बुधवार, 1 जुलाई 2026
चुनावी ‘आहट’ के बीच कांग्रेस में ‘रार’
कांग्रेस पार्टी में परिवर्तन संकल्प पर भारी पड़ रहा है आपसी कलह
मंच पर खींचतान के बाद महिला कांग्रेस की कार्यकारिणी की भंग
चुनाव से पहले गुटबाजी से फिर बैकफुट पर आया मुख्य विपक्षी दल
देहरादून। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट तेज होने लगी है। भाजपा ने जहां संगठन और सरकार के बीच तालमेल बैठाकर चुनावी तैयारियों को गति देना शुरू कर दिया है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस अभी भी अपने भीतर की खींचतान से जूझता नजर आ रहा है। पिथौरागढ़ में आयोजित परिवर्तन संकल्प सम्मेलन के दौरान सामने आए घटनाक्रम और उसके बाद जिला महिला कांग्रेस की पूरी कार्यकारिणी को भंग करने का फैसला इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है।
कांग्रेस का परिवर्तन संकल्प सम्मेलन का उद्देश्य संगठन को मजबूत करना, कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरना और आगामी चुनावों के लिए राजनीतिक रणनीति तय करना था। लेकिन सम्मेलन से जो तस्वीर बाहर आई, उसने पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए। मंच पर नेताओं के बीच मतभेद, कार्यकर्ताओं की नाराजगी और अनुशासनहीनता के आरोपों ने यह संदेश दिया कि कांग्रेस अभी भी अपने आंतरिक विरोधाभासों से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाई है।
उत्तराखंड कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी की समस्या से जूझती रही है। नेतृत्व परिवर्तन, टिकट वितरण और संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर समय-समय पर असंतोष सामने आता रहा है। पार्टी चुनावी पराजयों के बाद भी इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं खोज पाई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती भाजपा नहीं, बल्कि उसकी अपनी आंतरिक राजनीति है। जब नेता और कार्यकर्ता एक-दूसरे से संघर्ष में व्यस्त हों, तब जनता के मुद्दों पर एकजुट आंदोलन खड़ा करना कठिन हो जाता है।
लोकतंत्र में एक मजबूत विपक्ष सत्ता को जवाबदेह बनाने का सबसे बड़ा माध्यम होता है। उत्तराखंड में बेरोजगारी, पलायन, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, शिक्षा और महंगाई जैसे अनेक मुद्दे हैं, जिन पर सरकार को घेरा जा सकता है। लेकिन विपक्ष की ऊर्जा यदि आंतरिक विवादों में ही खर्च हो जाए, तो जनसरोकार के मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। यही कारण है कि कांग्रेस लगातार सरकार के खिलाफ बड़ा जनआंदोलन खड़ा करने में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाई है। जनता भी ऐसे विपक्ष को लेकर आश्वस्त नहीं होती, जो स्वयं अपने संगठन को एकजुट रखने में संघर्ष कर रहा हो।
पिथौरागढ़ जिला महिला कांग्रेस की पूरी कार्यकारिणी को भंग करने का निर्णय केवल अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है। प्रदेश नेतृत्व यह बताना चाहता है कि संगठन में अनुशासनहीनता और सार्वजनिक विवादों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, राजनीतिक जानकार यह भी मानते हैं कि केवल कार्रवाई कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जब तक संगठन के भीतर संवाद, समन्वय और सामूहिक नेतृत्व की भावना विकसित नहीं होगी, तब तक गुटबाजी की समस्या समय-समय पर सामने आती रहेगी।
2027 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए अस्तित्व और पुनरुत्थान दोनों का अवसर है। भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की रणनीति पर काम कर रही है, जबकि कांग्रेस सत्ता विरोधी माहौल को अपने पक्ष में बदलने की कोशिश कर रही है। लेकिन इसके लिए पार्टी को पहले अपने घर को व्यवस्थित करना होगा। यदि कांग्रेस रणनीति की राजनीति छोड़कर आपसी ‘रण’ में उलझी रही, तो सत्ता की लड़ाई उसके लिए और कठिन हो सकती है। जनता एक ऐसे विकल्प की तलाश में रहती है, जो संगठित, अनुशासित और मुद्दों पर केंद्रित हो। फिलहाल, कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती भाजपा नहीं, बल्कि अपने भीतर के मतभेदों को समाप्त कर एकजुटता का संदेश देना है।
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