शनिवार, 26 सितंबर 2026
गंगा किनारे से हरदा की ‘हुंकार’
गंगा पूजन के बाद भावुक हुए पूर्व मुख्यमंत्री, बोलेकृहरिद्वार से चुनाव लड़ने की है इच्छा
अंतिम फैसला परिस्थितियों पर, अंतिम यात्रा भी हरिद्वार के प्रतिनिधि के तौर पर निकले
अंतिम निर्णय उस समय की परिस्थितियों, समय, स्वास्थ्य और उम्र को देखते हुए लिया जाएगा
देहरादून। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हरिद्वार से आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताने के अगले ही दिन हरकी पैड़ी पहुंचकर मां गंगा का विधि-विधान से पूजन किया। गंगा पूजन के बाद पत्रकारों से बातचीत में रावत ने अपनी राजनीतिक इच्छा के साथ ही हरिद्वार से अपने पुराने रिश्ते को भावुक अंदाज में सामने रखा। उन्होंने कहा कि उनके मन में हरिद्वार से चुनाव लड़ने की इच्छा जरूर है, लेकिन अंतिम निर्णय उस समय की परिस्थितियों, समय, स्वास्थ्य और उम्र को देखते हुए लिया जाएगा। रावत ने इससे भी आगे बढ़कर कहा कि उनकी इच्छा है कि जीवन के अंतिम समय में उनकी अंतिम यात्रा हरिद्वार के प्रतिनिधि के तौर पर निकले। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव की राजनीतिक तैयारियां तेज हो रही हैं और कांग्रेस के भीतर संभावित उम्मीदवारों तथा चुनावी नेतृत्व को लेकर मंथन का दौर चल रहा है।
हरीश रावत ने एक दिन पहले ही इंटरनेट मीडिया पोस्ट के माध्यम से हरिद्वार से विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी। उन्होंने 2009 से 2014 के बीच हरिद्वार से लोकसभा प्रतिनिधित्व के दौर को अपने राजनीतिक जीवन का स्वर्णिम काल बताया और कहा कि उस दौरान मतदाताओं के साथ उनके व्यक्तिगत रिश्ते बने। उन्होंने हरिद्वार को विधानसभा में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने और क्षेत्र के लिए अपनी योजनाओं पर काम करने की इच्छा भी व्यक्त की। यानी शुक्रवार को हरकी पैड़ी पहुंचना महज धार्मिक यात्रा भर नहीं रहा। इसके साथ रावत ने अपनी राजनीतिक मंशा को भी सार्वजनिक रूप से दोहराया। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव लड़ने का अंतिम फैसला परिस्थितियों के अनुसार ही होगा।
हरिद्वार हरीश रावत के राजनीतिक सफर का महत्वपूर्ण अध्याय रहा है। वर्ष 2009 से 2014 तक वह हरिद्वार के सांसद रहे। अब विधानसभा चुनाव से पहले उसी क्षेत्र से विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताना उनके लिए राजनीतिक रूप से एक नए अध्याय की संभावना खोलता है। रावत के बयान का दूसरा पहलू कांग्रेस के लिए है। यदि वह वास्तव में हरिद्वार की किसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का निर्णय लेते हैं तो पार्टी को संबंधित सीट के संभावित दावेदारों और स्थानीय संगठन के समीकरणों के साथ तालमेल बैठाना होगा। फिलहाल रावत ने अपनी ओर से अंतिम उम्मीदवारी घोषित नहीं की है, इसलिए इसे दावेदारी की सार्वजनिक इच्छा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
रावत की राजनीति में हरिद्वार का भावनात्मक पक्ष पहले से मौजूद रहा है। लेकिन इस बार उनका बयान ऐसे समय आया है जब चुनावी राजनीति धीरे-धीरे टिकट और सीटों के समीकरण की ओर बढ़ रही है। ऐसे में उनके हरिद्वार पहुंचने और गंगा पूजन के बाद दिए गए बयान ने उनकी राजनीतिक सक्रियता को लेकर चर्चा को जरूर तेज किया है। हाल के दिनों में रावत ने 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी के निर्णय को सर्वाेपरि बताते हुए कांग्रेस की चुनावी भूमिका पर भी बात की है। इससे संकेत मिलता है कि वह चुनावी राजनीति से अपने जुड़ाव को सार्वजनिक रूप से बनाए हुए हैं। रावत यदि हरिद्वार से चुनाव लड़ने का निर्णय लेते हैं तो कांग्रेस के सामने दो स्तरों पर समीकरण साधने की चुनौती होगी। पहला, संबंधित विधानसभा सीट का स्थानीय संगठन और संभावित दावेदार। दूसरा, रावत के लंबे राजनीतिक अनुभव और उनके समर्थक आधार को चुनावी रणनीति में किस तरह जोड़ा जाए।
हालांकि अभी कांग्रेस ने हरिद्वार की किसी सीट से रावत की उम्मीदवारी घोषित नहीं की है। इसलिए फिलहाल यह मामला हरीश रावत की इच्छा बनाम कांग्रेस के अंतिम निर्णय के बीच है। हरीश रावत ने हरिद्वार के साथ अपने पुराने राजनीतिक रिश्ते को याद करते हुए जिस तरह अपनी बात रखी है, उसमें व्यक्तिगत भावना और राजनीतिक संकेत दोनों दिखाई देते हैं। एक तरफ वह हरिद्वार को अपने राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय बता रहे हैं, दूसरी तरफ चुनाव लड़ने के अंतिम निर्णय को पार्टी और परिस्थितियों पर छोड़ रहे हैं। लेकिन उनकी यह सार्वजनिक इच्छा अब कांग्रेस की चुनावी चर्चा का हिस्सा बन चुकी है।गंगा के किनारे खड़े होकर हरीश रावत ने सिर्फ अपनी पुरानी यादें नहीं दोहराईं, बल्कि 2027 की राजनीति के लिए हरिद्वार का दरवाजा भी अपने लिए खुला रखा है। अब देखना यह होगा कि यह इच्छा चुनावी मैदान तक पहुंचती है या कांग्रेस का अंतिम निर्णय कोई दूसरा रास्ता तय करता है।
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