शनिवार, 19 सितंबर 2026

खुद लिखी ‘पटकथा’ और बन गए ‘मसीहा’

2022 में चुनावी रण से भागे, 2027 में 20 हजार का दंभ सहसपुर में हरक का दावा, 20 हजार पार जीत की गारंटी हरक सिंह रावत ने हाईकमान के सामने रखा अपना दावा सहसपुर से चुनाव लड़ने की इच्छा जताकर जीत का आंकड़ा कांग्रेस के भीतर टिकट को लेकर अब बढ़ेगी सियासी हलचल देहरादून। उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव की आहट के साथ कांग्रेस अब पूरी तरह चुनावी मोड में दिखाई देने लगी है। संगठनात्मक गतिविधियों के साथ ही पार्टी नेताओं की विधानसभा सीटों पर दावेदारी भी सामने आने लगी है। इसी कड़ी में कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने सहसपुर विधानसभा सीट को लेकर बड़ा दावा किया है। रावत का कहना है कि यदि कांग्रेस हाईकमान उन्हें सहसपुर से चुनाव मैदान में उतारता है तो वह पार्टी की जीत को 20 हजार से अधिक मतों के अंतर से सुनिश्चित करने की गारंटी देते हैं। हरक का यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस 2027 की चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने में जुटी है। ऐसे में उनके दावे को केवल व्यक्तिगत चुनावी इच्छा के रूप में नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर टिकट की संभावित दौड़ के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। सहसपुर विधानसभा क्षेत्र देहरादून जिले की महत्वपूर्ण सीटों में शामिल है। क्षेत्र में ग्रामीण और शहरी आबादी के साथ विभिन्न सामाजिक समूहों की मौजूदगी चुनावी समीकरणों को बहुस्तरीय बनाती है। ऐसे में यहां किसी मजबूत चेहरे को उतारना कांग्रेस की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। हरक सिंह रावत लंबे समय से उत्तराखंड की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और कई सरकारों में मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उनका राजनीतिक अनुभव और अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रियता कांग्रेस के लिए उपयोगी हो सकती है। हालांकि किसी सीट पर चुनाव लड़ने और टिकट मिलने का अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व को करना है। हरक सिंह रावत ने अपने दावे को केवल चुनाव लड़ने की इच्छा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि जीत के अंतर का आंकड़ा भी सामने रखा है। 20 हजार से अधिक वोटों से जीत की गारंटी का दावा राजनीतिक तौर पर बड़ा संदेश है। इस दावे के कई राजनीतिक अर्थ निकाले जा सकते हैं। पहला, हरक रावत सहसपुर में अपने जनाधार को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं। दूसरा, वह पार्टी नेतृत्व को यह संदेश देना चाहते हैं कि उन्हें यदि जिम्मेदारी दी जाती है तो वह सीट को कांग्रेस के पक्ष में निर्णायक रूप से मोड़ सकते हैं। तीसरा, चुनाव से पहले ही संभावित प्रत्याशियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा में यह बयान उनकी दावेदारी को सार्वजनिक रूप से स्थापित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि जीत का वास्तविक अंतर चुनाव परिणाम आने पर ही तय होगा। अभी यह हरक सिंह रावत का राजनीतिक दावा है, जिसे चुनावी परिस्थितियों, प्रत्याशियों, स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं के रुझान की कसौटी पर परखा जाना बाकी है। हरक सिंह रावत वर्तमान में कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हैं। ऐसे में उनका किसी विधानसभा सीट को लेकर इस तरह खुलकर दावा करना पार्टी के भीतर चर्चा का विषय बनना स्वाभाविक है। सवाल यह भी है कि क्या चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे वरिष्ठ नेता खुद चुनाव मैदान में उतरेंगे या संगठन की व्यापक रणनीति पर काम करेंगे। कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर अभी अंतिम तस्वीर सामने नहीं आई है। लेकिन नेताओं की सार्वजनिक दावेदारी से साफ है कि विधानसभा चुनाव की तैयारियां अब केवल संगठनात्मक बैठकों तक सीमित नहीं हैं। संभावित उम्मीदवार अपने-अपने राजनीतिक क्षेत्र में जमीन तैयार करने लगे हैं। कांग्रेस के सामने 2027 में एक तरफ भाजपा की चुनावी तैयारियों का मुकाबला करने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ पार्टी के भीतर टिकट के दावेदारों को साधने की जिम्मेदारी भी होगी। यदि एक ही सीट से कई मजबूत नेता दावेदारी करते हैं तो टिकट वितरण पार्टी नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा बन सकता है। हरक सिंह रावत का सहसपुर को लेकर सामने आया दावा इसी व्यापक तस्वीर का हिस्सा है। अब देखना होगा कि पार्टी हाईकमान उनकी दावेदारी को किस नजर से देखता है और सहसपुर में कांग्रेस किस चेहरे पर भरोसा जताती है। फिलहाल हरक ने गेंद हाईकमान के पाले में डाल दी हैकृसहसपुर से टिकट मिला तो 20 हजार से अधिक मतों की जीत की गारंटी। अब कांग्रेस नेतृत्व के सामने सवाल केवल प्रत्याशी चुनने का नहीं, बल्कि हर दावेदार की राजनीतिक ताकत को चुनावी रणनीति में बदलने का भी है।

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