रविवार, 6 सितंबर 2026
सरकार की घेराबंदी का ‘सियासी मंच’
सीएम आवास कूच के लिए कांग्रेस ने कसी कमर
शुद्धिकरण विवाद पर सरकार को घेरने की तैयारी
निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
देहरादून। हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कथित शुद्धिकरण के मामले को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सात सितंबर को प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास कूच को सफल बनाने के लिए कांग्रेस ने संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि हल्द्वानी की घटना केवल एक स्थानीय विवाद नहीं है, बल्कि इससे जुड़े सवाल सामाजिक सम्मान, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े हैं। पार्टी ने इसी मुद्दे को लेकर सात सितंबर के कूच को सरकार के खिलाफ बड़े राजनीतिक प्रदर्शन के रूप में तैयार करने की रणनीति बनाई है।
महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डा. जसविंदर पाल सिंह गोगी ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की विभाजनकारी और जातिवादी राजनीति के खिलाफ कांग्रेस मजबूती से संघर्ष करेगी। गोगी ने कहा कि हल्द्वानी की घटना ने भाजपा की कथित मानसिकता को जनता के सामने उजागर किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। सात सितंबर का मुख्यमंत्री आवास कूच केवल कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और सामाजिक सम्मान की रक्षा के लिए संघर्ष है।
गोगी ने कहा कि कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज कर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इससे कांग्रेस पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने सरकार से हल्द्वानी प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की।
कांग्रेस ने सात सितंबर के कूच के जरिए सरकार को सीधे राजनीतिक कठघरे में खड़ा करने की तैयारी की है। हल्द्वानी प्रकरण पहले ही राजनीतिक बयानबाजी का केंद्र बन चुका है। अब कांग्रेस इसे प्रदेशव्यापी मुद्दे के रूप में उठाकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ती राजनीतिक सक्रियता के बीच सात सितंबर का प्रदर्शन कांग्रेस के लिए शक्ति प्रदर्शन का मौका भी माना जा रहा है।
कांग्रेस ने कार्यकर्ताओं को बड़ी संख्या में जुटाने का लक्ष्य तो रखा है, लेकिन अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि सात सितंबर को परेड ग्राउंड पर पार्टी कितना बड़ा जमावड़ा कर पाती है। यदि भीड़ जुटती है तो कांग्रेस इसे सरकार के खिलाफ जनआक्रोश के संकेत के तौर पर पेश करेगी और यदि अपेक्षा के अनुरूप भीड़ नहीं जुटी तो सरकार इसे कांग्रेस के कमजोर संगठन की तस्वीर के रूप में प्रचारित कर सकती है।
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