शनिवार, 18 जुलाई 2026

पेपरलीक बनाम किरदारलीक

राहुल के सवालों से ध्यान भटकाने की कोशिश या भाजपा की रणनीतिक चूक लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान के बाद सियासी जंग तेज कांग्रेस पार्टी ने साधा निशानाकृपेपरलीक पर जवाब नहीं, विरोध की राजनीति देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में राहुल गांधी के पेपरलीक मुद्दे ने एक बार फिर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी जुबानी जंग छेड़ दी है। कांग्रेस का आरोप है कि राहुल गांधी द्वारा युवाओं के रोजगार, भर्ती घोटालों और पेपरलीक जैसे मुद्दों पर सवाल उठाने के बाद भाजपा ने मूल मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश की। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि दून में बड़े आयोजन और सड़कों पर विरोध प्रदर्शन के जरिए युवाओं के सवालों को दबाने का प्रयास किया गया। कांग्रेस के सोशल मीडिया और पार्टी नेताओं की ओर से यह भी कहा गया कि भारी बारिश के बीच महिला कार्यकर्ताओं को विरोध प्रदर्शन के लिए उतारना भाजपा की राजनीतिक मजबूरी को उजागर करता है। कांग्रेस ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि पेपरलीक की क्लास से ध्यान भटकाने की कोशिश में भाजपा का किरदारलीक हो गया। राहुल गांधी ने अपने उत्तराखंड दौरे के दौरान राज्य में भर्ती परीक्षाओं में पेपरलीक, बेरोजगारी और युवाओं के भविष्य को प्रमुख मुद्दा बनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं और युवाओं का विश्वास कमजोर हुआ है। कांग्रेस का दावा है कि इन्हीं सवालों ने भाजपा को असहज कर दिया। दूसरी ओर भाजपा ने राहुल गांधी के आरोपों को राजनीतिक नौटंकी करार दिया। भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार ने भर्ती घोटालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है, दोषियों को जेल भेजा गया है और देश का सबसे कड़ा नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। भाजपा का दावा है कि कांग्रेस युवाओं को गुमराह करने का प्रयास कर रही है और उसका विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है। हालांकि कांग्रेस इस जवाब से संतुष्ट नहीं है। पार्टी का कहना है कि यदि सरकार के पास उपलब्धियां हैं तो उन्हें तथ्यों के साथ सामने रखा जाना चाहिए, न कि विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक आयोजनों के जरिए विमर्श को दूसरी दिशा में मोड़ा जाए। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि जनता अब रोजगार, महंगाई और शिक्षा जैसे मुद्दों पर स्पष्ट जवाब चाहती है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में यह टकराव केवल राहुल गांधी के दौरे तक सीमित नहीं है। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 नजदीक आने के साथ भाजपा और कांग्रेस दोनों युवाओं को अपने पक्ष में करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। भर्ती परीक्षाएं, पेपरलीक, रोजगार और पलायन जैसे मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में आते दिख रहे हैं। भाजपा का फोकस राहुल गांधी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का है, जबकि कांग्रेस सरकार की जवाबदेही तय करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में असली सवाल यही है कि चुनावी बहस का केंद्र पेपरलीक, बेरोजगारी और युवाओं का भविष्य रहेगा या फिर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और विरोध प्रदर्शन।

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