गुरुवार, 27 अगस्त 2026

बेरोजगारी और पलायन पर आर-पार

चुनावी रण में रोजगार के सवाल को धार देने की तैयारी उत्तराखंड के युवा मतदाताओं को साधने में जुटे राहुल गांधी राहुल का सीधा संवाद, अब बैकफुट से फ्रंटफुट पर आएंगे देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज होने के साथ ही कांग्रेस ने युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ानी शुरू कर दी है। इसी क्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के युवाओं से संवाद का कार्यक्रम प्रदेश की सियासत में नई हलचल पैदा कर सकता है। संवाद के केंद्र में रोजगार, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाएं, भर्ती प्रक्रिया और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दे रहने की संभावना है। उत्तराखंड की राजनीति में युवा मतदाता हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं। पहाड़ी राज्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में बेरोजगारी और पलायन शामिल हैं। बड़ी संख्या में युवा रोजगार और बेहतर अवसरों की तलाश में प्रदेश से बाहर जाते हैं। ऐसे में चुनाव से पहले युवाओं के बीच पहुंचना किसी भी राजनीतिक दल के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। राहुल गांधी का युवाओं से संवाद इसी राजनीतिक जरूरत से जोड़कर देखा जा रहा है। कांग्रेस इसे महज एक राजनीतिक कार्यक्रम के बजाय युवाओं की समस्याओं को सीधे सुनने और उनके मुद्दों को चुनावी विमर्श के केंद्र में लाने के प्रयास के रूप में पेश कर सकती है। उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों की भर्ती, परीक्षाओं में अनियमितता के आरोप और पेपर लीक जैसे मुद्दे पिछले कुछ वर्षों से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहे हैं। कांग्रेस लगातार इन मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधती रही है। राहुल गांधी के संवाद में भी युवाओं से उनके अनुभव जानने और रोजगार के सवाल पर सरकार को घेरने की रणनीति दिखाई दे सकती है। कांग्रेस की कोशिश होगी कि युवाओं के बीच यह संदेश जाए कि पार्टी उनके रोजगार और भविष्य के सवालों को राजनीतिक प्राथमिकता दे रही है। हालांकि, कांग्रेस के सामने चुनौती सिर्फ सरकार पर सवाल उठाने की नहीं बल्कि वैकल्पिक रोजगार नीति का स्पष्ट खाका सामने रखने की भी होगी। युवा अब केवल आरोप-प्रत्यारोप सुनने के बजाय यह जानना चाहते हैं कि सत्ता में आने पर राजनीतिक दल उनके लिए क्या करेंगे। उत्तराखंड में राजनीतिक दलों ने युवा मतदाताओं को लेकर अपनी रणनीति तेज कर दी है। सोशल मीडिया अभियान, युवा सम्मेलन, रोजगार के मुद्दों पर आंदोलन और संवाद कार्यक्रमों के जरिए राजनीतिक दल युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं। राहुल गांधी का कार्यक्रम इस अभियान को राष्ट्रीय स्तर का राजनीतिक चेहरा दे सकता है। कांग्रेस के लिए यह मौका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2027 का चुनाव उसके लिए प्रदेश की सत्ता में वापसी की बड़ी लड़ाई होगा। पार्टी की कोशिश होगी कि राहुल गांधी का संवाद सिर्फ भाषण तक सीमित न रहे, बल्कि युवाओं की वास्तविक समस्याओं और स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श से जोड़ा जाए। उत्तराखंड का युवा सिर्फ नौकरी नहीं चाहता। वह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, स्थानीय स्तर पर रोजगार, उद्यमिता के अवसर और सम्मानजनक भविष्य चाहता है। पहाड़ के युवा के लिए चुनौती और बड़ी है, क्योंकि रोजगार के अवसरों की कमी पलायन को बढ़ाती है। ऐसे में राहुल गांधी के सामने युवाओं से संवाद के दौरान कई सवाल होंगेकृपहाड़ में रोजगार कैसे आएगा? सरकारी भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी कैसे बनाया जाएगा? निजी क्षेत्र में अवसर कैसे बढ़ेंगे? पलायन रोकने के लिए क्या मॉडल होगा? स्थानीय संसाधनों से रोजगार कैसे पैदा होंगे? इन सवालों के जवाब कांग्रेस के लिए चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण होंगे। कांग्रेस के लिए राहुल गांधी का युवाओं से संवाद सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं बल्कि चुनावी नैरेटिव बनाने की कवायद भी हो सकता है। यदि पार्टी युवाओं के मुद्दों को लगातार अभियान का केंद्र बनाती है तो रोजगार बनाम विकास, भर्ती बनाम वादे और पलायन बनाम स्थानीय अवसर जैसे सवाल चुनावी बहस में प्रमुखता हासिल कर सकते हैं। भाजपा की ओर से भी कांग्रेस के आरोपों का जवाब आना तय माना जा रहा है। ऐसे में युवाओं के मुद्दे पर आने वाले दिनों में सियासी टकराव और तेज हो सकता है। 2027 की चुनावी लड़ाई में कौन सा दल युवाओं का भरोसा जीतता है, यह आने वाला समय बताएगा। लेकिन इतना तय है कि उत्तराखंड की चुनावी राजनीति में अब युवाओं को सिर्फ भीड़ के रूप में नहीं देखा जा सकता। उन्हें सुनना होगा, उनके सवालों का जवाब देना होगा और रोजगार के सवाल पर ठोस रोडमैप भी दिखाना होगा। राहुल गांधी संवाद करेंगे, नेता भाषण देंगे, पार्टियां दावे करेंगी,कृलेकिन आखिरी फैसला वही युवा करेगा, जिसके हाथ में रोजगार का सवाल और सामने भविष्य की चिंता होगी।

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