बुधवार, 10 जून 2026

उत्तराखंड में अर्द्धकुंभ पर ‘सियासत’ का संगम

उत्तराखंड में धर्म के मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस आ गए हैं आमने-सामने भाजपा ने बताया आस्था का सम्मान,कांग्रेस ने उठाए व्यवस्थाओं पर सवाल करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय पर राजनीति का लगा तड़का देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच धर्म और आस्था की राजनीति एक बार फिर केंद्र में आ गई है। हरिद्वार में अर्द्धकुंभ के आयोजन को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी संग्राम तेज हो गया है। सत्ता पक्ष इसे सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण का बड़ा कदम बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी वर्ष से पहले धार्मिक भावनाओं को भुनाने की कोशिश करार दे रहा है। अर्द्धकुंभ को लेकर शुरू हुई बहस अब केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। भाजपा का कहना है कि देवभूमि उत्तराखंड की पहचान उसकी आध्यात्मिक विरासत और धार्मिक परंपराएं हैं। ऐसे में अर्द्धकुंभ का आयोजन करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है, जिस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। दूसरी ओर कांग्रेस का आरोप है कि सरकार धार्मिक आयोजनों को प्रचार का माध्यम बना रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में श्रद्धालुओं की चिंता करती है तो उसे हरिद्वार की यातायात, पार्किंग, गंगा सफाई और बुनियादी सुविधाओं पर अधिक ध्यान देना चाहिए। विपक्ष का तर्क है कि अर्द्धकुंभ के नाम पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है। उत्तराखंड में धर्म और आस्था हमेशा से चुनावी विमर्श का अहम हिस्सा रहे हैं। चारधाम यात्रा, समान नागरिक संहिता, लव जिहाद कानून और धार्मिक पर्यटन जैसे मुद्दों पर भाजपा पहले ही अपनी मजबूत पकड़ बना चुकी है। अब अर्द्धकुंभ का मुद्दा भी उसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। भाजपा इस मुद्दे के जरिए अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश में दिख रही है, जबकि कांग्रेस धार्मिक आयोजनों के विरोध की छवि से बचते हुए सरकार को व्यवस्थाओं और खर्चों के सवालों पर घेरने की रणनीति अपना रही है। यही कारण है कि दोनों दल सीधे तौर पर आस्था का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि आयोजन के स्वरूप और सरकार की मंशा को लेकर एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं।

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