बुधवार, 29 जुलाई 2026

‘आधी आबादी’ पर भाजपा का ‘फोकस’

लखपति दीदी सम्मेलन से महिला वोट बैंक पर भाजपा की नजर भाजपा ने की उत्तराखंड की 70 विधानसभाओं में मोर्चाबंदी तेज स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं से बढ़ाया राजनीतिक संवाद संगठन विस्तार संग विस चुनाव की तैयारियों को मिल गई नई धार देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 की आहट तेज होने के साथ ही भाजपा ने महिला मतदाताओं तक अपनी पहुंच मजबूत करने की रणनीति पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में भाजपा महिला मोर्चा की ओर से आयोजित किए जा रहे लखपति दीदी सम्मेलन को केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण के साथ राजनीतिक संवाद का बड़ा मंच माना जा रहा है। पार्टी की कोशिश है कि स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिलाओं के बीच अपनी पकड़ को और मजबूत किया जाए तथा इसका लाभ विधानसभा स्तर तक संगठन को मिले। उत्तराखंड में महिला मतदाता कई चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाती रही हैं। पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर मैदानी जिलों तक महिलाओं की मतदान में सक्रिय भागीदारी लगातार बढ़ी है। ऐसे में भाजपा महिला मोर्चा के सम्मेलन को महिला वोट बैंक के साथ सीधे संवाद और संगठनात्मक सक्रियता बढ़ाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार सम्मेलन में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं, उद्यमिता से जुड़े लाभार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय महिला नेतृत्व को जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि बूथ स्तर तक महिला कार्यकर्ताओं के नेटवर्क को मजबूत करना भी है। भाजपा लंबे समय से बूथ प्रबंधन को अपनी चुनावी ताकत मानती रही है। अब महिला मोर्चा के माध्यम से प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय महिला नेटवर्क तैयार करने की कवायद तेज हो गई है। पार्टी का मानना है कि यदि स्वयं सहायता समूहों और महिला स्वयंसेवकों के माध्यम से गांव-गांव तक संवाद स्थापित होता है तो चुनावी अभियान को भी मजबूती मिलेगी। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि लखपति दीदी जैसे कार्यक्रम महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की चर्चा के साथ राजनीतिक सहभागिता का भी अवसर बनते हैं। इससे पार्टी को उन वर्गों तक पहुंचने का मौका मिलता है, जो पारंपरिक राजनीतिक गतिविधियों में अपेक्षाकृत कम सक्रिय रहते हैं। उत्तराखंड के चुनावी परिदृश्य में महिलाओं की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारों के निर्णयों पर महिलाओं का प्रभाव बढ़ा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, स्वयं सहायता समूह, गैस, पेयजल, सड़क और स्वरोजगार जैसे मुद्दे महिला मतदाताओं के लिए प्रमुख रहते हैं। ऐसे में सभी राजनीतिक दल इन मुद्दों को अपने अभियान का हिस्सा बना रहे हैं। भाजपा की कोशिश है कि महिला मोर्चा के कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी लाभार्थियों तक पहुंचाई जाए और स्थानीय स्तर पर संवाद का दायरा बढ़ाया जाए। राजनीतिक दृष्टि से यह भी महत्वपूर्ण है कि कांग्रेस सहित अन्य दल भी महिला मतदाताओं के बीच अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं। ऐसे में महिला मतदाताओं को लेकर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है। आने वाले महीनों में विभिन्न दलों की महिला इकाइयों के कार्यक्रमों में भी तेजी देखी जा सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि उत्तराखंड के चुनाव केवल बड़े नेताओं की सभाओं से नहीं, बल्कि गांवों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय सामाजिक नेटवर्क तक पहुंच से भी प्रभावित होंगे। इसलिए महिला सम्मेलन जैसे कार्यक्रम राजनीतिक दृष्टि से अहम माने जा रहे हैं। भले ही विधानसभा चुनाव में अभी समय हो, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति पर काम तेज कर दिया है। भाजपा महिला मोर्चा का लखपति दीदी सम्मेलन इसी व्यापक तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है। संगठन विस्तार, महिला नेतृत्व को सक्रिय करना और लाभार्थी वर्ग से संवाद बढ़ानाकृइन तीनों बिंदुओं पर पार्टी विशेष ध्यान देती दिखाई दे रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि महिला सम्मेलन जैसे कार्यक्रम चुनावी राजनीति में कितना प्रभाव छोड़ते हैं और क्या इनका असर मतदान व्यवहार तक पहुंच पाता है। फिलहाल इतना तय है कि उत्तराखंड की 70 विधानसभा सीटों पर राजनीतिक गतिविधियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं और महिला मतदाता एक बार फिर सभी दलों की रणनीति के केंद्र में हैं।

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