शुक्रवार, 10 जुलाई 2026

धामी माडल पर दांव: चेहरा नहीं भविष्य बदलेंगे

भाजपा ने बदला उत्तराखंड की राजनीति का नैरेटिव सबसे लंबे कार्यकाल को बना रही चुनावी हथियार मुख्य विपक्ष से सवालकृचेहरा कौन और एजेंडा क्या देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में एक समय मुख्यमंत्री बदलना उतना ही सामान्य माना जाता था, जितना मानसून का मौसम बदलना। सत्ता बदलने से पहले मुख्यमंत्री बदल जाते थे और सरकारें अपने ही फैसलों से अस्थिर नजर आती थीं। लेकिन अब भाजपा उसी उत्तराखंड में एक नया राजनीतिक आख्यान गढ़ रही हैकृस्थिर नेतृत्व, मजबूत सरकार और लगातार फैसले। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का लगातार लंबा कार्यकाल अब केवल प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि भाजपा का सबसे बड़ा चुनावी ब्रांड बनने की ओर बढ़ रहा है। पार्टी यह संदेश देने में जुटी है कि जिस राज्य को कभी राजनीतिक अस्थिरता की पहचान से देखा जाता था, वही आज स्थिर नेतृत्व का उदाहरण पेश कर रहा है। भाजपा ने धामी पर लगातार भरोसा जताकर यह संकेत दिया है कि उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन की पुरानी राजनीति को पीछे छोड़ दिया गया है। अब पार्टी का पूरा चुनावी अभियान एक स्थिर चेहरे और निरंतर नेतृत्व के इर्द-गिर्द बुना जा सकता है। राजनीतिक गलियारों में इसे भाजपा की सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है। संदेश सीधा हैकृजब कप्तान तय है, तो टीम भी उसी के नेतृत्व में मैदान में उतरेगी। भाजपा जहां धामी के नेतृत्व को उपलब्धि बताकर जनता के बीच जा रही है, वहीं कांग्रेस अब भी संगठन, नेतृत्व और चुनावी रणनीति को धार देने में जुटी दिखाई देती है। भाजपा इसी बिंदु को राजनीतिक हथियार बनाकर यह सवाल उछाल सकती है कि जब हमारा चेहरा तय है, तो आपका कौन? यही वह राजनीतिक बढ़त है, जिसे भाजपा 2027 तक बनाए रखना चाहेगी। भाजपा का दावा है कि निवेश, सड़क, कनेक्टिविटी, धार्मिक पर्यटन, समान नागरिक संहिता और प्रशासनिक फैसलों ने उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। विपक्ष इन दावों पर सवाल उठाते हुए बेरोजगारी, पलायन, महंगाई, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों को सामने रखता रहा है। यानी चुनावी मुकाबला अब केवल विकास के दावों का नहीं, बल्कि किसका नैरेटिव जनता स्वीकार करती हैकृइसका होगा। उत्तराखंड की राजनीति में अब एक नया समीकरण बनता दिख रहा है। भाजपा चुनाव को स्थिर नेतृत्व बनाम अस्थिर विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर सकती है, जबकि कांग्रेस इसे लंबा कार्यकाल बनाम जनता के मुद्दे की बहस में बदलना चाहेगी। उत्तराखंड की राजनीति में कभी मुख्यमंत्री बदलना सबसे बड़ी खबर होती थी। आज भाजपा उसी इतिहास को पलटकर यह बताना चाहती है कि अब चेहरा नहीं बदलेगा। लेकिन लोकतंत्र में केवल लंबा कार्यकाल ही उपलब्धि का प्रमाण नहीं होता। असली परीक्षा यह है कि क्या उस लंबे कार्यकाल में जनता की उम्मीदें भी उतनी ही तेजी से पूरी हुईं। भाजपा धामी के लंबे नेतृत्व को अपना सबसे बड़ा चुनावी पोस्टर बनाएगी। विपक्ष इसे जनता के अधूरे सवालों से चुनौती देगा। 2027 का चुनाव इस बात का फैसला करेगा कि मतदाता स्थिरता पर मुहर लगाते हैं या जवाबदेही को तरजीह देते हैं।

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