मंगलवार, 14 जुलाई 2026

उत्तराखंड कांग्रेस का ‘सिक्सर’

राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए युवाओं में भारी क्रेज का दावा, बोले-रिकार्ड तोड़ हुए रजिस्ट्रेशन कांग्रेस का दावा-प्रदेश हर जिले से उमड़ा पंजीकरण का सैलाब, अब नतीजों पर नजर क्या राहुल गांधी की गूंज बदल पाएगी उत्तराखंड राज्य की चुनावी फिजा, यक्ष प्रश्न ! देहरादून। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रस्तावित छात्रों की गूंज कार्यक्रम को लेकर उत्तराखंड की राजनीति गरमा गई है। कार्यक्रम से पहले कांग्रेस का दावा है कि राज्यभर से बड़ी संख्या में युवाओं और छात्रों ने इसमें शामिल होने के लिए आनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया है। पार्टी इसे युवाओं के बढ़ते समर्थन और बेरोजगारी, शिक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर बढ़ती जागरूकता का संकेत बता रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कार्यक्रम के लिए मिले पंजीकरण ने उनकी अपेक्षाओं को भी पीछे छोड़ दिया है। पार्टी के अनुसार, देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, अल्मोड़ा, पौड़ी, टिहरी, चमोली, पिथौरागढ़ और अन्य जिलों से बड़ी संख्या में छात्र और युवा जुड़ना चाहते हैं। हालांकि, रजिस्ट्रेशन के कुल आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। कांग्रेस का मानना है कि उत्तराखंड का युवा आज रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, शिक्षा और पलायन जैसे सवालों को लेकर गंभीर है। पार्टी इन्हीं मुद्दों पर सीधा संवाद स्थापित कर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। भाजपा ने कांग्रेस के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि केवल भीड़ जुटाने या पंजीकरण कराने से युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं होता। पार्टी का कहना है कि राज्य सरकार भर्ती प्रक्रियाओं में सुधार, निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस युवाओं की भावनाओं को चुनावी राजनीति से जोड़ने का प्रयास कर रही है, जबकि सरकार नीतिगत स्तर पर काम कर रही है। छात्रों की गूंज कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर भी व्यापक अभियान चलाया है। युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के कार्यकर्ता विभिन्न जिलों में संपर्क अभियान चला रहे हैं और छात्रों को कार्यक्रम से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंजीकरण कराने वाले युवाओं में से वास्तविक भागीदारी कितनी होती है और राहुल गांधी अपने संवाद में युवाओं के लिए कौन-सा स्पष्ट राजनीतिक और नीतिगत संदेश देते हैं। यही तय करेगा कि यह पहल केवल एक सफल आयोजन बनकर रह जाती है या उत्तराखंड की चुनावी राजनीति में एक प्रभावशाली मोड़ साबित होती है।

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