रविवार, 16 अगस्त 2026
तराई से पहाड़ तक ‘घेराबंदी’
कमजोर सीटों पर विशेष नजर, भाजपा ने तय की 2027 की पटकथा
कार्यकर्ताओं से संवाद, जमीनी हकीकत से तय होगा टिकट का फार्मूला
जहां पिछड़े थे 2022 में, वहां से 2027 की नींव मजबूत कर रही भाजपा
सीएम धामी और संगठन के दिग्गजों की हुंकार, कस ली चुनावी लगाम
देहरादून। कुमाऊं मंडल में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को लेकर भाजपा ने अपनी सक्रियता तेज कर दी है। नैनीताल में पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ सांसदों, विधायकों और संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों ने चुनावी रणनीति पर चर्चा करेंगे। बैठक में कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद कर जमीनी स्तर पर पार्टी की स्थिति, सरकार की योजनाओं और जनता के बीच बने माहौल का फीडबैक भी लिया गया। बैठक को केवल संगठनात्मक कार्यक्रम के बजाय आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कुमाऊं की राजनीति में नैनीताल समेत तराई और पर्वतीय क्षेत्रों की सीटों को लेकर भाजपा ने अभी से अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी का जोर उन विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष रूप से है, जहां पिछले चुनाव में अपेक्षित परिणाम नहीं मिले थे।
मुख्यमंत्री धामी ने कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने और स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय भूमिका निभाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संगठन की ताकत बूथ स्तर के कार्यकर्ता हैं और चुनाव में जीत का आधार भी यही कार्यकर्ता तैयार करते हैं। बैठक में सांसदों और विधायकों से उनके क्षेत्रों की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति पर भी फीडबैक लिया गया। स्थानीय स्तर पर सड़क, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, पलायन और विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर जनता की अपेक्षाओं पर चर्चा हुई। कार्यकर्ताओं ने भी अपने क्षेत्रों की समस्याएं और राजनीतिक परिस्थितियां नेतृत्व के सामने रखीं।
भाजपा के लिए कुमाऊं मंडल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों की राजनीति अलग-अलग मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमती है। नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत और ऊधमसिंह नगर की विधानसभा सीटों पर स्थानीय समीकरण लगातार बदल रहे हैं। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि सरकार की योजनाओं और संगठन की गतिविधियों को बूथ स्तर तक मजबूत किया जाए। इसके लिए सांसदों और विधायकों को भी कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संवाद बनाए रखने का संदेश दिया गया है। बैठक का एक अहम पहलू कार्यकर्ताओं के साथ सीधा संवाद रहा। भाजपा नेतृत्व अब केवल ऊपर से चुनावी रणनीति तय करने के बजाय बूथ और विधानसभा स्तर से फीडबैक जुटाने पर जोर दे रहा है। कार्यकर्ताओं से पूछा जा रहा है कि जनता के बीच सरकार को लेकर क्या धारणा है, किन मुद्दों पर नाराजगी है और किन योजनाओं का प्रभाव दिखाई दे रहा है।
राजनीतिक जानकारों की नजर में यह कवायद 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के संगठनात्मक रोडमैप का हिस्सा है। कांग्रेस जहां सत्ता विरोधी माहौल और बेरोजगारी, महंगाई, पलायन तथा स्थानीय मुद्दों को चुनावी हथियार बनाने की तैयारी कर रही है, वहीं भाजपा सरकार के कामकाज और संगठन की मजबूती को चुनावी आधार बनाने की कोशिश में है। बैठक में मुख्यमंत्री धामी की मौजूदगी को भी राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री लगातार अलग-अलग क्षेत्रों में संगठन और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद कर रहे हैं। इससे यह संकेत मिल रहा है कि चुनावी साल नजदीक आने से पहले भाजपा सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है।
बैठक से निकला सबसे बड़ा संदेश यही है कि भाजपा ने कुमाऊं में चुनावी तैयारियों को अब केवल चर्चा तक सीमित नहीं रखा है। संगठन को बूथ स्तर पर सक्रिय करने, विधायकों और सांसदों की जवाबदेही बढ़ाने तथा कार्यकर्ताओं से लगातार फीडबैक लेने की रणनीति पर काम शुरू हो चुका है। अब देखना यह होगा कि नैनीताल की बैठक में बनी रणनीति जमीन पर कितनी तेजी से उतरती है और कुमाऊं की जनता के बीच भाजपा के लिए यह राजनीतिक संवाद कितना असरदार साबित होता है।
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