मंगलवार, 14 जुलाई 2026

‘टूरिस्ट’ बनाम ‘जनसेवक’ की जंग

राहुल गांधी के उत्तराखंड दौरे पर भाजपा का तंज,कृचुनाव आते ही याद आई देवभूमि भाजपा बोली-भाषणों से नहीं,संकट में साथ खड़े रहने वाले से प्रभावित होगी जनता टूरिस्ट नेता नहीं, जनसेवक नेता चाहिए, कांग्रेस ने बताया युवाओं की आवाज सुनने का अभियान देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 की राजनीतिक हलचल के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। भाजपा ने राहुल गांधी के दौरे पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उत्तराखंड की जनता को टूरिस्ट नेता नहीं, जनसेवक नेता चाहिए। इसके साथ ही सत्तारूढ़ दल ने कांग्रेस पर चुनाव नजदीक आते ही राज्य की याद आने का आरोप लगाया। भाजपा नेताओं का कहना है कि उत्तराखंड की जनता ऐसे नेतृत्व को अच्छी तरह पहचानती है जो चुनाव के समय राज्य में सक्रिय दिखाई देता है और बाद में लंबे समय तक जनता के बीच नजर नहीं आता। पार्टी का दावा है कि राज्य की जनता अब केवल भाषणों और राजनीतिक अभियानों से प्रभावित होने वाली नहीं है, बल्कि वह ऐसे नेतृत्व को महत्व देती है, जो संकट के समय भी लोगों के बीच मौजूद रहे। भाजपा ने राहुल गांधी के प्रस्तावित युवा संवाद कार्यक्रम पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कांग्रेस वास्तव में युवाओं की चिंता करती है, तो उसे यह भी बताना चाहिए कि वर्षों तक सत्ता में रहने के दौरान युवाओं के लिए कौन से स्थायी समाधान विकसित किए गए। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस का वर्तमान अभियान चुनावी माहौल बनाने की कवायद है। भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार रोजगार, निवेश, सड़क, पर्यटन और धार्मिक अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में लगातार काम कर रही है। उनका कहना है कि जनता विकास कार्यों के आधार पर निर्णय करेगी, न कि राजनीतिक नारों के आधार पर। दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी का उत्तराखंड दौरा किसी औपचारिक राजनीतिक सभा तक सीमित नहीं है। पार्टी के अनुसार उनका उद्देश्य छात्रों, युवाओं और विभिन्न सामाजिक वर्गों से संवाद कर उनकी समस्याओं को सुनना है। कांग्रेस का दावा है कि बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवाद, पलायन और शिक्षा जैसे मुद्दे आज उत्तराखंड के युवाओं की सबसे बड़ी चिंताएं हैं और इन्हीं प्रश्नों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का प्रयास किया जा रहा है। वही भाजपा का टूरिस्ट नेता वाला हमला केवल एक बयान नहीं, बल्कि कांग्रेस की विश्वसनीयता पर सीधा राजनीतिक प्रहार है। वहीं कांग्रेस इस आलोचना का जवाब राहुल गांधी के जनसंवाद और युवा केंद्रित अभियान के माध्यम से देने की कोशिश कर रही है। उत्तराखंड की राजनीति में यह मुकाबला अब केवल दो नेताओं का नहीं, बल्कि दो अलग-अलग राजनीतिक नैरेटिव का रूप लेता दिखाई दे रहा है। एक ओर भाजपा अपने संगठन, सरकार और निरंतर जनसंपर्क को चुनावी ताकत के रूप में पेश कर रही है, जबकि दूसरी ओर कांग्रेस युवाओं, रोजगार और जनसंवाद को अपने अभियान का केंद्र बना रही है। आने वाले दिनों में राहुल गांधी का दौरा और उस पर जनता की प्रतिक्रिया यह संकेत दे सकती है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड की राजनीति किन मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमेगी। फिलहाल इतना तय है कि चुनावी शंखनाद से पहले ही दोनों दलों ने शब्दों की जंग तेज कर दी है।

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