सोमवार, 14 सितंबर 2026
कांग्रेस का ‘यूथ स्ट्रैटेजी’ प्लान
गांवों से युवाओं के पलायन को बनाएगी चुनावी मुद्दा
राजीव गांधी पंचायती राज संगठन की बैठक में फैसला
रोजगार के अवसर बढ़ाने पर सरकार को घेरने की तैयारी
देहरादून। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने बेरोजगारी और ग्रामीण क्षेत्रों से युवाओं के पलायन को राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी तेज कर दी है। प्रदेश कांग्रेस राजीव गांधी पंचायती राज संगठन की महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेशभर में काम मांगो अभियान शुरू करने का निर्णय लिया गया। अभियान के जरिये कांग्रेस गांव-गांव पहुंचकर रोजगार के सवाल पर युवाओं और ग्रामीणों के बीच सरकार को घेरने की रणनीति पर आगे बढ़ेगी।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय देहरादून में आयोजित बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं उत्तराखंड प्रभारी दीपक राठौर की मौजूदगी रही। बैठक की अध्यक्षता राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ललित फर्स्वाण ने की। इस दौरान प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी, ग्रामीण क्षेत्रों से युवाओं के पलायन तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं होने को लेकर गंभीर चर्चा की गई।
कांग्रेस ने काम मांगो अभियान के जरिये रोजगार के मुद्दे को केवल देहरादून जैसे शहरी राजनीतिक केंद्रों तक सीमित रखने के बजाय गांवों तक ले जाने का संकेत दिया है। पार्टी का फोकस उन ग्रामीण परिवारों और युवाओं पर रहेगा, जिनके सामने स्थानीय स्तर पर रोजगार के सीमित विकल्पों के कारण दूसरे शहरों या राज्यों की ओर जाने की मजबूरी बनी हुई है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उत्तराखंड के गांवों में रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं होने के कारण युवाओं का पलायन गंभीर चुनौती बना हुआ है। पार्टी इसी सवाल को लेकर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है।
राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के माध्यम से अभियान चलाने का निर्णय राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। पंचायत स्तर तक संगठन की मौजूदगी का लाभ उठाते हुए कांग्रेस रोजगार के सवाल को स्थानीय समस्याओं से जोड़ना चाहती है। गांव में रोजगार, स्वरोजगार, कृषि आधारित आजीविका, पर्यटन और स्थानीय संसाधनों से जुड़े अवसरों को अभियान के प्रमुख मुद्दों में शामिल किए जाने की संभावना है। कांग्रेस का यह अभियान केवल सरकार के खिलाफ मुद्दा खड़ा करने तक सीमित रहेगा या गांवों में पार्टी के संगठन को भी मजबूत करेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। हालांकि 2027 के चुनाव से पहले कांग्रेस ने ग्रामीण मतदाताओं और युवाओं के बीच अपनी सक्रियता बढ़ाने का संकेत जरूर दे दिया है।
भाजपा जहां विकास और रोजगार के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों को सामने रख सकती है, वहीं कांग्रेस बेरोजगारी और पलायन के आंकड़ों तथा जमीनी समस्याओं को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगी। ऐसे में काम मांगो अभियान आने वाले महीनों में उत्तराखंड की सियासत में रोजगार बनाम सरकारी दावों की नई बहस को जन्म दे सकता है। सियासी तौर पर कांग्रेस का दांव साफ हैकृपंचायत के रास्ते गांव तक पहुंचो, युवाओं के रोजगार का सवाल उठाओ और पलायन को चुनावी बहस के केंद्र में लाओ। अब निगाह इस बात पर होगी कि काम मांगो अभियान धरातल पर कितना व्यापक होता है और क्या कांग्रेस रोजगार के सवाल के साथ अपना ठोस वैकल्पिक रोजगार माडल भी जनता के सामने रख पाती है।
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