गुरुवार, 9 जुलाई 2026

दावेदारों की ‘फौज’ टिकट की दौड़ में

उत्तराखंड की सियासत में शुरू हुआ शह और मात का खेल चुनावी शंखनाद से सत्ता बचाने और सत्ता पाने की जंग तेज दावेदारी, अपनों की नाराजगी और बाहरी पर होने लगी रार देहरादून। उत्तराखण्ड विधानसभा चुनाव 2027 में अभी कई महीने शेष हैं, लेकिन प्रदेश की राजनीति में चुनावी बिसात लगभग बिछ चुकी है। इस बार चुनाव से पहले सबसे अधिक चर्चा टिकट वितरण को लेकर है। भाजपा हो या कांग्रेस, दोनों दलों में कई सीटों पर दावेदारों की लंबी सूची है, जिन विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर नाराजगी की खबरें हैं, उनकी टिकट को लेकर भी राजनीतिक अटकलें तेज हैं। दूसरी ओर कई नए चेहरे भी सक्रिय होकर जनता के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। कई विधानसभा क्षेत्रों में स्थानीय चेहरा बनाम बाहरी उम्मीदवार की बहस भी तेज होती दिखाई दे रही है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि चुनावी तैयारियां सामान्य समय-सीमा से पहले शुरू हो गई हैं। इसके पीछे 2027 की शुरुआत में प्रस्तावित कार्यक्रमों और प्रशासनिक व्यस्तताओं को भी एक कारण माना जा रहा है, हालांकि चुनाव कार्यक्रम का अंतिम निर्णय संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा विकास, समान नागरिक संहिता, निवेश, सड़क, रेल, चारधाम यात्रा और बुनियादी ढांचे के विस्तार को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत कर रही है। संगठन स्तर पर भी पार्टी बूथ प्रबंधन, लाभार्थी संपर्क अभियान और कार्यकर्ता सम्मेलन के जरिए चुनावी मशीनरी को सक्रिय करने में जुटी है। हाल के दिनों में संगठन की बैठकों में टिकट वितरण में प्रदर्शन और संगठनात्मक सक्रियता को महत्व देने के संकेत भी दिए गए हैं। लेकिन भाजपा के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन, बेरोजगारी, महंगाई, सरकारी भर्तियों को लेकर असंतोष, कुछ विधायकों के खिलाफ स्थानीय नाराजगी और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े विवाद विपक्ष को सरकार पर हमला करने का अवसर दे रहे हैं। सबसे बड़ी चुनौती सत्ता विरोधी लहर को नियंत्रित करना होगी। उत्तराखण्ड का राजनीतिक इतिहास बताता है कि यहां मतदाता सत्ता बदलने की प्रवृत्ति भी दिखाते रहे हैं, हालांकि भाजपा ने 2022 में इस परंपरा को तोड़ा था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस जनता के बीच लगातार सक्रिय दिखाई दे रही है। पाटरग् बेरोजगारी, पेपर लीक, पलायन, महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, कानून व्यवस्था और धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही है। हाल के दिनों में बदरीनाथ धाम के चढ़ावा विवाद, भूमि, स्थानीय रोजगार और सरकारी निर्णयों को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर लगातार हमले तेज किए हैं। पार्टी का मानना है कि यदि जनाक्रोश को संगठनात्मक शक्ति में बदला गया तो 2027 का चुनाव उसके लिए अवसर बन सकता है। हालांकि कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती उसकी अपनी आंतरिक एकजुटता है। टिकट वितरण, स्थानीय गुटबाजी और नेतृत्व के बीच संतुलन बनाना पार्टी के लिए चुनाव से पहले सबसे कठिन परीक्षा माना जा रहा है। उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन की विरासत से निकला उत्तराखण्ड क्रांति दल आज भी अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन तलाश रहा है। स्थानीय मूल निवास, भू-कानून, जल-जंगल-जमीन, पलायन, पर्वतीय विकास और क्षेत्रीय अस्मिता जैसे मुद्दे यूकेडी की राजनीतिक पहचान रहे हैं। हालांकि संगठनात्मक कमजोरी और लगातार चुनावी पराजय ने उसके प्रभाव को सीमित किया है। यदि भाजपा और कांग्रेस दोनों के टिकट वितरण में असंतोष बढ़ता है तो उसका सीमित राजनीतिक लाभ क्षेत्रीय दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों को मिल सकता है। उत्तराखण्ड की राजनीति अब चुनावी मोड़ पर पहुंच चुकी है। भाजपा सत्ता की हैट्रिक का सपना देख रही है। कांग्रेस सत्ता में वापसी का अवसर तलाश रही है। क्षेत्रीय दल अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अंतिम फैसला राजनीतिक दलों का नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की जनता का होगा। आने वाले महीनों में टिकट वितरण, चुनावी घोषणाएं, जनसभाएं और स्थानीय मुद्दे यह तय करेंगे कि 2027 की लड़ाई किस दिशा में बढ़ती है। फिलहाल इतना तय है कि देवभूमि में चुनावी शंखनाद हो चुका है और अब हर राजनीतिक कदम सीधे 2027 की सत्ता की सीढ़ियों की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। बाक्स युवाओं का मूड तय करेगा चुनाव राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 का चुनाव युवाओं की आकांक्षाओं के इर्द-गिर्द घूम सकता है। सरकारी नौकरियां, स्वरोजगार, स्टार्टअप, पर्यटन आधारित रोजगार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और कौशल विकास जैसे मुद्दे पहली बार निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। सोशल मीडिया भी इस चुनाव में पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावशाली होगा। राजनीतिक दल अब केवल रैलियों पर नहीं, बल्कि डिजिटल प्रचार, वीडियो अभियान और स्थानीय कंटेंट पर भी बराबर ध्यान दे रहे हैं।

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