शनिवार, 26 सितंबर 2026

एक सीट, 24 दावेदार

राज्यसभा के एक टिकट ने भाजपा के भीतर बढ़ाई दावेदारों की बेचौनी कोर कमेटी में नहीं बनी सहमति,अब सीएम धामी-भट्ट-शर्मा तय करेंगे नाम उत्तराखंड में भाजपा के भीतर राज्यसभा की एक सीट ने सियासी हलचल तेज देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा के भीतर राज्यसभा की एक सीट ने सियासी हलचल तेज कर दी है। एक सीट और दावेदार करीब दो दर्जन। यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि राज्यसभा की कुर्सी को लेकर पार्टी के भीतर कितनी जोरदार दावेदारी है। शुक्रवार को हुई भाजपा की प्रदेश कोर कमेटी की बैठक में करीब 24 नामों पर मंथन हुआ, लेकिन किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन सकी। आखिरकार अब संभावित दावेदारों में से तीन या पांच नामों का पैनल तैयार करने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और प्रदेश महामंत्री संगठन फणींद्रनाथ शर्मा को सौंपी गई है। राज्यसभा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह सीट खाली होगी। इसके लिए भाजपा के भीतर दावेदारों की लंबी फेहरिस्त सामने आना महज टिकट की सामान्य दावेदारी नहीं माना जा रहा। 2027 के विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़ी भाजपा के लिए राज्यसभा का यह चयन संगठन, सामाजिक समीकरण और क्षेत्रीय संतुलनकृतीनों को साधने की चुनौती भी है। भाजपा ने आधिकारिक रूप से दावेदारों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। पार्टी की ओर से इतना जरूर बताया गया है कि सामने आए करीब 24 नामों में महिला, अनुसूचित जाति-जनजाति और युवा वर्ग समेत विभिन्न सामाजिक समूहों से जुड़े चेहरे शामिल हैं। यानी अंतिम चयन केवल व्यक्तिगत दावेदारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व का गणित भी महत्वपूर्ण होगा। इसके साथ ही गढ़वाल-कुमाऊं संतुलन का सवाल भी चर्चा में है। मीडिया रिपोर्टों में कुमाऊं को प्रतिनिधित्व देने और वैश्य समाज के चेहरे को मौका देने जैसे अलग-अलग समीकरणों की चर्चा है। पूर्व मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल का नाम भी चर्चाओं में आया है, हालांकि पार्टी ने किसी नाम को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की है। राज्यसभा का टिकट ऐसे समय में सामने आया है जब भाजपा उत्तराखंड में 2027 की चुनावी तैयारी को तेज कर रही है। ऐसे में राज्यसभा का एक टिकट केवल उच्च सदन की सदस्यता नहीं, बल्कि संगठन के भीतर राजनीतिक महत्व और भविष्य की भूमिका से भी जुड़ा माना जा रहा है। यही वजह है कि पूर्व मुख्यमंत्री से लेकर संगठन के वरिष्ठ नेताओं और अलग-अलग सामाजिक समूहों के चेहरों तक के नामों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। मीडिया रिपोर्टों में रमेश पोखरियाल निशंक, तीरथ सिंह रावत, नरेश बंसल, अनिल गोयल, मदन कौशिक, ज्योति प्रसाद गैरोला, बलराज पासी और केदार जोशी समेत कई नामों की चर्चा हुई है। हालांकि इनमें से किसी नाम को भाजपा ने प्रत्याशी के रूप में घोषित नहीं किया है। कोर कमेटी के सामने करीब 24 नाम आने के बाद अब सबसे कठिन काम नाम छांटने का है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और प्रदेश महामंत्री संगठन फणींद्रनाथ शर्मा तीन या पांच नामों का पैनल तैयार करेंगे। इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व अंतिम नाम पर निर्णय करेगा। यानी प्रदेश भाजपा के भीतर चल रही दावेदारी का पहला दौर खत्म हो चुका है, लेकिन असली राजनीतिक परीक्षा अब शुरू होगी। दो दर्जन से अधिक दावेदारों में से कुछ नाम पैनल तक पहुंचेंगे और अंततः एक चेहरे पर केंद्रीय नेतृत्व की मुहर लगेगी। इस पूरी कवायद का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि भाजपा के सामने अगले वर्ष विधानसभा चुनाव है। राज्यसभा के लिए चुना जाने वाला चेहरा संगठन के भीतर पार्टी की प्राथमिकताओं का संकेत भी माना जाएगा। महिला, युवा, एससी-एसटी, क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन बनाते हुए पार्टी किस तरह का संदेश देती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल तस्वीर यही हैकृकि सीट एक है, दावेदार करीब 24। नामों की कतार लंबी है और अंतिम फैसला दिल्ली में होना है। लेकिन उससे पहले उत्तराखंड भाजपा के भीतर चल रही दावेदारी ने यह जरूर साफ कर दिया है कि राज्यसभा की यह सीट पार्टी के नेताओं के लिए कितनी महत्वपूर्ण हो चुकी है।

कोई टिप्पणी नहीं: