शनिवार, 18 जुलाई 2026
इधर ‘छात्रों की गूंज’ उधर ‘युवा अग्निवीर संवाद’
विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड में युवाओं को साधने के लिए सियासी जंग तेज
राहुल गांधी ने बेरोजगारी, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को बनाया चुनावी मुद्दा
सीएम धामी ने संवाद के जरिए राष्ट्रसेवा और रोजगार के अवसरों का संदेश दिया
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति दो समानांतर राजनीतिक आयोजनों के नाम रहा। एक ओर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का छात्रों की गूंजश् कार्यक्रम था, जहां हजारों छात्र-युवाओं की मौजूदगी में पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाए गए। दूसरी ओर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का युवा अग्निवीर संवाद था, जहां सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं और अग्निवीरों के साथ संवाद कर राष्ट्रसेवा, अनुशासन और भविष्य के अवसरों का संदेश दिया गया। पहली नजर में यह दो अलग-अलग कार्यक्रम दिखाई देते हैं, लेकिन राजनीतिक मायने कहीं अधिक गहरे हैं। दोनों आयोजनों का लक्ष्य एक ही थाकृउत्तराखंड का युवा मतदाता जो 2027 के विधानसभा चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी ने बार-बार प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी, बेरोजगारी और युवाओं के भविष्य का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वर्षों तक मेहनत करने वाले युवाओं के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए और यदि व्यवस्था उनकी मेहनत का सम्मान नहीं कर पाती, तो सरकारों को जवाब देना होगा। राहुल ने अपने संबोधन में कहा कि देश का युवा नौकरी की भीख नहीं मांग रहा, वह अपनी मेहनत का अधिकार मांग रहा है। पेपर लीक केवल एक परीक्षा नहीं बिगाड़ता, बल्कि लाखों परिवारों का भरोसा भी तोड़ देता है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं और लोकतांत्रिक तरीके से सवाल पूछते रहें। कांग्रेस का पूरा प्रयास इस कार्यक्रम के जरिए युवाओं की नाराजगी को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाने का था।
उधर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने युवा अग्निवीर संवाद में सेना में जाने की तैयारी कर रहे युवाओं और अग्निवीरों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान वीरभूमि की रही है और यहां का युवा देश की सुरक्षा में हमेशा अग्रणी रहा है। धामी ने अग्निवीर योजना से जुड़े युवाओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि राज्य सरकार पूर्व अग्निवीरों को विभिन्न सरकारी सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में प्राथमिकता देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने युवाओं से अनुशासन, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। भाजपा का संदेश स्पष्ट था कि युवा केवल सरकारी नौकरी का उम्मीदवार नहीं, बल्कि उद्यमिता, कौशल, सेना और नए अवसरों के माध्यम से भी अपना भविष्य बना सकता है।
उत्तराखंड देश के उन राज्यों में है जहां बड़ी संख्या में युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। सेना में भर्ती की परंपरा भी यहां बेहद मजबूत रही है। इसके साथ ही पलायन, सीमित औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसरों की कमी जैसे मुद्दे लंबे समय से चर्चा में हैं। यही कारण है कि आज राज्य का युवा केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और सम्मानजनक अवसरों की भी अपेक्षा रखता है। भाजपा और कांग्रेस दोनों इस मनोविज्ञान को समझ रही हैं और उसी के अनुरूप अपनी रणनीति तैयार कर रही हैं।
देहरादून में हुए दोनों कार्यक्रमों ने एक बात बिल्कुल स्पष्ट कर दीकृउत्तराखंड की राजनीति का केंद्र अब युवा है। एक मंच से व्यवस्था से सवाल पूछने का संदेश दिया गया, तो दूसरे मंच से राष्ट्र निर्माण और अवसरों का भरोसा जगाने की कोशिश हुई। अब असली परीक्षा राजनीतिक दलों की नहीं, बल्कि उनके वादों की है। क्योंकि आज का युवा केवल भाषण नहीं सुनता, वह परिणाम भी देखता है। चुनावी मंचों पर तालियां बज सकती हैं, लेकिन मतदान केंद्र तक वही मुद्दे पहुंचते हैं जो युवाओं के जीवन को सीधे प्रभावित करते हैं। 2027 की चुनावी बिसात पर भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपनी चाल चल दी है। अब देखना यह है कि उत्तराखंड का युवा किस नैरेटिव पर अधिक भरोसा करता हैकृव्यवस्था से जवाब मांगने वाले संदेश पर या अवसर और राष्ट्रनिर्माण के वादे पर।
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दो मंच, दो विचारधाराएं और लक्ष्य एक
देहरादून में जो श्य दिखाई दिया, वह आने वाले चुनाव की दिशा का संकेत भी था। राहुल गांधी ने युवाओं की नाराजगी, असंतोष और जवाबदेही को राजनीतिक मुद्दा बनाया। मुख्यमंत्री धामी ने युवाओं की आकांक्षा, राष्ट्रसेवा और अवसरों को केंद्र में रखा। कांग्रेस ने यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार युवाओं की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है, जबकि भाजपा ने यह स्थापित करने का प्रयास किया कि सरकार अवसर पैदा कर रही है और युवाओं को नई दिशा दे रही है।
आगामी चुनाव युवाओं के इर्द-गिर्द
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 का विधानसभा चुनाव जातीय या पारंपरिक समीकरणों के साथ-साथ युवाओं के मुद्दों पर भी लड़ा जाएगा। भाजपा अपने शासन, योजनाओं, निवेश, सैन्य परंपरा और रोजगार सृजन के प्रयासों को चुनावी मुद्दा बनाएगी, जबकि कांग्रेस बेरोजगारी, पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था को सरकार की सबसे बड़ी कमजोरी के रूप में पेश करने का प्रयास करेगी। यानी आने वाले महीनों में युवाओं को लेकर दोनों दलों के बीच राजनीतिक मुकाबला और तेज होने की पूरी संभावना है।
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