बुधवार, 3 जून 2026
पहाड़ काटकर हो रही अवैध प्लाटिंग
पेड़ों का किया जा रहा अवैध कटान, भूस्खलन की चपेट में है पहाड़ी
जमीनों के अंधाधुंध दोहन को लेकर सियासत एक बार फिर गरमाई
टिहरी के मदन नेगी के ग्राम रौलाकोट में हो रही है बेतरतीब प्लाटिंग
देहरादून। उत्तराखंड में मजबूत भू-कानून की मांग और जमीनों के अंधाधुंध दोहन को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। युवा नेता मोहित डिमरी ने जिला टिहरी के मदन नेगी तहसील अंतर्गत ग्राम रौलाकोट में हो रही बेतरतीब प्लाटिंग को लेकर सरकार, प्रशासन और भू-माफियाओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने ऐतिहासिक डोबरा-चांठी पुल के ठीक ऊपर हो रहे इस निर्माण कार्य को भविष्य की बड़ी तबाही का संकेत बताया है।
युवा नेता मोहित डिमरी ने सोशल मीडिया और मीडिया प्लेटफार्म्स के जरिए अपनी चिंता साझा करते हुए कहा कि जिस डोबरा-चांठी पुल को टिहरी की जनता ने दशकों के इंतजार के बाद अपनी अस्मिता का प्रतीक माना, आज उसी के ठीक ऊपर पूरा पहाड़ काटकर पर्यावरण की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीणों से करीब 80 से 100 नाली जमीन कौड़ियों के दाम पर खरीदी गई और अब पैसों की हवस में अंधा होकर वहाँ बेतरतीब तरीके से पेड़ काटे जा रहे हैं। पहाड़ का सीना चीरा जा रहा है, जिससे झींवाली-औखला मोटरमार्ग भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो रहा है।
डिमरी ने क्षेत्र की संवेदनशीलता का हवाला देते हुए सरकार से तीखे सवाल किए। उन्होंने कहा कि यह पूरा इलाका बेहद संवेदनशील और लैंडस्लाइड-प्रोन जोन में आता है। क्या हम विकास के नाम पर विनाश का वो मंजर भूल गए जो हमने हाल ही में जोशीमठ में देखा था? अगर यह पूरा पहाड़ दरक कर नीचे डोबरा-चांठी पुल और टिहरी झील में समा गया, तो इस भारी तबाही की जिम्मेदारी कौन लेगा? प्रशासन और भू-माफिया इस सच से आंखें मूंदे बैठे हैं।
जमीन के इस खेल के आर्थिक गणित को सामने रखते हुए पूर्व विधायक प्रत्याशी ने कहा कि ग्रामीणों को बहला-फुसलाकर औने-पौने दाम पर जमीनें ली गईं। आज उसी जमीन पर 120 गज के प्लाट 30 से 35 लाख रुपये में बेचे जा रहे हैं। यहाँ सिर्फ प्लाटिंग ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े रसूखदारों के लिए लग्जरी डुप्लेक्स, विला और कमर्शियल कंस्ट्रक्शन की बड़ी तैयारी चल रही है।
उत्तराखंड में लंबे समय से चल रही हिमाचल की तर्ज पर सशक्त भू-कानून की मांग को दोहराते हुए मोहित डिमरी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा क्या यही है धामी का नया भू-कानून? जहाँ एक तरफ हमारी कृषि भूमि और जंगलों को बचाने की बात होती है, वहीं दूसरी ओर रसूखदारों के आलीशान होटल और रौलाकोट जैसी अंधाधुंध प्लाटिंग को छूट मिली हुई है। भू-माफिया यहाँ आते हैं, प्रकृति का दोहन करते हैं, जेबें भरते हैं और चले जाते हैं। लेकिन इसका सीधा नुकसान यहाँ के मूल निवासियों को भुगतना पड़ रहा है। हमारी सांस्कृतिक पहचान खत्म हो रही है और राज्य की डेमोग्राफी बदल रही है।
मोहित डिमरी ने टिहरी जिला प्रशासन और उत्तराखंड सरकार से मांग की है कि ग्राम रौलाकोट में डोबरा-चांठी पुल के ऊपर हो रही इस अवैध प्लाटिंग और पेड़ों के कटान को प्रभाव से रोका जाए। इस बात की उच्च स्तरीय जांच हो कि भू-धंसाव वाले इस संवेदनशील क्षेत्र में कमर्शियल प्लाटिंग और विला बनाने की अनुमति किसने और किस आधार पर दी?
उन्होंने पहाड़ के सीधे-सादे ग्रामीणों से भावुक अपील करते हुए कहा कि वे पैसों के प्रलोभन में आकर अपनी पुश्तैनी जमीनें न बेचें। आज भले ही कुछ लाख रुपये मिल रहे हैं, लेकिन कल जब बच्चों के पास पैर रखने की जमीन नहीं होगी, तो हमारी नस्लें हमें माफ नहीं करेंगी। यह जमीन सिर्फ मिट्टी नहीं, हमारी अस्मिता और पुरखों की विरासत है, जिसे माफियाओं के हवाले नहीं किया जा सकता।
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