक्षा बैठकों के बाद शुरू होगी। बैठक में रणनीति बन सकती है, लक्ष्य तय हो सकते हैं और संगठन को दिशा दी जा सकती है, लेकिन चुनाव जनता के बीच लड़ा जाएगा। भाजपा के सामने अब सवाल सिर्फ सत्ता बचाने का नहीं, बल्कि लगातार तीसरी जीत के लिए जनता के मन में अपने पक्ष का भरोसा कायम रखने का है। हल्द्वानी की बैठक से निकला संदेश साफ हैकृकि भाजपा चुनाव की तैयारी को अब अभियान में बदलने की ओर बढ़ रही है।
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