गुरुवार, 3 सितंबर 2026

चुनावी गणित में ‘मोदी फैक्टर’

मोदी के जन्मदिन पर भाजपा का मेगा प्लान, सेवा के बहाने चुनावी जमीन मजबूत करने की तैयारी 17 सितंबर से महीनेभर चलेगा जनसंपर्क अभियान, वडनगर-वाराणसी यात्रा से कार्यकर्ताओं में भरेंगे जोश देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर को भाजपा इस बार सिर्फ उत्सव तक सीमित रखने के बजाय इसे बड़े राजनीतिक और संगठनात्मक अभियान में बदलने की तैयारी में है। पार्टी देशभर में सेवा संकल्प अभियान के जरिए जनसंपर्क बढ़ाने के साथ सरकार की योजनाओं और मोदी सरकार के कामकाज को जनता तक पहुंचाने की कवायद करेगी। अभियान का सिलसिला सितंबर से अक्टूबर तक चलने की तैयारी है। राजनीतिक रूप से इस अभियान की टाइमिंग बेहद महत्वपूर्ण है। अगले विधानसभा चुनावों की तैयारियां तेज होने के बीच भाजपा संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने और लाभार्थियों से दोबारा संपर्क साधने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री के जन्मदिन को पार्टी ने सेवा से संगठन और संगठन से चुनाव की रणनीति के लिए बड़े अवसर के रूप में लिया है। भाजपा की योजना 17 सितंबर से व्यापक जनसंपर्क अभियान शुरू करने की है। इस दौरान स्वच्छता अभियान, रक्तदान, स्वास्थ्य शिविर, पौधरोपण, सेवा कार्यक्रम, लाभार्थी संपर्क और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के जरिए कार्यकर्ताओं को जनता के बीच पहुंचाने की तैयारी है। पार्टी की यह कवायद प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन से भी जोड़ी जा रही है। यानी भाजपा का संदेश साफ हैकृमोदी का जन्मदिन केवल मोदी के व्यक्तित्व का उत्सव नहीं, बल्कि संगठन की सक्रियता का राष्ट्रीय अभियान बने। इस अभियान का सबसे चर्चित हिस्सा वडनगर से वाराणसी तक प्रस्तावित जनसंपर्क यात्रा है। गुजरात का वडनगर प्रधानमंत्री मोदी की जन्मस्थली है, जबकि वाराणसी उनका लोकसभा क्षेत्र है। योजना के मुताबिक दोनों दिशाओं से टीमें निकलकर जनसंपर्क करेंगी और यात्रा को एक महीने तक चलाने की तैयारी है। राजनीतिक संदेश भी स्पष्ट हैकृमोदी की राजनीतिक यात्रा को संगठन की जमीनी यात्रा से जोड़ना। यात्रा के जरिए भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम लोगों तक सरकार की उपलब्धियां पहुंचाने और संगठन की मौजूदगी मजबूत करने का प्रयास करेगी। खास बात यह है कि अगले साल होने वाले महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा के लिए यह अभियान कार्यकर्ताओं को चुनावी मोड में लाने का भी माध्यम बन सकता है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती स्थानीय मुद्दों और सरकार के प्रदर्शन के साथ अपने सबसे बड़े राजनीतिक चेहरे यानी प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता को जोड़ना है। पार्टी पहले भी विधानसभा चुनावों में मोदी की छवि, केंद्र सरकार की योजनाओं और संगठन की बूथ मशीनरी को एक साथ इस्तेमाल करती रही है। इस बार भी रणनीति कुछ ऐसी ही दिखाई दे रही है। सेवा कार्यक्रमों के जरिए सामाजिक संपर्क, लाभार्थी संपर्क के जरिए योजनाओं का प्रचार और मोदी के नेतृत्व के जरिए व्यापक राजनीतिक संदेशकृइन तीनों को एक साथ जोड़ने की कोशिश होगी। भाजपा के सामने चुनौती यह भी है कि केवल मोदी के नाम पर चुनावी माहौल तैयार करने के बजाय स्थानीय नेतृत्व और स्थानीय मुद्दों को भी साथ लेकर चला जाए। यही वजह है कि सेवा अभियान में केंद्रीय नेतृत्व के संदेश के साथ प्रदेश और जिला स्तर के संगठन को भी बड़ी भूमिका देने की तैयारी है। भाजपा के लिए यह अभियान सिर्फ जनता से संपर्क का कार्यक्रम नहीं है। इसे संगठन की ताकत परखने की कवायद के रूप में भी देखा जा रहा है। कौन सा बूथ कितना सक्रिय है, कितने कार्यकर्ता मैदान में उतरते हैं, लाभार्थियों तक संगठन की पहुंच कितनी है और सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक पार्टी का संदेश कितनी तेजी से पहुंचता हैकृअभियान इन सभी मोर्चों पर संगठन को परखने का अवसर देगा। यही वजह है कि भाजपा का यह मेगा प्लान विपक्ष के लिए भी राजनीतिक संकेत है। कांग्रेस समेत अन्य दलों को अब अपनी चुनावी रणनीति और संगठनात्मक सक्रियता बढ़ानी होगी। भाजपा की राजनीति में सेवा कार्यक्रम नए नहीं हैं। लेकिन चुनाव से पहले ऐसे अभियानों की राजनीतिक अहमियत बढ़ जाती है। प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन को केंद्र में रखकर देशव्यापी कार्यक्रम और जनसंपर्क अभियान पार्टी को एक साथ कई राजनीतिक संदेश देने का अवसर देगा। पहलाकृमोदी का नेतृत्व अभी भी भाजपा की सबसे बड़ी चुनावी पूंजी है। दूसराकृभाजपा का संगठन चुनाव से काफी पहले मैदान में उतर चुका है और तीसराकृपार्टी सरकार की योजनाओं को सीधे लाभार्थियों और आम मतदाताओं तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है। अब देखना होगा कि सेवा संकल्प का यह मेगा अभियान भाजपा के लिए कितनी राजनीतिक जमीन तैयार करता है। क्योंकि चुनावी राजनीति में केवल भीड़ जुटाना पर्याप्त नहीं होता, असली परीक्षा बूथ पर होती है। भाजपा ने फिलहाल अपना अभियान शुरू करने का संकेत दे दिया है। 17 सितंबर से सेवा के मंच पर शुरू होने वाला यह अभियान आने वाले विधानसभा चुनावों की चुनावी पटकथा का पहला बड़ा अध्याय बन सकता है।

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