शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
चुनावी दहलीज पर ‘उबला’ उत्तराखंड
कांग्रेसी मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर दिखाएगी आर-पार का दम
दलित सम्मान के मुद्दे पर सरकार की चुप्पी को कांग्रेस ने बनाया ढाल
कांग्रेस पार्टी ने जांच व एफआईआर की मांग पर प्रदेश सरकार को घेरा
देहरादून। हल्द्वानी के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद कथित शुद्धिकरण को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने के बजाय अब उत्तराखंड की सियासत के केंद्र में पहुंच गया है। कांग्रेस ने मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर 7 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास कूच का ऐलान कर दिया है। वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई न किया जाना इस बात का प्रमाण है कि सरकार का संबंधित धार्मिक संगठन के साथ कहीं न कहीं गठजोड़ है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के इस बयान ने विवाद को और राजनीतिक रंग दे दिया है। गोदियाल का कहना है कि यदि सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से लेती तो अब तक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी होती। लेकिन सरकार की चुप्पी और कार्रवाई का अभाव कई सवाल खड़े कर रहा है।
गोदियाल ने सवाल उठाया कि सार्वजनिक स्थल पर आयोजित राजनीतिक कार्यक्रम के बाद कथित शुद्धिकरण जैसी गतिविधि को लेकर शिकायतें सामने आने के बावजूद सरकार कार्रवाई से पीछे क्यों हट रही है। कांग्रेस का आरोप है कि मामला केवल एक मैदान में पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान का नहीं है। सवाल यह है कि क्या किसी राजनीतिक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष की सभा के बाद उस स्थल को अपवित्र मानकर शुद्धिकरण किया जाना सामाजिक और राजनीतिक रूप से स्वीकार्य है? कांग्रेस इसी सवाल को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ाने की तैयारी में है। गोदियाल ने आरोप लगाया कि सरकार अगर निष्पक्ष है तो उसे बिना किसी दबाव के पूरे मामले की जांच करानी चाहिए और जो भी दोषी हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
कांग्रेस ने अब इस मुद्दे को विधानसभा और पार्टी कार्यालयों की बयानबाजी से निकालकर सड़क पर ले जाने का फैसला किया है। पार्टी ने 7 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास कूच का आह्वान किया है। पार्टी की कोशिश है कि हल्द्वानी के विवाद को केवल स्थानीय घटना न रहने दिया जाए, बल्कि इसे सामाजिक सम्मान, संविधान और सरकार की जवाबदेही के बड़े मुद्दे के रूप में जनता के सामने रखा जाए। कांग्रेस के लिए यह आंदोलन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को आक्रामक मोड में लाने की कोशिश कर रही है।
विवाद अब सीधे भाजपा सरकार की जवाबदेही से जुड़ गया है। कांग्रेस लगातार पूछ रही है कि आखिर सरकार ने कथित शुद्धिकरण मामले में क्या कार्रवाई की? क्या पूरे घटनाक्रम की जांच हुई? जिम्मेदार लोगों की पहचान हुई या नहीं? और अगर पहचान हुई तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? भाजपा के लिए चुनौती यह है कि वह कांग्रेस के आरोपों को सिर्फ राजनीतिक बयान बताकर खारिज करे या पूरे मामले पर अपना स्पष्ट पक्ष सामने रखे। क्योंकि कांग्रेस ने अब एक ऐसा राजनीतिक सवाल खड़ा कर दिया है, जिसका जवाब केवल हल्द्वानी तक सीमित नहीं रहेगा।
खड़गे की हल्द्वानी रैली के बाद शुरू हुआ विवाद अब कुमाऊं से निकलकर देहरादून पहुंच चुका है। कांग्रेस मुख्यमंत्री आवास कूच के जरिए सीधे सरकार के दरवाजे पर दस्तक देने जा रही है। दिलचस्प यह है कि इसी बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के हल्द्वानी दौरे और प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को लेकर भी राजनीतिक हलचल तेज है। ऐसे में कांग्रेस का आंदोलन और भाजपा का संगठनात्मक कार्यक्रम एक-दूसरे के समानांतर राजनीतिक संदेश देने की स्थिति बना रहे हैं।
कांग्रेस जहां शुद्धिकरण विवाद को सामाजिक सम्मान और संवैधानिक मूल्यों से जोड़ रही है, वहीं भाजपा के सामने संगठन को चुनावी रूप से मजबूत करने के साथ विपक्ष के हमलों का जवाब देने की चुनौती है। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव भले अभी कुछ समय दूर हों, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है। ऐसे में हल्द्वानी का विवाद कांग्रेस के लिए भाजपा को घेरने का नया हथियार बन गया है। कांग्रेस की रणनीति साफ हैकृरामलीला मैदान से उठे सवाल को मुख्यमंत्री आवास तक ले जाना। अब देखना यह है कि 7 सितंबर को कांग्रेस का आंदोलन कितना बड़ा रूप लेता है और सरकार इस पूरे विवाद पर क्या रुख अपनाती है। फिलहाल हल्द्वानी का रामलीला मैदान उत्तराखंड की राजनीति का नया अखाड़ा बन चुका है।
एक तरफ कांग्रेस कार्रवाई की मांग को लेकर सड़क पर उतरने की तैयारी में है, दूसरी तरफ भाजपा संगठनात्मक ताकत के साथ मैदान में उतर रही है और इस पूरे राजनीतिक टकराव के बीच सबसे बड़ा सवाल वही हैकृ शुद्धिकरण किसका हुआ और अब सरकार की चुप्पी किस चीज को साफ कर रही है?
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