मंगलवार, 7 जुलाई 2026

चुनाव से पहले बदला राजनीतिक नैरेटिव

धामी सरकार विकास के बजाय कर रही विभाजन की राजनीति, कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी का हमला कांग्रेस का आरोप, रोजगार और पलायन जैसे मूल मुद्दों को छोड़ ध्रुवीकरण में जुटी प्रदेश सरकार जनहित के वास्तविक मुद्दों से जनता का ध्यान भटका रही प्रदेश की धामी सरकार कांग्रेस देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की सरगर्मियों के बीच प्रदेश में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक हमले तेज होते जा रहे हैं। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार पर विकास के बजाय विभाजन की राजनीतिष् करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने रोजगार, महंगाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और पलायन जैसे मूल मुद्दों पर अपेक्षित परिणाम देने के बजाय राजनीतिक ध्रुवीकरण को प्राथमिकता दी है। प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि धामी सरकार ने विकास के नए मानक स्थापित करने के बजाय समाज को विभाजित करने की राजनीति के नए रिकार्ड बनाए हैं। उनका आरोप था कि सरकार जनहित के वास्तविक मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने का प्रयास कर रही है। दसौनी ने कहा कि प्रदेश की जनता आज रोजगार, महंगाई, पलायन, किसानों की समस्याओं, शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं पर जवाब चाहती है। उनका कहना था कि इन विषयों पर ठोस चर्चा करने के बजाय सरकार लगातार ऐसे मुद्दों को आगे बढ़ा रही है, जिनसे राजनीतिक बहस तो होती है लेकिन आम लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान नहीं निकलता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी उपलब्धियों का ठोस लेखा-जोखा देने के बजाय भावनात्मक और राजनीतिक मुद्दों के सहारे जनमत को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, भाजपा विकास की उपलब्धियों के बजाय राजनीतिक ध्रुवीकरण को चुनावी रणनीति का हिस्सा बना रही है। दसौनी ने दावा किया कि प्रदेश में बेरोजगार युवाओं, महिलाओं, व्यापारियों और किसानों के बीच कई सवाल हैं, लेकिन सरकार उन पर खुलकर चर्चा करने से बच रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार अपने काम को लेकर आश्वस्त है तो उसे रोजगार सृजन, निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा और पलायन रोकने के प्रयासों पर सार्वजनिक बहस के लिए तैयार होना चाहिए। कांग्रेस प्रवक्ता ने भाजपा के विकास संबंधी दावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार बड़ी घोषणाएं तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर उनके परिणाम अपेक्षित नहीं दिखाई देते। उनका आरोप था कि प्रदेश के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में आज भी स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा संस्थान और रोजगार के अवसर बड़ी चुनौती बने हुए हैं। दसौनी ने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि युवाओं के लिए स्थायी रोजगार, गांवों से पलायन रोकने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कौन-कौन से ठोस कदम उठाए गए हैं। कांग्रेस ने कहा कि विपक्ष का दायित्व सरकार से जवाब मांगना है और जनता से जुड़े मुद्दे उठाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। दसौनी ने कहा कि सरकार आलोचना को राजनीतिक विरोध मानने के बजाय उसे सुधार के अवसर के रूप में देखे। उत्तराखंड की राजनीति अब स्पष्ट रूप से चुनावी मोड में प्रवेश कर चुकी है। कांग्रेस विकास बनाम विभाजन की बहस को प्रमुख मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा अपने विकास कार्यों और संगठनात्मक मजबूती के आधार पर जनता के बीच जाने की तैयारी में है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनावी विमर्श का केंद्र रोजगार, पलायन, महंगाई और विकास जैसे मुद्दे बनते हैं या फिर राजनीतिक और वैचारिक बहसें अधिक प्रभावी रहती हैं। इतना तय है कि 2027 का चुनाव केवल नारों का नहीं, बल्कि जनता के बीच विश्वसनीयता और मुद्दों की लड़ाई भी होगा।

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